12 सितंबर को नई दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी अध्यक्षता; ITC नियमों में ढील

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नई दिल्ली: देश की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली (Indirect Tax Regime) में सबसे बड़े नीतिगत फैसले लेने वाली शीर्ष संस्था 'वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद' की बहुप्रतीक्षित 57वीं बैठक की आधिकारिक तारीख तय हो गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में यह अहम बैठक 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी, जबकि इससे एक दिन पहले यानी 11 सितंबर को वरिष्ठ कर अधिकारियों की तैयारी बैठक होगी। जीएसटी काउंसिल की यह बैठक पूरे 374 दिनों (लगभग एक वर्ष) के लंबे अंतराल के बाद होने जा रही है। इससे पहले जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक 3-4 सितंबर 2025 को हुई थी, जिसमें कर दरों को युक्तिसंगत बनाने और प्रक्रियाओं को सरल करने से जुड़े ऐतिहासिक फैसले लिए गए थे। आमतौर पर हर तिमाही में आयोजित होने वाली इस बैठक के एक साल तक टलने के पीछे प्रमुख राज्यों के विधानसभा चुनाव और संसद के सत्र रहे हैं। अब जब 1.68 करोड़ से अधिक पंजीकृत कारोबारियों की निगाहें इस महाबैठक पर टिकी हैं, तो यह समझना जरूरी है कि इस बार काउंसिल के पटल पर कौन-कौन से बड़े आर्थिक व नीतिगत एजेंडे रखे जाने वाले हैं।

2.5 लाख रुपये से अधिक ITC ट्रांसफर करने वाले कारोबारियों का रजिस्ट्रेशन होगा आसान

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक के सबसे प्रमुख प्रशासनिक एजेंडों में से एक छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया (Registration Process) को सुगम और तेज बनाना है। वर्तमान नियमों के तहत कई ऐसे कारोबारी जो हर महीने 2.5 लाख रुपये से अधिक का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) आगे ट्रांसफर करते हैं, उन्हें सख्त जोखिम-आधारित जांच और बायोमेट्रिक सत्यापन के लंबे दौर से गुजरना पड़ता है।

इस प्रक्रिया में लगने वाले समय को घटाने के लिए परिषद एक सरलीकृत और स्वचालित (Automated Risk-Based) पंजीकरण ढांचा पेश कर सकती है। इसका सीधा फायदा उन नए स्टार्टअप्स, एमएसएमई (MSME) और ऑनलाइन सेलर्स को मिलेगा जो ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं। फर्जी फर्मों पर नकेल कसते हुए वास्तविक व्यापारियों के लिए रजिस्ट्रेशन की समयसीमा को कम करना सरकार की पहली प्राथमिकता होगी।

इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर में सुधार: कच्चे माल पर ज्यादा और तैयार माल पर कम टैक्स का संकट

बैठक में 'इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर' (Inverted Duty Structure) की तकनीकी विसंगतियों को दूर करने पर गहन चर्चा होने की प्रबल संभावना है। इनवर्टेड ड्यूटी वह स्थिति होती है जब किसी उत्पाद को बनाने में लगने वाले कच्चे माल (Raw Materials/Inputs) पर जीएसटी की दर अधिक होती है, लेकिन फैक्ट्री से बनकर निकलने वाले तैयार माल (Finished Goods) पर जीएसटी की दर कम तय होती है।

इस असंतुलन के कारण टेक्सटाइल (कपड़ा), चमड़ा व फुटवियर, उर्वरक (Fertilizers) और ऑटो कंपोनेंट से जुड़ी कंपनियों का करोड़ों रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) सरकारी खाते में फंसा रह जाता है, जिसे वापस पाने के लिए उन्हें लंबे रिफंड प्रोसेस का इंतजार करना पड़ता है। इससे कंपनियों की कार्यशील पूंजी (Working Capital) ब्लॉक हो जाती है। काउंसिल की फिटमेंट कमेटी इस दर विसंगति को समाप्त करने के लिए कच्चे माल और तैयार माल की कर दरों को एक समान स्तर पर लाने का फार्मूला पेश कर सकती है।

इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के विवादित नियमों पर राहत और सप्लायर की जवाबदेही

उद्योग जगत और टैक्स विशेषज्ञों की ओर से लंबे समय से मांग की जा रही है कि आईटीसी (ITC) से जुड़े उन कड़े नियमों की समीक्षा की जाए, जिनके कारण वास्तविक खरीदारों को मुकदमों का सामना करना पड़ता है। मौजूदा कानूनी व्यवस्था में यदि किसी सप्लायर ने खरीदार से टैक्स वसूलने के बाद उसे सरकारी खजाने में जमा नहीं कराया, तो विभाग खरीदार का इनपुट टैक्स क्रेडिट रोक देता है या उस पर जुर्माना लगा देता है।

टैक्स विशेषज्ञों का तर्क है कि खरीदार के पास सप्लायर की टैक्स अनुपालन क्षमता जांचने का कोई व्यावहारिक साधन नहीं होता। ऐसे में परिषद वास्तविक व्याख्यात्मक विवादों को सुलझाने और सप्लायर द्वारा टैक्स चोरी किए जाने की स्थिति में सीधे सप्लायर पर दंडात्मक कार्रवाई करने के नियम तय कर सकती है, जिससे ईमानदार कारोबारियों को बिना वजह मुकदमों और नोटिसों से राहत मिल सके।

जीएसटी 2.0 और पूर्व रेट रेशनलाइजेशन का ऑडिट: क्या जनता तक पहुंचा फायदा?

सितंबर 2025 में आयोजित 56वीं बैठक में जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाते हुए आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स घटाने के कई बड़े प्रस्ताव मंजूर किए गए थे। 57वीं बैठक में काउंसिल इस बात का व्यापक ऑडिट करेगी कि पिछले एक साल में केंद्र और राज्यों के राजस्व संग्रह (Revenue Collection) की क्या स्थिति रही है और क्या कंपनियों ने टैक्स कटौती का वास्तविक लाभ अंतिम उपभोक्ताओं (End Consumers) तक पहुंचाया है या नहीं।

इसके अलावा, आगामी त्योहारी सीजन (Festive Season) को देखते हुए कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्टफोन और रोजमर्रा के उपभोक्ता सामानों (FMCG) से जुड़ी इंडस्ट्री की ओर से कर दरों में राहत देने के जो ज्ञापन सौंपे गए हैं, उन पर भी राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ विचार-विमर्श किया जा सकता है।

जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल (GSTAT) के संचालन और पेंडिंग मुकदमों का निपटारा

कर विवादों के त्वरित समाधान के लिए गठित 'वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय अधिकरण' (GSTAT) के पूर्ण संचालन की प्रगति रिपोर्ट भी इस बैठक के मुख्य एजेंडे में शामिल है। ट्रिब्यूनल की राष्ट्रीय पीठ (Principal Bench) और विभिन्न राज्यों में स्थापित राज्य पीठों में जजों व तकनीकी सदस्यों की नियुक्ति, डिजिटल कोर्ट सिस्टम और अपीलों की ऑनलाइन फाइलिंग की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।

ट्रिब्यूनल के पूरी तरह सक्रिय होने से उच्च न्यायालयों (High Courts) पर टैक्स मुकदमों का बोझ कम होगा और अरबों रुपये के फंसे हुए कर विवादों का समयबद्ध निपटारा हो सकेगा।

सिंगल पैन-आधारित सेंट्रलाइज्ड रजिस्ट्रेशन और कंप्लायंस सरलीकरण

कारोबार की सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) द्वारा प्रस्तावित 'वन पैन-वन रजिस्ट्रेशन' (एकल पैन पर केंद्रीकृत पंजीकरण) की संभावनाओं पर भी चर्चा हो सकती है। वर्तमान में यदि कोई कंपनी 20 राज्यों में कारोबार करती है, तो उसे 20 अलग-अलग जीएसटी पंजीकरण लेने और 20 राज्यों में अलग-अलग रिटर्न दाखिल करने पड़ते हैं।

परिषद बड़े कॉर्पोरेट्स और सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए एक केंद्रीकृत रिटर्न फाइलिंग सिस्टम की रूपरेखा पर विचार कर सकती है। इसके साथ ही, ऑटोमेटेड प्री-फिल्ड रिटर्न्स, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) और डिजिटल स्क्रूटनी के जरिए टैक्स अनुपालन को और अधिक सरल व पारदर्शी बनाने पर सहमति बन सकती है।

12 सितंबर को होने वाली यह 57वीं बैठक भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद निर्णायक साबित होने जा रही है। एक साल के अंतराल के बाद हो रही इस बैठक से देश के करोड़ों व्यापारियों को टैक्स प्रक्रिया में बड़ी राहत मिलने और आम उपभोक्ताओं को महंगाई के मोर्चे पर अनुकूल संकेत मिलने की पूरी उम्मीद है।