भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में तेलंगाना से एक भी नेता को जगह नहीं, पूर्व विधायक टी राजा सिंह ने गुटबाजी को बताया मुख्य कारण
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा घोषित की गई 65 सदस्यीय नई केंद्रीय टीम को लेकर तेलंगाना की राजनीति में भारी हलचल मच गई है। आगामी विधानसभा चुनावों और संगठनात्मक विस्तार को ध्यान में रखकर तैयार की गई इस नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों को भारी प्रतिनिधित्व दिया गया है, लेकिन दक्षिण भारत के सबसे अहम राज्यों में से एक तेलंगाना से एक भी नेता को राष्ट्रीय टीम में शामिल नहीं किया गया है। तेलंगाना दक्षिण भारत का इकलौता ऐसा राज्य बनकर उभरा है जिसे इस फेरबदल में पूरी तरह 'खाली हाथ' रहना पड़ा। इस फैसले के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में शुरू हुई चर्चाओं के बीच गोशामहल से पूर्व भाजपा विधायक टी राजा सिंह (T. Raja Singh) ने सामने आकर इसकी अंदरूनी वजहों का खुलासा किया है।
'आपसी गुटबाजी और दिल्ली में शिकायतों का नतीजा': टी राजा सिंह का बड़ा बयान
पार्टी से अलग हो चुके पूर्व विधायक टी राजा सिंह ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए तेलंगाना से किसी भी नेता को राष्ट्रीय टीम में जगह न मिलने पर राज्य के वरिष्ठ नेताओं को आड़े हाथों लिया और इसे 'आत्ममंथन का विषय' बताया। उन्होंने इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर राज्य इकाई में जारी गुटबाजी (Group Politics) और खींचतान को जिम्मेदार ठहराया।
राजा सिंह के प्रमुख बयान के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
ग्रुप पॉलिटिक्स का असर: उन्होंने कहा कि तेलंगाना भाजपा के नेता जनहित और संगठन विस्तार के बजाय आपस में ही लड़ते रहते हैं और छोटी-छोटी शिकायतें लेकर बार-बार दिल्ली आलाकमान के पास पहुंचते हैं। नेताओं के बीच की यह आपसी कलह केंद्रीय नेतृत्व की नजरों में राज्य इकाई की छवि को नुकसान पहुंचा रही है।
दूसरे राज्यों को तरजीह: राजा सिंह ने कहा कि राज्य के नेताओं की लगातार शिकायतों और गुटबाजी की वजह से ही केंद्रीय नेतृत्व ने तेलंगाना के नेताओं को नजरअंदाज कर उन राज्यों के चेहरों को मौका दिया है जहां नेता एकजुट होकर काम कर रहे हैं।
आत्ममंथन की जरूरत: राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन हर राज्य में संगठन को मजबूत कर सत्ता हासिल करने का रोडमैप बना रहे हैं। ऐसे में तेलंगाना से शून्य प्रतिनिधित्व होना राज्य के शीर्ष नेताओं के लिए गंभीर चिंतन का विषय होना चाहिए।
पश्चिम बंगाल से सीखने की दी नसीहत: 'एकजुट होकर लड़ें चुनाव'
पूर्व भाजपा नेता ने तेलंगाना के नेताओं को नसीहत देते हुए पश्चिम बंगाल का उदाहरण सामने रखा। उन्होंने कहा कि बंगाल में पार्टी के नेताओं ने आपसी मतभेद और गुटबाजी को भुलाकर एक साथ लड़ाई लड़ी और संगठन को मजबूती दी।
राजा सिंह ने तेलंगाना भाजपा के नेताओं से अपील करते हुए कहा, "हमारी पार्टी एक है और हमारा लक्ष्य भी एक है। अगर तेलंगाना में भाजपा को सत्ता तक पहुंचना है, तो नेताओं को दिल्ली जाकर एक-दूसरे के पैर खींचने के बजाय राज्य की जनता के बीच जाकर काम करना होगा और एकजुटता दिखानी होगी।"
बयान में 'हम' शब्द का इस्तेमाल: घर वापसी के मिले संकेत
टी राजा सिंह के इस ताजा बयान में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात ने खींचा कि उन्होंने पार्टी के प्रति बेहद नरम रुख अपनाया। पूरे वीडियो में उन्होंने कई बार 'हमारी पार्टी' और 'हम' शब्दों का इस्तेमाल किया।
साल 2025 में पार्टी से औपचारिक रूप से इस्तीफा देने वाले राजा सिंह के इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक उनकी संभावित 'घर वापसी' के संकेत के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर दोबारा शामिल होने की बात नहीं कही, लेकिन उनके तेवर यह साफ दर्शाते हैं कि वे अब भी खुद को भाजपा की विचारधारा से अलग नहीं मानते।
दक्षिण के अन्य राज्यों को मिला प्रतिनिधित्व, केवल तेलंगाना छूटा
भाजपा की इस नई राष्ट्रीय टीम में दक्षिण भारत के बाकी राज्यों को पर्याप्त जगह दी गई है:
आंध्र प्रदेश: पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डी. पुरंदेश्वरी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और विष्णु वर्धन रेड्डी को सह-संयोजक बनाया गया है।
कर्नाटक: प्रो. एस. नागराज को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
केरल व तमिलनाडु: केरल से के. सुरेंद्रन व अनिल एंटनी और तमिलनाडु से डॉ. एम. वेंकटेश को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है।
ऐसे में तेलंगाना को पूरी तरह नजरअंदाज किया जाना यह दर्शाता है कि केंद्रीय नेतृत्व राज्य में आगामी समय में किसी बड़े संगठनात्मक फेरबदल के मूड में हो सकता है।