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August 12 2026 08:32 am

सावन अमावस्या पर बन रहा दुर्लभ शुभ योग, जानें पवित्र स्नान-दान का सबसे सटीक मुहूर्त, पूजा विधि और पितृ दोष मुक्ति के अचूक उपाय

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सनातन परंपरा में श्रावण मास (सावन) को भगवान शिव की भक्ति के लिए वर्ष का सबसे पवित्र महीना माना गया है। इस पावन महीने में पड़ने वाली अमावस्या को 'सावन अमावस्या' या 'हरियाली अमावस्या' के नाम से जाना जाता है। धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से सावन अमावस्या का महत्व अत्यंत विशिष्ट होता है, क्योंकि यह दिन देवों के देव महादेव की आराधना के साथ-साथ अपने पूर्वजों यानी पितरों के तर्पण और पिंड दान के लिए भी बेहद फलदायी माना जाता है। सावन का महीना प्रकृति के पुनर्जन्म और चारों ओर छाई हरियाली का प्रतीक होता है, इसलिए इस दिन वृक्षारोपण करने की भी प्राचीन परंपरा चली आ रही है।

वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का क्षय होता है और निष्काम भाव से किया गया दान-पुण्य व्यक्ति को जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति दिलाता है। मान्यता है कि इस तिथि पर पितृ देव धरती पर सूक्ष्म रूप में आते हैं और अपने वंशजों द्वारा किए गए तर्पण, श्राद्ध और दान से तृप्त होकर उन्हें सुख, समृद्धि व वंश वृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष, कालसर्प दोष या शनि की ढैय्या-साढ़ेसाती का प्रभाव हो, तो सावन अमावस्या पर किए गए विशेष धार्मिक अनुष्ठान इन सभी ग्रहों के दुष्परिणामों को निष्फल कर देते हैं।

सावन अमावस्या 2026 तिथि और स्नान-दान का सर्वोत्तम शुभ मुहूर्त

सावन अमावस्या पर स्नान और दान का फल तभी पूर्ण रूप से प्राप्त होता है जब यह कार्य सही शुभ मुहूर्त में संपन्न किया जाए। पंचांगीय गणना के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का प्रारंभ और समापन काल अत्यंत शुभ योगों का निर्माण कर रहा है।

अमावस्या तिथि प्रारंभ: सावन कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि की शुरुआत तड़के से हो रही है।

अमावस्या तिथि समाप्त: अमावस्या तिथि का समापन अगले दिन तड़के होगा।

ब्रह्म मुहूर्त (स्नान का सबसे शुभ समय): प्रातः 04:25 बजे से प्रातः 05:10 बजे तक। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में किया गया नदी स्नान मोक्ष प्रदायी होता है।

प्रातःकालीन स्नान एवं ध्यान मुहूर्त: प्रातः 05:45 बजे से प्रातः 07:30 बजे तक। इस दौरान सूर्य देव को अर्घ्य देना और तट पर दान करना अत्यंत फलदायी है।

शुभ (लाभ-अमृत) चौघड़िया मुहूर्त (पूजा व दान के लिए): प्रातः 08:30 बजे से पूर्वाह्न 11:45 बजे तक।

अभिजित मुहूर्त (पितृ तर्पण एवं पिंड दान का समय): दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक। ज्योतिष शास्त्र में अभिजित मुहूर्त को किसी भी प्रकार के तर्पण, श्राद्ध कर्म और विशेष दान के लिए सबसे उत्तम माना गया है।

यदि आप किसी पवित्र नदी (जैसे गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा) के तट पर नहीं पहुँच सकते हैं, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। ऐसा करने से भी तीर्थ स्नान के समान ही पुण्य की प्राप्ति होती है।

सावन अमावस्या पर इस विधि से करें भगवान शिव और पितरों की पूजा

सावन अमावस्या के दिन प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्य देव को जल में तिल व अक्षत मिलाकर अर्घ्य दें। इसके पश्चात अपने घर के पूजा स्थान को स्वच्छ करें और व्रत व पूजा का संकल्प लें। सावन का महीना होने के कारण सबसे पहले पार्थिव शिवलिंग या घर में स्थित शिवलिंग का जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक करें।

शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, सफेद आंकड़े के फूल और भस्म अर्पित करें। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार मानसिक जाप करें या शिव चालीसा का पाठ करें। शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल और बेलपत्र जीवन के सभी रोगों और संतापों को दूर करता है। इसके बाद दोपहर के समय अपने पितरों का ध्यान करते हुए दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके बैठें। एक तांबे के पात्र में जल, थोड़ा सा कच्चा दूध, काले तिल और कुश लेकर पितरों को जलांजलि (तर्पण) दें। 'ॐ पितृभ्यो नमः' मंत्र का जाप करते हुए तीन बार जल अर्पित करें। इसके बाद पितरों के नाम से निकाला गया भोजन (पंचबलि - गाय, कुत्ता, कौआ, देव और चींटी) निकालें और किसी योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराकर सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा व वस्त्र दान करें।

हरियाली अमावस्या पर वृक्षारोपण का महत्व: कौन से पौधे लगाना होता है शुभ?

सावन अमावस्या को 'हरियाली अमावस्या' भी कहा जाता है। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि वृक्षों में विभिन्न देवी-देवताओं और पितरों का वास होता है। इसलिए इस दिन पौधे लगाना केवल पर्यावरण की रक्षा ही नहीं, बल्कि एक महान धार्मिक और आध्यात्मिक कार्य भी माना गया है। मत्स्य पुराण के अनुसार, एक पौधा लगाना दस पुत्रों के समान पुण्य प्रदान करता है।

पीपल का पौधा: पीपल के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ-साथ सभी पितरों का वास माना गया है। सावन अमावस्या पर पीपल का पौधा लगाने और उसकी सेवा करने से भयंकर से भयंकर पितृ दोष समाप्त हो जाता है।

बरगद (वट वृक्ष): वट वृक्ष भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बरगद का पेड़ लगाने से परिवार में दीर्घायु, स्वास्थ्य और वंश वृद्धि का वरदान मिलता है।

बिल्वपत्र (बेल का पौधा): भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है। सावन अमावस्या पर बेल का पौधा लगाने से शिव कृपा से घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती और दरिद्रता का नाश होता है।

तुलसी और आंवला: तुलसी और आंवले के पौधे लगाने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की अखंड कृपा प्राप्त होती है और घर का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।

पितृ दोष, कालसर्प दोष और शनि प्रकोप से मुक्ति के अचूक उपाय

यदि आपकी कुंडली में पितृ दोष के कारण तरक्की रुकी हुई है, विवाह में बाधा आ रही है या संतान सुख में विलंब हो रहा है, तो सावन अमावस्या का दिन इन दोषों की शांति के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

दीपदान और पीपल पूजा: सावन अमावस्या की शाम को पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं और उसमें काले तिल डालें। पीपल की 7 बार परिक्रमा करें और अपनी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें। इससे शनि देव और पितृ देव दोनों प्रसन्न होते हैं।

कालसर्प दोष निवारण उपाय: इस दिन तांबे के लोटे में जल, दूध और थोड़े काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें और चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा नदी में प्रवाहित करें या मंदिर में अर्पित करें। इससे कालसर्प दोष के नकारात्मक प्रभावों से राहत मिलती है।

महाकाल महामृत्युंजय पाठ: सावन अमावस्या की रात को घर में या शिव मंदिर में बैठकर 'महामृत्युंजय मंत्र' का जप करें या किसी योग्य पंडित से करवाएं। इससे अकाल मृत्यु का भय टलता है और गंभीर बीमारियों में सुधार आता है।

अन्न और वस्त्र दान: इस दिन किसी गरीब या अनाथ आश्रम में भोजन, उड़द की दाल, काले तिल, छाता, चप्पल और सूती वस्त्रों का दान करें। इस दान से राहु-केतु और शनि के अशुभ प्रभाव समाप्त होते हैं।

सावन अमावस्या पर क्या करें और क्या न करें?

शास्त्रों में सावन अमावस्या के दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है ताकि घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश न हो:

क्या करें: प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें, सात्विक भोजन ग्रहण करें, क्रोध और छल-कपट से दूर रहें, जरूरतमंदों की मदद करें, और पूरा दिन भक्ति भाव में बिताएं।

क्या न करें: सावन अमावस्या के दिन तामसिक भोजन (मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज) का सेवन बिल्कुल न करें। इस दिन घर में कलह या अपशब्दों का प्रयोग न करें और किसी बुजुर्ग या याचक का अपमान न करें। इसके अतिरिक्त, इस दिन बाल या नाखून काटना और देर तक सोना वर्जित माना गया है।

सावन अमावस्या का पावन पर्व भगवान शिव और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने का अद्भुत अवसर है। सही मुहूर्त में स्नान-दान और पूजा-पाठ करके आप न केवल अपने जीवन के संकटों को दूर कर सकते हैं, बल्कि अपने पूरे परिवार के लिए सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त कर सकते हैं।