Northeast Railway's big decision: ट्रेनों में AC खराब हुआ तो नहीं छूटेगा पसीना, अब फिक्स बर्थ पर मिलेंगे कोच इंचार्ज; तुरंत होगी सुनवाई
India News Live,Digital Desk : ट्रेनों के वातानुकूलित (AC) कोच में सफर करने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। पूर्वोत्तर रेलवे (NER) ने यात्रियों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए एक नई और प्रभावी व्यवस्था लागू की है। अब सफर के दौरान अगर एसी खराब होता है या कूलिंग कम होती है, तो यात्रियों को कोच इंचार्ज को खोजने के लिए पूरी ट्रेन के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। रेलवे ने कोच इंचार्ज और उनके सहायकों के लिए ट्रेनों में बर्थ नंबर निर्धारित कर दिए हैं।
72 लंबी दूरी की ट्रेनों में लागू हुआ नियम, चार्ट में दिखेगी सीट
पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने गोरखधाम, अमरनाथ और हमसफर एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण और लंबी दूरी की 72 ट्रेनों में यह व्यवस्था सुनिश्चित की है। अब ड्यूटी पर तैनात एसी कोच इंचार्ज और सहायक निर्धारित कोच और बर्थ पर ही उपलब्ध रहेंगे।
साधारण मेल/एक्सप्रेस: स्लीपर क्लास के S2 कोच में बर्थ नंबर 79 और 80 इनके लिए आरक्षित रहेगी।
हमसफर एक्सप्रेस: इसके B1 कोच में बर्थ नंबर 71 और 72 को छोड़कर अन्य श्रेणियों में भी स्थान तय किए गए हैं।
ये सीटें अब आरक्षण चार्ट में भी प्रदर्शित होंगी, जिससे यात्री सीधे वहां पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
यात्रियों को भटकने से मिलेगी मुक्ति, बढ़ेगी जवाबदेही
अक्सर देखा जाता था कि एसी फेल होने या तकनीकी खराबी आने पर यात्री परेशान रहते थे, लेकिन कोच इंचार्ज या सहायक या तो पावरकार में बैठे मिलते थे या किसी कोच में इधर-उधर। कई बार तो उनकी ड्यूटी 6 से 130 घंटे तक की होती थी, लेकिन सिर छिपाने की जगह न होने से वे यात्रियों की पहुंच से दूर हो जाते थे। इस नई व्यवस्था से न केवल यात्रियों को तुरंत सहायता मिलेगी, बल्कि रेलकर्मियों की जवाबदेही भी तय होगी।
रेलवे बोर्ड के निर्देश पर उठाया गया कदम
पूर्वोत्तर रेलवे के उप मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (यात्री सेवाएं) आशीष कुमार त्रिपाठी ने इस संबंध में आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रमुख मुख्य विद्युत इंजीनियर को लिखे गए पत्र के अनुसार, रेलवे बोर्ड के निर्देशों के क्रम में सभी सूचीबद्ध ट्रेनों के सिस्टम में इन सीटों को दर्ज कर दिया गया है। 18 फरवरी 2026 से इस प्रक्रिया को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
गर्मी के मौसम में बढ़ते आक्रोश पर लगेगी लगाम
गर्मियों के दौरान एसी कोचों में कूलिंग कम होने या एसी फेल होने की शिकायतें चरम पर होती हैं। ऐसी स्थिति में समय पर मैकेनिक न मिलने पर यात्री अक्सर उग्र हो जाते हैं और ट्रेन रोकने या स्टेशन पर प्रदर्शन जैसी नौबत आ जाती है। रेलवे का दावा है कि इस 'सीट फिक्सिंग' फॉर्मूले से सेवा की गुणवत्ता में सुधार होगा और यात्रियों का रेल यात्रा के प्रति विश्वास बढ़ेगा।