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July 02 2026 05:58 am

"क्या पहलगाम का नरसंहार भूल गए?" पाकिस्तान से शांति वार्ता चाहने वालों पर भड़के कांग्रेस नेता मनीष तिवारी; फारूक-महबूबा को लिया आड़े हाथ

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भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक संबंध बहाल करने और शांति वार्ता शुरू करने की वकालत करने वाले बुद्धिजीवियों और राजनेताओं पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद मनीष तिवारी का गुस्सा फूट पड़ा है। मनीष तिवारी ने उन भारतीय दिग्गजों को आड़े हाथ लिया है जिन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ को एक खुला पत्र लिखकर बातचीत शुरू करने की अपील की है। तिवारी ने तीखे लहजे में पूछा कि क्या ये लोग कश्मीर की बैसरन घाटी (पहलगाम) में हुए भयानक नरसंहार को इतनी जल्दी भूल गए?

फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती समेत 100 दिग्गजों ने लिखा है खुला खत

दरअसल, यह पूरा विवाद एक खुले पत्र (Open Letter) के सामने आने के बाद शुरू हुआ है। इस पत्र पर भारत और पाकिस्तान के करीब 100 से ज्यादा प्रमुख लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, राजद (RJD) सांसद मनोज झा और पूर्व रॉ (R&AW) चीफ ए.एस. दुलत जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं। इस पत्र में दोनों देशों के बीच व्यापार, वीजा संबंधों को बहाल करने और कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर दोबारा बातचीत शुरू करने की मांग की गई है। बता दें कि पिछले साल हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद से दोनों देशों के बीच बातचीत पूरी तरह बंद है।

"धर्म पूछकर पर्यटकों को मारा गया, इतनी जल्दी भूल गए?" — मनीष तिवारी

समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बात करते हुए मनीष तिवारी ने इस शांति अपील पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग कश्मीर की बैसरन घाटी में हुए नरसंहार को इतनी आसानी से भूल गए। वहां निर्दोष पर्यटकों और उनके परिवारों को केवल उनके धर्म के कारण बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया था। इस दिल दहला देने वाली घटना को बीते अभी केवल एक साल, दो महीने और आठ दिन ही हुए हैं और कुछ लोग पाकिस्तान से शांति की भीख मांग रहे हैं।"

'अदृश्य हाथ' और 5 दशक पुराने 'हजार घाव' की रणनीति पर उठाए सवाल

मनीष तिवारी ने पाकिस्तान के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि पड़ोसी देश की भारत को 'हजार घाव' देकर कमजोर करने की रणनीति पांच दशक पुरानी है। इतिहास गवाह है कि नई दिल्ली ने जब भी इस्लामाबाद की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया, बदले में भारत को केवल आतंकवादी हमले मिले। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा, "मुझे समझ नहीं आता कि इतने वरिष्ठ लोग इतिहास को कैसे भूल सकते हैं? भगवान ही जानता है कि इन लोगों पर कहाँ से दबाव आ रहा है और वह कौन सा 'अदृश्य हाथ' है, जो भारत के भीतर से ही पाकिस्तान के साथ संबंध सामान्य करने की रोमांटिक और भावुक कल्पनाएं करवा रहा है।"

शहीदों का अपमान: भाजपा ने भी घेरा

इस खुले पत्र को लेकर केवल कांग्रेस के भीतर से ही नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल भाजपा की तरफ से भी बेहद तीखी प्रतिक्रिया आई है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर देश के शहीदों का अपमान है। पूनावाला ने पत्र की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब भारत सरकार आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की आक्रामक नीति अपना रही है, ऐसे समय में पाकिस्तान को क्लीन चिट देने की कोशिश देश बर्दाश्त नहीं करेगा।