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August 14 2026 11:19 pm

नेपाली युवाओं की बड़ी मांग: 'खाड़ी देशों की नौकरी से बेहतर है भारतीय सेना में सेवा', पोखरा में उठी अग्निवीर भर्ती बहाली की आवाज

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भारत और नेपाल के बीच दशकों पुराने और अटूट सैन्य संबंधों में एक बार फिर गोरखा सैनिकों की भर्ती का मुद्दा गर्माता नजर आ रहा है। नेपाल के पोखरा शहर में इस सप्ताह नेपाली युवाओं, पूर्व गोरखा सैनिकों और उनके परिजनों ने मिलकर एक बड़ा प्रदर्शन किया है। इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना में 'अग्निपथ योजना' के तहत नेपाली नागरिकों की भर्ती को जल्द से जल्द फिर से शुरू करवाना है। प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर कहना है कि खाड़ी देशों में जाकर संघर्षपूर्ण नौकरी करने से कहीं बेहतर है कि नेपाली युवा भारतीय सेना में 'अग्निवीर' बनकर देश और परंपरा की सेवा करें।

क्या है पूरा विवाद और क्यों रुकी हुई हैं भर्तियां?

गौरतलब है कि भारत और नेपाल के बीच गोरखा सैनिकों की भर्ती का इतिहास बहुत पुराना और गौरवशाली रहा है। हालांकि, साल 2019 से ही ये भर्तियां अलग-अलग कारणों से रुकी हुई हैं। सबसे पहले कोरोना महामारी के कारण भर्ती प्रक्रिया बाधित हुई और इसके बाद साल 2022 में भारत सरकार द्वारा 'अग्निपथ योजना' की शुरुआत कर दी गई। इस नई योजना के लागू होने के बाद नेपाल सरकार ने भारतीय सेना में गोरखाओं की भर्ती पर रोक लगा दी थी। नेपाल सरकार का तर्क है कि अग्निपथ योजना, जिसमें चार साल की सेवा का प्रावधान है, वह भारत, नेपाल और ब्रिटेन के बीच हुए ऐतिहासिक 1947 के त्रिपक्षीय समझौते के नियमों के खिलाफ है।

युवाओं और पूर्व गोरखा सैनिकों की मुख्य मांगें

नेपाल में रोजगार के अवसर सीमित होने के कारण वहां के युवा आज भी भारतीय सेना में शामिल होने को लेकर बेहद उत्सुक रहते हैं। पोखरा स्टेडियम से लेकर जिला प्रशासन कार्यालय तक निकाली गई इस रैली में प्रदर्शनकारियों ने जिला अधिकारी को एक ज्ञापन भी सौंपा। उनकी मुख्य मांगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:

अग्निवीर भर्ती बहाल हो: भारत सरकार और नेपाल सरकार मिलकर बातचीत करें और अग्निपथ योजना के तहत गोरखा सैनिकों की रुकी हुई भर्ती प्रक्रिया को तुरंत फिर से शुरू करें।

पारंपरिक सम्मान की रक्षा: गोरखा सैनिकों की पुरानी परंपरा और भारतीय सेना के साथ उनके ऐतिहासिक जुड़ाव को बनाए रखा जाए।

संगठनों पर रोक न लगे: पूर्व सैनिकों के संगठनों के रजिस्ट्रेशन पर लगाई जा रही रोक को तुरंत हटाया जाए ताकि वे अपने अधिकारों की रक्षा कर सकें।

संभावित उच्च स्तरीय दौरों पर टिकी निगाहें

यह पूरा विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है जब जल्द ही भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारियों का नेपाल दौरा संभावित माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि इस कूटनीतिक और सैन्य दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और गोरखा भर्ती के इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई नया रास्ता निकल सकता है। फिलहाल, पोखरा में हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर से इस बात को रेखांकित कर दिया है कि नेपाली युवाओं के बीच भारतीय सेना में सेवा देने का क्रेज आज भी पहले की तरह ही मजबूत बना हुआ है।