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August 22 2026 01:58 pm

'बंटवारा 1947' की असफलता पर छलके निर्देशक राजकुमार संतोषी का दर्द, बोले- सनी देओल की छवि कहानी पर पड़ी भारी

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बॉलीवुड के जाने-माने फिल्ममेकर राजकुमार संतोषी (Rajkumar Santoshi) ने अपनी हालिया रिलीज फिल्म 'बंटवारा 1947' (Batwara 1947) के बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाने पर खुलकर अपनी बात रखी है। 'घायल', 'घातक' और 'अंदाज अपना अपना' जैसी बेहतरीन फिल्में बनाने वाले निर्देशक ने बताया कि फिल्म की कहानी और कलाकारों के अभिनय को समीक्षकों और देखने वाले दर्शकों ने खूब सराहा है, लेकिन इसके बावजूद बॉक्स ऑफिस के आंकड़े उन्हें निराश कर रहे हैं।

कलाकारों की स्वतंत्रता और सनी देओल की छवि

दैनिक जागरण के साथ एक खास बातचीत में जब राजकुमार संतोषी से यह सवाल किया गया कि क्या किसी स्टार की पुरानी ऑन-स्क्रीन छवि उसकी नई फिल्मों की कहानी पर हावी हो जाती है, तो उन्होंने इस पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि फिल्म देखने वाले 98 प्रतिशत लोग इसकी तारीफ कर रहे हैं, लेकिन कुछ लोगों को सनी देओल द्वारा निभाए गए किरदार को लेकर आपत्तियां थीं।

निर्देशक ने स्पष्ट किया कि 'गदर', 'गदर 2' और 'बॉर्डर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों की वजह से दर्शकों के मन में सनी देओल की एक खास छवि (एंटी-पाकिस्तान और एंटी-मुस्लिम चैंपियन) बन चुकी है। यही वजह है कि जब वे इससे अलग हटकर कोई किरदार निभाते हैं, तो कई बार दर्शक उसे स्वीकार करने में असहज महसूस करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक कलाकार के रूप में सनी देओल को अलग-अलग धर्मों और किरदारों को निभाने की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए, जैसा कि अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र जैसे दिग्गजों ने अपने करियर में किया है।

बॉक्स ऑफिस के आंकड़े और आमिर खान की प्रतिक्रिया

फिल्म की कम कमाई पर बात करते हुए राजकुमार संतोषी ने कहा कि बतौर निर्माता आमिर खान भी इस बात से चिंतित रहते हैं कि दर्शकों तक बेहतरीन सिनेमा पहुंचे। फिल्म के स्क्रीनप्ले, डायलॉग और एडिटिंग से वे सब संतुष्ट हैं, लेकिन बॉक्स ऑफिस के आंकड़े यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि आखिर किस वजह से आम दर्शक सिनेमाघरों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

उन्होंने मौजूदा सिनेमाई दौर पर चिंता जताते हुए कहा कि आज के समय में अच्छी और सार्थक फिल्म बनाने से ज्यादा ध्यान इस बात पर दिया जाता है कि कौन सी फिल्म वीकेंड पर कितने सौ करोड़ की कमाई करेगी। वर्तमान में फिल्म निर्माण रचनात्मकता से ज्यादा सिर्फ आंकड़ों और बिजनेस का खेल बनकर रह गया है।