क्या खिचड़ी पक रही है? श्रीलंका पहुंचे पाकिस्तान के 3 युद्धपोत, भारत ने भी तुरंत भेज दिया अपना शक्तिशाली जंगी जहाज

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हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में इस वक्त बहुत बड़ी रणनीतिक और भू-राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है, जिसने रक्षा विशेषज्ञों को चौंका दिया है। श्रीलंका का कोलंबो पोर्ट एक ऐसी कूटनीतिक और सैन्य घटना का गवाह बना है, जिसने पूरे दक्षिण एशिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। भारत और पाकिस्तान की नौसेना के शक्तिशाली युद्धपोत एक साथ श्रीलंका के कोलंबो पोर्ट पर लंगर डाले खड़े हैं।

1 जून 2026 को भारतीय नौसेना का विशाल जहाज 'आईएनएस ऐरावत' (INS Airavat) और पाकिस्तानी नौसेना का बेड़ा एक ही समय पर कोलंबो बंदरगाह पहुंचा। खुद श्रीलंका की नौसेना (Sri Lanka Navy) ने आधिकारिक तौर पर इस दुर्लभ घटनाक्रम की जानकारी साझा की है, जिसके बाद रक्षा गलियारों में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर भारत के इस समुद्री पड़ोस में कौन सी नई खिचड़ी पक रही है?

कोलंबो में पाकिस्तानी नौसेना का जमावड़ा और 'चीनी कनेक्शन'

पाकिस्तानी नौसेना ने इस बार श्रीलंका में अपनी भारी मौजूदगी दर्ज कराई है। पाकिस्तान के तीन प्रमुख और अत्याधुनिक नौसैनिक पोत— पीएनएस तैमूर (PNS Taimur), पीएनएस असलत (PNS Aslat) और बेहद खतरनाक मानी जाने वाली पनडुब्बी पीएनएस/एम हांगोर (PNS/M Hangor) इसी सप्ताह कोलंबो पहुंचे हैं।

आधिकारिक और कूटनीतिक तौर पर इसे एक 'सद्भावना यात्रा' (Goodwill Visit) का नाम दिया गया है, जिसका उद्देश्य ईंधन भरना और रसद (लॉजिस्टिक सप्लाई) जुटाना बताया गया है। इन जहाजों की कमान पाकिस्तान के दिग्गज नौसेना कैप्टन नेमत सईद खान, कैप्टन नादिर मतीन अफरीदी और पनडुब्बी के कमांडर उजैर फारूक के हाथों में है। श्रीलंकाई नौसेना के मुताबिक, पाकिस्तानी नौसेना की यह टुकड़ी श्रीलंका नेवी के साथ पश्चिमी तट पर एक 'पैसेज एक्सरसाइज' (Passage Exercise) में भी हिस्सा लेगी।

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में जो बात सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली और चिंताजनक है, वह है पाकिस्तानी पनडुब्बी 'पीएनएस/एम हांगोर' की मौजूदगी। यह पनडुब्बी पूरी तरह से चीन द्वारा निर्मित (Made in China) है। श्रीलंका के बंदरगाहों पर चीनी युद्धपोतों, जासूसी जहाजों या चीन की तकनीक से बने खतरनाक सैन्य हथियारों की आवाजाही को लेकर भारत हमेशा से बेहद सतर्क, संवेदनशील और आक्रामक रहा है।

भारत की कड़क कूटनीति: पाकिस्तानी घेरेबंदी का तुरंत और करारा जवाब

पाकिस्तान की इस सोची-समझी चाल को भांपते हुए भारतीय नौसेना ने भी बिना एक पल गंवाए बेहद आक्रामक और रणनीतिक प्रतिक्रिया दी। भारतीय नौसेना का महाबली लैंडिंग शिप टैंक 'आईएनएस ऐरावत' (INS Airavat) ठीक उसी समय, यानी 1 जून 2026 को कोलंबो पोर्ट पर जाकर डट गया।

आधिकारिक तौर पर आईएनएस ऐरावत को 'ऑपरेशनल टर्नअराउंड' (Operational Turnaround)— यानी ईंधन भरने, क्रू के आराम और मामूली मरम्मत के लिए वहां भेजा गया है। कमांडर आईपी पाटिलफोर के नेतृत्व में इस शक्तिशाली लैंडिंग शिप के क्रू सदस्य श्रीलंका नेवी द्वारा आयोजित पेशेवर और आपसी तालमेल बढ़ाने वाले कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।

कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान के तीन जहाजों के सामने भारत द्वारा अपने जंगी जहाज को ठीक उसी समय कोलंबो भेजना नई दिल्ली का एक बहुत स्पष्ट और कड़ा संदेश है। भारत ने यह जता दिया है कि वह अपने समुद्री बैकयार्ड (Marine Neighborhood) में होने वाली हर छोटी-बड़ी गतिविधि— विशेषकर जहां पाकिस्तान और चीन का 'जुगलबंदी' वाला दखल हो, वहां पर अपनी तीसरी आंख (पैनी नजर) हमेशा खुली रखता है और किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति से निपटने के लिए चौबीसों घंटे तैयार है।

श्रीलंका का 'डबल गेम' या कूटनीतिक मजबूरी?

इस पूरे हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच मेजबान देश श्रीलंका की स्थिति एक कूटनीतिक रस्सी पर चलने जैसी हो गई है, जहां वह एक बेहद जटिल 'बैलेंसिंग एक्ट' (संतुलन बनाने की कोशिश) कर रहा है।

एक तरफ श्रीलंका को अपने सबसे बड़े पड़ोसी, संकटमोचक और आर्थिक साझेदार भारत की सुरक्षा चिंताओं का पूरा सम्मान करना पड़ रहा है, जिसके तहत उसने भारतीय नौसेना का भव्य स्वागत किया। लेकिन दूसरी तरफ, वह कर्ज के जाल और पुराने सैन्य संबंधों के कारण पाकिस्तान (और परोक्ष रूप से चीन) के युद्धपोतों को भी अपने रणनीतिक बंदरगाह पर लंगर डालने की अनुमति देने से इनकार नहीं कर पा रहा है। कोलंबो पोर्ट पर दोनों देशों के जहाजों का यह आमना-सामना आने वाले दिनों में हिंद महासागर की राजनीति को और अधिक गरमाने का संकेत दे रहा है।