From friendship to enmity : यमन में आमने-सामने सऊदी अरब और यूएई
India News Live,Digital Desk : सऊदी अरब और यूएई प्राचीन काल से ही खाड़ी देशों पर अपना वर्चस्व बनाए हुए हैं। सुन्नी मुस्लिम बहुल इन दोनों देशों का मध्य पूर्व में काफी प्रभाव है। लंबे समय तक ये दोनों देश एक-दूसरे के सबसे करीबी और भरोसेमंद साझेदार रहे हैं। हालांकि, आज स्थिति बदल गई है और इनके बीच शत्रुता बढ़ती जा रही है। यमन मुद्दे को लेकर इन दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है।
ताजा घटनाक्रम क्या है?
दोनों देश यमन की धरती पर एक-दूसरे से लड़ रहे हैं। मंगलवार (30 दिसंबर) को सऊदी अरब ने यमन में यूएई से जुड़े हथियारों की खेप पर हवाई हमला किया। सऊदी सेना ने यमन के दक्षिणी बंदरगाह शहर मुकाला पर बमबारी की। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि यमन में सऊदी समर्थित सरकार ने यूएई बलों को देश छोड़ने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। इसके बाद यूएई ने भी अपनी सेना वापस बुला ली। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि वह यमन में अपनी शेष सैन्य उपस्थिति समाप्त कर देगा।
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की मित्रता:
सऊदी अरब अपने गठन के समय से ही संयुक्त अरब अमीरात का समर्थक रहा है। दोनों देश सुन्नी मुस्लिम बहुल राजशाही हैं, जिनकी अर्थव्यवस्था तेल पर निर्भर है। खाड़ी क्षेत्र में ईरान के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंताओं ने उनकी मित्रता को और मजबूत किया है। उनकी मित्रता 2010 के दशक की शुरुआत में अपने चरम पर पहुंच गई थी। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) और संयुक्त अरब अमीरात के शासक मोहम्मद बिन जायद (एमबीजेड) ने इस्लामी कट्टरपंथ और ईरान के खिलाफ एकजुट होकर मोर्चा संभाला। 2011 में, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त अरब अमीरात ने इस्लामी आंदोलनों के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाया। उन्होंने बहरीन में एक विद्रोह को दबाने के लिए संयुक्त सेना भेजी और 2013 में मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड सरकार के सैन्य तख्तापलट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संबंधों में आई दरार:
30 दिसंबर, 2025 को सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के दक्षिणी बंदरगाह मुकाला पर हवाई हमला किया। सऊदी अरब ने दावा किया कि उन्होंने उस बंदरगाह को निशाना बनाया जिसका इस्तेमाल संयुक्त अरब अमीरात समर्थित अलगाववादियों को विदेशी सैन्य सहायता पहुंचाने के लिए किया जाता था। सऊदी अरब ने स्पष्ट रूप से कहा कि हमला संयुक्त अरब अमीरात के हथियारों के शिपमेंट को निशाना बनाकर किया गया था। संयुक्त अरब अमीरात ने सऊदी अरब के दावों को खारिज करते हुए कहा कि हमले में शामिल शिपमेंट में हथियार नहीं थे, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात की सेना के लिए आपूर्ति और उपकरण थे।
इस प्रतिद्वंद्विता का असली कारण यह है कि
दोनों देश अब तेल आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ना चाहते हैं। संयुक्त अरब अमीरात का विज़न 2021, 2008 से पहले ही शुरू हो गया था। इसने अपने शहर दुबई को वैश्विक केंद्र बना दिया। सऊदी अरब का विज़न 2030 अब संयुक्त अरब अमीरात को चुनौती दे रहा है। सऊदी अरब के नियोम सिटी, रियाद हवाई अड्डा और जेद्दा बंदरगाह अब वैश्विक केंद्र बनने की राह पर हैं। 2021 से सऊदी अरब ने संयुक्त अरब अमीरात के मुक्त क्षेत्र से आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। मोहम्मद बिन सलमान और मोहम्मद बिन जायद खाड़ी देशों के नेता बनने की होड़ में हैं। गौरतलब है कि यमन में संयुक्त अरब अमीरात दक्षिणी अलगाववादियों और सऊदी सरकार दोनों का समर्थन करता है। सूडान में संयुक्त अरब अमीरात आरएसएफ का समर्थन करता है, जबकि सऊदी अरब एसएएफ का समर्थन करता है। लीबिया और मिस्र में भी दोनों पक्ष अलग-अलग समूहों का समर्थन करते हैं।