ईरान के बाद हूतियों ने भी अड़ाई टांग, बाब-अल-मंदेब में हलचल से वैश्विक सप्लाई चेन पर बड़ा खतरा
India News Live,Digital Desk : पश्चिम एशिया में एक महीने से जारी भीषण संघर्ष अब महायुद्ध के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा है। दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए 'लाइफलाइन' माने जाने वाले समुद्री रास्तों पर संकट के बादल गहरा गए हैं। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर दबाव बनाने के बाद, अब यमन के हूती विद्रोहियों ने 'बाब-अल-मंदेब' (Bab-al-Mandeb) जलडमरूमध्य और लाल सागर में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। इस रणनीतिक चोकपॉइंट पर बढ़ते खतरे ने पूरी दुनिया की तेल, गैस और माल ढुलाई की सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है।
दुनिया के दो सबसे संवेदनशील रास्तों पर 'तालेबंदी' का डर
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषकों और एसएंडपी ग्लोबल (S&P Global) की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक व्यापार अब तक के सबसे गंभीर संकट से गुजर रहा है। एक तरफ ईरान होर्मुज के जरिए रोजाना 8-10 मिलियन बैरल तेल की आपूर्ति को बंधक बनाने की स्थिति में है, तो दूसरी तरफ हूती विद्रोही बाब-अल-मंदेब में मोर्चा खोल रहे हैं। ये दोनों रास्ते एशिया, यूरोप और अफ्रीका को जोड़ने वाली सबसे महत्वपूर्ण कड़ियां हैं। यदि ये दोनों मार्ग एक साथ बाधित होते हैं, तो दुनिया 1973 के तेल संकट से भी भयावह स्थिति का सामना कर सकती है।
बाब-अल-मंदेब: वैश्विक व्यापार की 'संकरी' लेकिन निर्णायक नस
बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। स्वेज नहर के साथ मिलकर यह मार्ग एशिया और यूरोप के बीच सबसे तेज समुद्री कनेक्शन बनाता है।
रणनीतिक महत्व: यहाँ से रोजाना लाखों बैरल कच्चा तेल और भारी मात्रा में एलएनजी (LNG) गुजरती है।
हूतियों की पकड़: यमन के तट पर स्थित होने के कारण हूती विद्रोही यहाँ से गुजरने वाले जहाजों को आसानी से निशाना बना सकते हैं।
पुराना रिकॉर्ड: हूती पहले भी सऊदी अरब और यूएई के तेल प्रतिष्ठानों पर हमला कर अपनी ताकत का अहसास करा चुके हैं।
ईंधन और जरूरी सामान की कीमतों में लग सकती है आग
विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र के रास्ते वैश्विक दबाव बनाने की यह रणनीति सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर असर डालेगी। अगर शिपिंग कंपनियां जोखिम के कारण अपना रास्ता बदलती हैं और अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' से होकर जाती हैं, तो माल ढुलाई का खर्च और समय दोनों बढ़ जाएंगे। इससे न केवल पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छुएंगी, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक सामान, अनाज और दवाइयों की सप्लाई भी प्रभावित होगी।
अमेरिका और मित्र देशों की बढ़ी चिंता
लाल सागर में बढ़ते तनाव को देखते हुए अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने अपनी नौसैनिक उपस्थिति बढ़ा दी है। ईरान द्वारा खर्ग द्वीप की सुरक्षा के लिए की गई तैयारियों और हूतियों के दखल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अलर्ट मोड पर डाल दिया है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर हूती विद्रोहियों ने जहाजों को निशाना बनाना शुरू किया, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अभूतपूर्व अस्थिरता पैदा हो जाएगी, जिससे उबरना किसी भी देश के लिए आसान नहीं होगा।