मिचेल स्टार्क की घातक गेंदबाजी ने उड़ाए होश! कपिल देव का महान रिकॉर्ड टूटने की कगार पर
विश्व क्रिकेट के इतिहास में जब भी तेज गेंदबाजी के दिग्गजों की बात आती है, तो भारत के पूर्व महान कप्तान कपिल देव का नाम बड़े गर्व से लिया जाता है। 1994 में जब कपिल देव ने 131 टेस्ट मैचों में 434 विकेट लेकर संन्यास लिया था, तो वह उस दौर का एक अविश्वसनीय और ऐतिहासिक आंकड़ा था। हालांकि, आधुनिक दौर के ऑस्ट्रेलियाई स्टार तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क ने अपनी आग उगलती स्विंग गेंदों के दम पर कपिल देव के इस दशकों पुराने रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच डार्विन के मारारा क्रिकेट ग्राउंड पर खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच में मिचेल स्टार्क ने बांग्लादेशी सलामी बल्लेबाज शदमन इस्लाम को आउट करके अपने टेस्ट करियर का 434वां शिकार बनाया।
इस ऐतिहासिक सफलता के साथ ही मिचेल स्टार्क अब टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सर्वकालिक सूची में कपिल देव के साथ संयुक्त रूप से 11वें स्थान पर पहुंच गए हैं। जहाँ कपिल देव ने 434 विकेटों तक पहुंचने के लिए 131 टेस्ट मैच खेले थे, वहीं मिचेल स्टार्क ने यह विशाल उपलब्धि केवल 106वें टेस्ट मुकाबले में ही हासिल कर ली। 36 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज का यह प्रदर्शन दर्शाता है कि उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी रफ्तार, स्विंग और विकेट लेने की भूख में कोई कमी नहीं आई है।
रंगाना हेराथ को पछाड़कर बने टेस्ट इतिहास के नंबर-1 बाएं हाथ के गेंदबाज
कपिल देव के रिकॉर्ड की बराबरी करने के साथ-साथ मिचेल स्टार्क ने एक और ऐसा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है, जो उन्हें बाएं हाथ के गेंदबाजों का 'बादशाह' बनाता है। इस मुकाबले से पहले स्टार्क श्रीलंका के पूर्व दिग्गज बाएं हाथ के स्पिनर रंगाना हेराथ के साथ 433 विकेटों पर बराबरी पर खड़े थे। जैसे ही स्टार्क ने शदमन इस्लाम का विकेट चटकाया, उन्होंने रंगाना हेराथ (433 विकेट) के आंकड़े को पीछे छोड़ दिया और टेस्ट क्रिकेट के 149 साल से अधिक लंबे इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बाएं हाथ के गेंदबाज बन गए।
इस सूची में अब मिचेल स्टार्क (434 विकेट) शीर्ष पर हैं, जबकि रंगाना हेराथ (433) दूसरे स्थान पर खिसक गए हैं। इसके बाद पाकिस्तान के स्विंग के सुल्तान वसीम अकरम (414 विकेट), श्रीलंका के चमोंडा वास (355 विकेट) और भारत के जहीर खान (311 विकेट) का नंबर आता है। स्टार्क का यह रिकॉर्ड इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि वे आधुनिक क्रिकेट के सबसे खौफनाक और निरंतर प्रदर्शन करने वाले बाएं हाथ के पेसर हैं।
डेल स्टेन का रिकॉर्ड निशाने पर: टेस्ट क्रिकेट के टॉप 10 दिग्गजों में एंट्री की ओर कदम
कपिल देव के 434 विकेटों की बराबरी करने के बाद मिचेल स्टार्क की नजरें अब टेस्ट क्रिकेट के इतिहास के सबसे एक्सक्लूसिव क्लब यानी 'टॉप 10 सर्वकालिक विकेट टेकर्स' में शामिल होने पर टिकी हैं। फिलहाल टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की शीर्ष 10 सूची में 10वें स्थान पर दक्षिण अफ्रीका के पूर्व खौफनाक तेज गेंदबाज डेल स्टेन का नाम दर्ज है। डेल स्टेन ने अपने सुनहरे टेस्ट करियर में 93 मैचों में 439 विकेट हासिल किए थे।
मिचेल स्टार्क अब डेल स्टेन के रिकॉर्ड से केवल 6 विकेट दूर हैं। बांग्लादेश के खिलाफ जारी दो मैचों की टेस्ट सीरीज में यदि स्टार्क 6 और विकेट हासिल कर लेते हैं, तो वे डेल स्टेन (439) को पछाड़कर टेस्ट इतिहास के टॉप 10 गेंदबाजों में आधिकारिक तौर पर प्रवेश कर जाएंगे। यदि वे ऐसा करने में सफल रहते हैं, तो वे शेन वॉर्न (708), नाथन लायन (567) और ग्लेन मैक्ग्रा (563) के बाद दुनिया के टॉप 10 टेस्ट गेंदबाजों में जगह बनाने वाले चौथे ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी बन जाएंगे।
16 साल का लंबा करियर और फिटनेस का अद्भुत उदाहरण
सन् 2010 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले मिचेल स्टार्क ने अपने 16 साल लंबे करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। एक समय ऐसा भी था जब लगातार चोटों के कारण उनकी फिटनेस पर सवाल उठते थे, लेकिन स्टार्क ने अपनी ट्रेनिंग और वर्कलोड मैनेजमेंट में ऐसा बदलाव किया कि वे आज 36 साल की उम्र में भी 145 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी कर रहे हैं। स्टार्क ने खुद अपनी इस सफलता का श्रेय अपने खेल के निरंतर विकास को दिया है।
स्टार्क का मानना है कि केवल रफ्तार के दम पर लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टिके रहना मुमकिन नहीं है। उन्होंने समय के साथ अपनी गेंदबाजी में 'वॉबल सीम' (wobble seam) और पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग कराने की कला में महारत हासिल की। इसके अलावा, सीमित ओवरों के क्रिकेट और निजी लीग्स की जगह टेस्ट क्रिकेट को प्राथमिकता देना भी उनकी लंबी उम्र और सफलता की बड़ी वजह रहा है।
कपिल देव की विरासत और मिचेल स्टार्क का विनम्र बयान
भले ही मिचेल स्टार्क कपिल देव के विकेटों के आंकड़े को पार करने के बेहद करीब हैं, लेकिन भारतीय क्रिकेट में कपिल देव की विरासत की अहमियत कभी कम नहीं हो सकती। 1970 और 80 के दशक में, जब भारत में तेज गेंदबाजी के लिए अनुकूल सुविधाएं और सपोर्ट स्टाफ उपलब्ध नहीं था, तब कपिल देव ने बिना किसी प्रमुख चोट के लगातार 131 टेस्ट मैच खेले और 400 से अधिक विकेट लेने के साथ-साथ 5,000 से अधिक रन भी बनाए।
कपिल देव के इस आंकड़े तक पहुंचने पर मिचेल स्टार्क ने भी बेहद विनम्रता जताई। स्टार्क ने एक इंटरव्यू में कहा कि इतने महान खिलाड़ियों और दिग्गजों के नाम के साथ अपना नाम सुना जाना बेहद खास और सम्मानजनक है। हालांकि, स्टार्क का मानना है कि जब तक आप खेल रहे होते हैं, तब तक आंकड़ों पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए और सिर्फ अगले मैच और अपनी टीम की जीत पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए।
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के चौथे सबसे सफल गेंदबाज और भविष्य की राह
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के इतिहास में मिचेल स्टार्क का योगदान अद्वितीय है। कंगारू देश के लिए सबसे ज्यादा टेस्ट विकेट लेने के मामले में वे केवल शेन वॉर्न (708), नाथन लायन (567) और ग्लेन मैक्ग्रा (563) से पीछे हैं। स्टार्क, पैट कमिंस और जोश हेज़लवुड की पेस तिकड़ी ने ऑस्ट्रेलिया को आईसीसी विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप, वनडे विश्व कप और टी20 विश्व कप समेत सभी प्रमुख वैश्विक ट्रॉफियां जिताई हैं।
बांग्लादेश के खिलाफ डार्विन टेस्ट और उसके बाद आने वाले व्यस्त अंतरराष्ट्रीय सत्र में मिचेल स्टार्क के पास अपने विकेटों की संख्या को और आगे बढ़ाने का पूरा मौका होगा। जिस तरह से वे गेंदबाजी कर रहे हैं, विशेषज्ञ मान रहे हैं कि वे न केवल डेल स्टेन (439) बल्कि वेस्टइंडीज के कर्टनी वॉल्श (519) के रिकॉर्ड की ओर भी अपने कदम बढ़ा सकते हैं। भारतीय और दुनिया भर के क्रिकेट प्रशंसक अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि स्टार्क कब आधिकारिक तौर पर 435वां विकेट लेकर कपिल देव के आंकड़े को पीछे छोड़ते हैं और टॉप 10 गेंदबाजों के क्लब में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज कराते हैं।