Lives at risk बांग्लादेशी एयरफोर्स के लिए 'डेथ ट्रैप' बन रहे चीन के जहाज! 1992 से सालाना एक क्रैश
India News Live,Digital Desk : बांग्लादेश और चीन के रक्षा संबंधों को लेकर एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जो किसी को भी हैरान कर देगी। आंकड़े बताते हैं कि साल 1992 से लेकर अब तक, लगभग हर साल बांग्लादेश की सेना में शामिल चीन द्वारा बनाए गए विमान हादसों का शिकार हो रहे हैं। यह एक चिंताजनक ट्रेंड है, जो न सिर्फ बांग्लादेश के हवाई सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाता है, बल्कि चीन द्वारा बेचे गए इन रक्षा उपकरणों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर भी संदेह पैदा करता है।
यह कोई इक्का-दुक्का घटना नहीं, एक खतरनाक पैटर्न है:
सबसे पहले, 1992 में ही चीन से खरीदा गया बांग्लादेशी वायुसेना का पहला फाइटर जेट (F-7) ट्रेनिंग के दौरान क्रैश हो गया। दुख की बात यह है कि यह कोई अंतिम घटना नहीं थी। उसके बाद से लगातार यह सिलसिला जारी है:
इनमें से कई दुर्घटनाओं में बहादुर पायलटों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, जबकि कुछ में विमान को भारी नुकसान पहुंचा है।
आखिर बांग्लादेश क्यों खरीदता है ये विमान?
एक बड़ा सवाल यह भी उठता है कि इतने लगातार हादसों के बावजूद बांग्लादेश चीन से हथियार खरीदना क्यों नहीं छोड़ता? इसकी एक बड़ी वजह इन चीनी रक्षा उपकरणों की कम कीमत है। पश्चिमी देशों या रूस से खरीदे गए विमानों और हथियारों की तुलना में चीनी उत्पाद काफी सस्ते होते हैं, जिससे बांग्लादेश जैसे विकासशील देश इन्हें आसानी से खरीद पाते हैं। वे अपने सीमित रक्षा बजट में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन इसका खामियाजा हवाई सुरक्षा में आने वाली समस्याओं के रूप में चुकाना पड़ रहा है।
गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न:
यह घटनाओं का क्रम इस बात पर जोर देता है कि इन चीनी विमानों की गुणवत्ता, डिजाइन या निर्माण प्रक्रिया में कहीं न कहीं गंभीर खामी है। एक तरफ जहां चीन दुनिया की एक बड़ी सैन्य शक्ति के रूप में उभरा है और अपने लड़ाकू विमानों का निर्यात करता है, वहीं बांग्लादेश में ये लगातार होते हादसे उसकी एविएशन मैन्युफैक्चरिंग की विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाते हैं। अब वक्त आ गया है कि बांग्लादेश इन लगातार होने वाले हादसों को गंभीरता से ले और अपने पायलटों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इन मुद्दों पर चीन के साथ सख्ती से बात करे या अन्य विकल्पों पर विचार करे।