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August 22 2026 05:05 pm

Sawan Purnima & Raksha Bandhan 2026: 27 या 28 अगस्त, कब है सावन पूर्णिमा? दूर करें तारीख का कन्फ्यूजन

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सावन माह की पूर्णिमा सनातन धर्म में बेहद खास मानी जाती है। इसी पावन दिन भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन मनाया जाता है और इसी के साथ पवित्र सावन मास का समापन भी होता है। साल 2026 में पूर्णिमा तिथि को लेकर लोगों के बीच 27 और 28 अगस्त की तारीखों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आइए जानते हैं कि सावन पूर्णिमा कब मनाई जाएगी, भद्रा का क्या समय रहेगा और राखी बांधने का सबसे सटीक व शुभ मुहूर्त कौन सा है।

27 या 28 अगस्त: कब है सावन पूर्णिमा?

पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 की सुबह शुरू होकर 28 अगस्त 2026 की सुबह तक रहेगी। सनातन परंपरा में व्रत, स्नान-दान और त्योहार हमेशा उदयातिथि (सूर्य उदय के समय मौजूद तिथि) के आधार पर मनाए जाते हैं। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय पूर्णिमा तिथि में ही होगा, इसलिए सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन का मुख्य पर्व शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को ही मनाया जाएगा।

विवरणसमय एवं दिन
पूर्णिमा तिथि शुरू27 अगस्त 2026, सुबह 09:08 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त28 अगस्त 2026, सुबह 09:48 बजे
उदयातिथि (मुख्य पर्व)28 अगस्त 2026 (शुक्रवार)
स्नान-दान का शुभ समय28 अगस्त, प्रातः काल (सूर्योदय से पूर्णिमा समाप्ति तक)

भद्रा का साया और राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन पर भद्रा काल का विशेष ध्यान रखा जाता है, क्योंकि भद्रा के दौरान राखी बांधना अशुभ माना जाता है। 27 अगस्त को सुबह 09:08 बजे से पूर्णिमा के साथ ही भद्रा शुरू हो जाएगी और रात लगभग 09:32 बजे तक रहेगी, जिस कारण 27 अगस्त को दिन में राखी बांधना वर्जित रहेगा। वहीं, 28 अगस्त को सूर्योदय से पहले ही भद्रा समाप्त हो जाएगी, जिससे यह दिन पूरी तरह दोषमुक्त और शुभ रहेगा।

28 अगस्त को सुबह सूर्योदय के तुरंत बाद से लेकर पूर्णिमा समाप्त होने तक राखी बांधने का सर्वश्रेष्ठ समय रहेगा:

शुभ मुहूर्त: सुबह 05:57 बजे से सुबह 09:48 बजे तक

कुल अवधि: लगभग 3 घंटे 51 मिनट

सावन पूर्णिमा पर करें ये खास उपाय

शिवजी का जलाभिषेक: सावन का आखिरी दिन होने के कारण इस दिन शिवलिंग पर कच्चा दूध, जल और बेलपत्र अर्पित करने से पूरे महीने की पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

गंगा स्नान और दान: सुबह किसी पवित्र नदी में स्नान करें या नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद जरूरतमंदों को अनाज या वस्त्र का दान करें।

सत्यनारायण कथा: घर में सुख-समृद्धि और शांति के लिए इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा पढ़ना या सुनना अत्यंत फलदायी माना जाता है।