Lucknow Polytechnic: डिग्री तो मिलेगी पर स्किल का क्या मास कम्युनिकेशन के छात्र संसाधनों के अभाव में 'कैमरा और स्टूडियो' को तरसे
India News Live,Digital Desk : उत्तर प्रदेश की राजधानी स्थित प्रतिष्ठित राजकीय पॉलिटेक्निक (Government Polytechnic, Lucknow) में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। तकनीकी शिक्षा के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के सरकारी दावों के उलट, यहाँ के 'डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन' के छात्र खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि संस्थान में मीडिया स्टूडियो, कैमरा और कंप्यूटर लैब जैसे बुनियादी संसाधनों का अकाल है, जिससे उनकी पढ़ाई सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गई है।
"बिना प्रैक्टिकल कैसे मिलेगी नौकरी?" छात्रों ने खोला मोर्चा
मास कम्युनिकेशन जैसे पूरी तरह से व्यावहारिक (Practical) विषय की पढ़ाई कर रहे छात्रों का कहना है कि पत्रकारिता की बारीकियां सीखने के लिए कैमरा हैंडलिंग, वीडियो एडिटिंग और स्टूडियो रिकॉर्डिंग का ज्ञान होना अनिवार्य है। लेकिन कॉलेज में उपकरणों की कमी के कारण उन्हें केवल किताबी ज्ञान (Theory) दिया जा रहा है। छात्रों ने अपनी व्यथा बताते हुए प्राविधिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजा है और मांग की है कि उन्हें जल्द से जल्द जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
डिप्लोमा हाथ में, पर हुनर से खाली हाथ का डर
छात्रों के बीच इस बात को लेकर गहरा असंतोष और डर है कि बिना प्रैक्टिकल स्किल के वे मीडिया इंडस्ट्री की प्रतिस्पर्धा में कैसे टिक पाएंगे। आज के दौर में मीडिया संस्थान केवल उन्हीं को प्राथमिकता देते हैं जिन्हें डिजिटल टूल्स और कैमरों की अच्छी समझ होती है। विद्यार्थियों का कहना है कि "डिप्लोमा की डिग्री तो मिल जाएगी, लेकिन जब स्किल ही नहीं होगी तो रोजगार के अवसर कैसे मिलेंगे?"
एक तरफ जागरूकता अभियान, दूसरी तरफ संसाधनों की कमी
प्राविधिक शिक्षा विभाग एक ओर पॉलिटेक्निक में अधिक से अधिक प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है, लेकिन दूसरी ओर राजकीय संस्थानों में ही आधुनिक पाठ्यक्रमों के लिए लैब और उपकरणों की कमी विभाग के दावों पर सवालिया निशान लगा रही है। छात्रों का कहना है कि जब तक संस्थान अपग्रेड नहीं होंगे, तब तक केवल प्रवेश बढ़ाना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
प्रिंसिपल का पक्ष: "सिलेबस बदलाव की वजह से हो रही देरी"
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए संस्थान के प्रिंसिपल एसएन सिंह ने स्वीकार किया कि कुछ तकनीकी अड़चनों की वजह से संसाधनों की कमी है। उन्होंने तर्क दिया कि मास मीडिया का सिलेबस समय-समय पर तेजी से बदलता रहता है, जिसके अनुसार नए उपकरण खरीदने और सेटअप तैयार करने में वक्त लगता है। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि नए सिलेबस की मांग के अनुरूप आवश्यक संसाधन जुटाने की प्रक्रिया जारी है ताकि छात्रों को आधुनिक प्रशिक्षण मिल सके।