पीयूष गोयल को BJP में मिली नई जिम्मेदारी के बाद सस्पेंस तेज: 'एक व्यक्ति, एक पद' की चर्चाओं के बीच क्या मोदी कैबिनेट से देंगे इस्तीफा?
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा घोषित की गई नई केंद्रीय टीम के बाद राजधानी के सियासी गलियारों में भारी सुगबुगाहट शुरू हो गई है। इस संगठनात्मक फेरबदल में सबसे चौंकाने वाला नाम केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) का रहा है, जिन्हें पार्टी का नया राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष (National Treasurer) नियुक्त किया गया है। पीयूष गोयल नई राष्ट्रीय टीम में शामिल किए गए इकलौते मौजूदा केंद्रीय कैबिनेट मंत्री हैं। उनके संगठन में वापस लौटने के बाद से ही राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया में यह सवाल तेजी से तैरने लगा है कि क्या भाजपा के 'एक व्यक्ति, एक पद' (One Person, One Post) के सिद्धांत के तहत पीयूष गोयल मोदी कैबिनेट से इस्तीफा देंगे या वे दोनों जिम्मेदारियों का निर्वहन एक साथ करेंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने आगामी केंद्रीय मंत्रिपरिषद फेरबदल (Cabinet Reshuffle) को लेकर सस्पेंस को कई गुना बढ़ा दिया है।
एक साथ दोहरी जिम्मेदारी: इसलिए शुरू हुईं इस्तीफे की अटकलें
पीयूष गोयल वर्तमान में केंद्र सरकार के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक मंत्रालयों में से एक—वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry)—का कार्यभार संभाल रहे हैं। इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ताओं और वैश्विक मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) में भारत की ओर से मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
पार्टी संगठन में राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष का पद अत्यंत व्यस्तता और वित्तीय जवाबदेही वाला होता है। भाजपा की संगठनात्मक परंपरा में आम तौर पर केंद्रीय मंत्रियों को संगठन के नियमित पदों से दूर रखा जाता रहा है ताकि वे सरकार के कामकाज पर पूरा ध्यान दे सकें। ऐसे में जब पीयूष गोयल को यह अहम संगठनात्मक पद सौंपा गया, तो चर्चाएं तेज हो गईं कि क्या उन्हें सरकारी जिम्मेदारियों से मुक्त करके पूरी तरह 24x7 पार्टी संगठन और आगामी राज्यों के चुनावों के वित्तीय व प्रबंधन मोर्चे पर लगाया जाएगा। इस संबंध में विस्तृत राजनीतिक विश्लेषण लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट में भी प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है।
पीयूष गोयल के लिए नया नहीं है कोषाध्यक्ष का पद
पीयूष गोयल के लिए भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी कोई नई नहीं है। वे वित्तीय प्रबंधन और संगठन के बेहद पुराने और अनुभवी रणनीतिकार माने जाते हैं:
2010 से 2014 का कार्यकाल: पीयूष गोयल मार्च 2010 से मई 2014 तक पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रह चुके हैं। 2014 के आम चुनावों में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के दौरान उन्होंने पार्टी के वित्तीय प्रबंधन और चुनाव प्रचार की योजना में केंद्रीय भूमिका निभाई थी।
पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनके पिता स्वर्गीय वेद प्रकाश गोयल भी दो दशक से अधिक समय तक भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रहे थे और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे थे।
प्रोफेशनल बैकग्राउंड: चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) और कानून (Law) की पृष्ठभूमि वाले पीयूष गोयल को जटिल वित्तीय मामलों, चुनाव फंड प्रबंधन और कॉर्पोरेट समन्वय का माहिर खिलाड़ी माना जाता है।
क्या सच में कैबिनेट छोड़ेंगे या दोनों पद संभालेंगे? अभी क्या है स्थिति
सूत्रों और जानकारों के अनुसार, इस पूरे मामले पर वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:
कोई आधिकारिक निर्देश नहीं: भाजपा या प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बयान या संकेत नहीं दिया गया है कि पीयूष गोयल से मंत्री पद छोड़ने को कहा गया है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ताओं का अहम दौर: भारत इस समय कई देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के निर्णायक दौर में है, जिसकी कमान सीधे पीयूष गोयल के हाथों में है। ऐसे समय में वाणिज्य मंत्रालय से अचानक नेतृत्व परिवर्तन की संभावना को कई विश्लेषक कम मानते हैं।
अतीत के अपवाद: पार्टी के इतिहास में ऐसे कई उदाहरण रहे हैं जहां वरिष्ठ नेताओं ने कुछ समय के लिए मंत्री पद के साथ-साथ पार्टी संगठन के महत्वपूर्ण कार्यभार को भी एक साथ संभाला है।
फिलहाल, पीयूष गोयल केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और भाजपा राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष दोनों की भूमिकाओं में बने हुए हैं।
आगामी मोदी कैबिनेट विस्तार और फेरबदल पर टिकी नजरें
भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम के ऐलान के बाद अब सबकी निगाहें संभावित केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार (Cabinet Reshuffle) पर टिक गई हैं। संगठन से कई चेहरों (जैसे स्मृति ईरानी, राम माधव) को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं, जबकि कुछ अन्य नेताओं को सरकार में शामिल किए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
यदि आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्रिपरिषद में फेरबदल करते हैं, तब यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि पीयूष गोयल कैबिनेट में अपने वाणिज्य मंत्रालय को बरकरार रखते हैं या संगठन के विस्तार के लिए पद छोड़ते हैं। फिलहाल, उनके इस्तीफे की खबरें केवल सियासी गलियारों की चर्चाओं और अटकलों तक ही सीमित हैं।