मिडिल ईस्ट में बड़ा धमाका! एक तरफ ट्रंप की 'डील' का दावा, दूसरी तरफ अमेरिका ने ईरान पर दागीं मिसाइलें
मिडिल ईस्ट से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है। एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ एक ऐतिहासिक डील फाइनल होने की उम्मीद जता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी फाइटर जेट्स और मिसाइलों ने ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर भारी तबाही मचाई है। इस हमले के बाद से पूरे क्षेत्र में युद्ध की चिंगारी एक बार फिर भड़कने की आशंका तेज हो गई है।
बातचीत के बीच अचानक बमबारी, आखिर क्या है अमेरिका का इरादा?
यह घटनाक्रम इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर संकेत दिए थे कि ईरान के साथ चल रही बातचीत अंतिम दौर में है और ईरान के विवादित न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर भी दोनों देशों के बीच सहमति बन गई है। लेकिन कूटनीतिक गलियारों में चल रही इस शांति की सुगबुगाहट के बीच, मंगलवार की सुबह अचानक अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान पर जोरदार हमला बोल दिया। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग ने इसे एक 'रक्षात्मक कदम' बताया है, लेकिन इस टाइमिंग ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
दक्षिणी ईरान में कोहराम: मिसाइल लॉन्च साइट और नौकाएं जमींदोज
विदेशी समाचार एजेंसी एपी (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की है। सेना ने साफ किया है कि यह हमला 'आत्मरक्षा' (Self-Defense) के तहत किया गया। अमेरिकी विमानों ने दक्षिणी ईरान के रणनीतिक इलाकों में बने मिसाइल लॉन्चिंग सिस्टम को चुन-चुनकर निशाना बनाया। इसके अलावा, समुद्र में बारूदी सुरंगें (Sea Mines) बिछाने की तैयारी कर रही ईरान की विशेष नौकाओं पर भी सटीक बमबारी की गई, जिससे वे समुद्र में ही नेस्तनाबूद हो गईं।
बंदर अब्बास पोर्ट पर भारी नुकसान, IRGC जवानों के मारे जाने की खबर
इस हमले में ईरान को बड़ा सैन्य नुकसान होने का दावा किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के बेहद संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदर अब्बास पोर्ट (Bandar Abbas Port) को निशाना बनाया। यहां अमेरिकी हमले में ईरान की दो वॉर-बोट्स पूरी तरह तबाह हो गईं। सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि इस हमले में ईरान की कुख्यात इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नेवी विंग के कई जवान भी मारे गए हैं। अमेरिकी सेना ने सोमवार को ही इन ठिकानों को चिन्हित कर लिया था, जहां ईरान बारूदी सुरंगें बिछाने और मिसाइल तैनात करने की कोशिश कर रहा था।
अमेरिकी सेना ने दी सफाई: "तनाव के बीच भी हम बरत रहे हैं संयम"
रणनीतिक जलमार्ग (Strategic Waterway) के पास हुए इन भीषण धमाकों के बाद अमेरिकी केंद्रीय कमान के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिन्स ने स्थिति स्पष्ट की। जब उनसे इन विस्फोटों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में ईरानी सेना की ओर से पैदा हो रहे सीधे खतरों से अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया है। हॉकिन्स ने आगे कहा कि अमेरिकी सेना वर्तमान युद्धविराम (Ceasefire) के नियमों का सम्मान कर रही है और बेहद संयम बरत रही है, लेकिन अपने सैनिकों की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं, अरेबियन और अमेरिकी मीडिया का मानना है कि इस सीमित हमले का असर दोनों देशों के बीच चल रही बड़ी शांति वार्ता पर नहीं पड़ेगा।