पीएम मोदी पहुंचे ताशकंद: उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति ने किया भव्य और आत्मीय स्वागत; जानिए यूरेनियम आपूर्ति

Post

ताशकंद/नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्य एशिया के रणनीतिक और ऐतिहासिक केंद्र उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंच चुके हैं। ताशकंद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान से उतरते ही उज्बेकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व ने भारतीय प्रधानमंत्री का बेहद गर्मजोशी और भव्य अंदाज में स्वागत किया। इसके बाद ताशकंद स्थित राष्ट्रपति पैलेस 'कुक्सरोय' (Kuksaroy Presidential Palace) में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने प्रोटोकॉल से परे जाकर प्रधानमंत्री मोदी का आत्मीय स्वागत किया, जहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर और 21 तोपों की पारंपरिक सलामी दी गई। भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति के तहत यूरेशियाई भू-राजनीति में अपनी उपस्थिति को निर्णायक बनाने के लिहाज से पीएम मोदी की यह यात्रा मील का पत्थर मानी जा रही है। ऊर्जा सुरक्षा, यूरेशियाई व्यापारिक गलियारों के विस्तार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और आतंकवाद विरोधी मोर्चे पर दोनों देशों के बीच कई ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर होने हैं।

ताशकंद में ऐतिहासिक स्वागत: प्रोटोकॉल से परे दिखा दोनों नेताओं का दोस्ताना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ताशकंद आगमन पर हवाई अड्डे से लेकर राष्ट्रपति भवन तक का माहौल भारत-उज्बेक मैत्री के रंगों से सराबोर दिखाई दिया। हवाई अड्डे पर उज्बेकिस्तान के प्रधानमंत्री अब्दुल्ला अरिपोव और वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों ने पीएम मोदी का स्वागत पारंपरिक उज्बेक वेशभूषा, स्थानीय संगीत और पुष्पगुच्छ भेंट कर किया।

राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव और पीएम मोदी के बीच की व्यक्तिगत केमिस्ट्री हमेशा से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत आधार देती रही है। औपचारिक स्वागत समारोह के दौरान उज्बेक सैन्य टुकड़ी ने दोनों देशों के राष्ट्रगान की धुन बजाई और भारतीय प्रधानमंत्री ने गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। हवाई अड्डे और ताशकंद के प्रमुख मार्गों पर भारतीय तिरंगे और उज्बेक ध्वज के साथ पीएम मोदी के स्वागत में बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाए गए थे। भारतीय प्रवासियों और उज्बेक नागरिकों के एक बड़े समूह ने पारंपरिक भारतीय परिधानों में 'वंदे मातरम' और 'भारत माता की जय' के नारों के साथ पीएम मोदी का अभिवादन किया।

यात्रा का प्रमुख मकसद 1: यूरेशियाई कनेक्टिविटी और चाबहार-INSTC गलियारा

प्रधानमंत्री मोदी की इस ताशकंद यात्रा का सबसे बड़ा रणनीतिक मकसद भारत को मध्य एशिया और यूरोप से जोड़ने वाले निर्बाध व्यापारिक मार्ग को सक्रिय करना है। पाकिस्तान द्वारा भारत को दिए जाने वाले जमीनी रास्ते को लगातार अवरुद्ध किए जाने के बाद, भारत ईरान के चाबहार बंदरगाह को मध्य एशिया का मुख्य प्रवेश द्वार बना रहा है।

उज्बेकिस्तान एक लैंडलॉक्ड (चारों तरफ जमीन से घिरा) देश है, जिसे खुले समुद्र तक पहुंचने के लिए एक सुरक्षित समुद्री रास्ते की तलाश है। भारत और उज्बेकिस्तान मिलकर चाबहार बंदरगाह के 'शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल' के उपयोग और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) को मध्य एशियाई रेलवे नेटवर्क से जोड़ने पर अंतिम सहमति बना रहे हैं। इस कनेक्टिविटी के पूरी तरह शुरू होने से भारत और ताशकंद के बीच माल ढुलाई के समय में 40 प्रतिशत और लागत में 30 प्रतिशत की भारी कमी आएगी। इससे भारतीय निर्यातकों को मध्य एशिया, रूस और पूर्वी यूरोप के विशाल बाजारों में सीधा प्रवेश मिलेगा।

यात्रा का प्रमुख मकसद 2: यूरेनियम आपूर्ति और भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा

भारत के तेजी से बढ़ते औद्योगिक और घरेलू क्षेत्रों के लिए स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) जुटाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उज्बेकिस्तान दुनिया के शीर्ष 5 यूरेनियम उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है, जिसके पास उच्च गुणवत्ता वाले परमाणु ईंधन के विशाल प्राकृतिक भंडार हैं।

पीएम मोदी की इस यात्रा का एक मुख्य उद्देश्य उज्बेकिस्तान से भारत के असैन्य परमाणु ऊर्जा संयंत्रों (Civilian Nuclear Reactors) के लिए दीर्घकालिक और निर्बाध यूरेनियम आपूर्ति के नए अनुबंध पर मुहर लगाना है। इससे पहले हुए आपूर्ति समझौतों की समीक्षा करते हुए दोनों देश भविष्य की परमाणु ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए एक बहुवर्षीय समझौते को अंतिम रूप दे रहे हैं। इसके अलावा, भारत की सौर ऊर्जा कंपनियां उज्बेकिस्तान में बड़े सोलर पार्क और रिन्यूएबल एनर्जी ग्रिड स्थापित करने के लिए संयुक्त उपक्रमों (Joint Ventures) पर काम कर रही हैं।

यात्रा का प्रमुख मकसद 3: सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ साझा मोर्चा और SCO RATS

भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से उज्बेकिस्तान की सीमा अफगानिस्तान के साथ सीधे लगती है, जिसके चलते काबुल में अस्थिरता और सीमा पार कट्टरपंथ का खतरा दोनों देशों के लिए साझा सुरक्षा चुनौती है। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की आतंकवाद-रोधी शाखा 'रीजनल एंटी-टेररिस्ट स्ट्रक्चर' (RATS) की मुख्य कार्यकारी समिति ताशकंद में ही स्थित है।

पीएम मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के बीच होने वाली प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में साइबर सुरक्षा, खुफिया सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान और आतंकवाद के वित्तपोषण (Terror Financing) पर लगाम लगाने के लिए एक नया सुरक्षा तंत्र विकसित किया जाएगा। दोनों देशों की सेनाओं के बीच नियमित रूप से आयोजित होने वाले 'डस्टलिक' (Ex-DUSTLIK) संयुक्त सैन्य अभ्यास के दायरे को बढ़ाने, आधुनिक ड्रोन तकनीक साझा करने और रक्षा निर्माण में संयुक्त परियोजनाओं की स्थापना पर भी चर्चा हो रही है।

यात्रा का प्रमुख मकसद 4: 'डिजिटल इंडिया' का विस्तार, UPI और फार्मा हब

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा आर्थिक और तकनीकी क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने जा रही है। भारत के वैश्विक स्तर पर प्रशंसित 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI) और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को उज्बेकिस्तान के बैंकिंग सिस्टम के साथ इंटीग्रेट करने की दिशा में बड़ा समझौता होने जा रहा है।

इसके लागू होने से भारतीय पर्यटकों, व्यापारियों और उज्बेक नागरिकों को दोनों देशों में बिना किसी मुद्रा विनिमय की बाधा के डिजिटल भुगतान करने की सुविधा मिलेगी। फार्मास्युटिकल क्षेत्र में भारत की अग्रणी दवा निर्माता कंपनियां ताशकंद फार्मा पार्क और समरकंद स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) में अत्याधुनिक उत्पादन इकाइयां लगाने जा रही हैं, जिससे मध्य एशिया को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली भारतीय जेनेरिक दवाएं मिल सकेंगी। इसके अलावा ताशकंद में भारतीय विश्वविद्यालयों के परिसरों (जैसे अमिती और शारदा यूनिवर्सिटी) के विस्तार और आईटी स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटरों को बढ़ावा दिया जाएगा।

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि और सांस्कृतिक सूत्र

प्रधानमंत्री मोदी के ताशकंद दौरे का एक अत्यंत भावुक और ऐतिहासिक पहलू भारत के दूसरे प्रधानमंत्री और भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री के स्मारक का दौरा करना है। 11 जनवरी 1966 को ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर के बाद शास्त्री जी का यहीं रहस्यमयी परिस्थितियों में निधन हो गया था। ताशकंद के केंद्र में स्थित शास्त्री स्ट्रीट पर उनकी भव्य कांस्य प्रतिमा स्थापित है।

पीएम मोदी इस स्मारक पर जाकर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे और देश के इस महान सपूत की स्मृतियों को नमन करेंगे। इसके साथ ही, ताशकंद में हिंदी भाषा सीखने वाले उज्बेक छात्रों और भारतीय संस्कृति के शोधकर्ताओं से भी प्रधानमंत्री की मुलाकात का कार्यक्रम है। दोनों देशों के बीच प्राचीन सिल्क रूट के दौर से चले आ रहे सभ्यतागत रिश्तों, बौद्ध विरासत और बॉलीवुड के सांस्कृतिक जुड़ाव को यह यात्रा एक नई ऊर्जा प्रदान करेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह ताशकंद यात्रा केवल एक औपचारिक राजनयिक दौरा नहीं है, बल्कि यह 21वीं सदी के बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन में भारत को मध्य एशिया की धुरी पर स्थापित करने का एक ठोस रणनीतिक कदम है। इस यात्रा के माध्यम से यूरेशिया में व्यापार, सुरक्षा और ऊर्जा के जो नए द्वार खुलेंगे, वे आने वाले दशकों में भारत के राष्ट्रीय और आर्थिक हितों को नई मजबूती प्रदान करेंगे।