BREAKING:
August 21 2026 06:55 pm

विराट कोहली को सचिन तेंदुलकर से बेहतर बताने पर एबी डिविलियर्स पर बुरी तरह भड़के डोडा गणेश, दिया करारा जवाब

Post

क्रिकेट जगत में सर्वकालिक महान बल्लेबाज (GOAT) की बहस कभी खत्म नहीं होती। जब भी भारत के दो सबसे बड़े सुपरस्टार्स—'क्रिकेट के भगवान' सचिन तेंदुलकर और आधुनिक दौर के रन-मशीन विराट कोहली के बीच तुलना होती है, तो खेल प्रेमियों और जानकारों के बीच तीखी बहस छिड़ जाती है। हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) में विराट कोहली के लंबे समय तक साथी रहे एबी डिविलियर्स (AB de Villiers) ने एक पोडकास्ट के दौरान विराट कोहली को सचिन तेंदुलकर से बेहतर और बड़ा बल्लेबाज बता दिया। डिविलियर्स के इस बयान पर क्रिकेट फैंस तो हैरान थे ही, लेकिन अब पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज डोडा गणेश (Doda Ganesh) ने बेहद आक्रामक अंदाज में डिविलियर्स पर तीखा हमला बोल दिया है।

एबी डिविलियर्स का वह बयान जिसने मचाया क्रिकेट जगत में बवाल

एबी डिविलियर्स ने हालिया इंटरव्यू में आधुनिक क्रिकेट और सचिन के दौर की तुलना करते हुए विराट कोहली की मैच-विनिंग काबिलियत की खुलकर तारीफ की। डिविलियर्स ने कहा कि चेज करते हुए दबाव को झेलना और लगातार तीनों प्रारूपों में मैच जिताना विराट कोहली को सचिन तेंदुलकर से एक कदम आगे रखता है। डिविलियर्स के अनुसार, आधुनिक युग की फिटनेस, आक्रामकता और तीनों फॉर्मेट के दबाव के बीच कोहली का निरंतर प्रदर्शन उन्हें क्रिकेट इतिहास का सबसे बेहतरीन बल्लेबाज बनाता है।

'भाई गांजा छोड़ दे...' - डोडा गणेश का सोशल मीडिया पर तीखा पलटवार

डिविलियर्स के इस दावे पर पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज डोडा गणेश भड़क उठे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर डिविलियर्स के बयान का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए बेहद कड़े और व्यंग्यात्मक शब्दों में जवाब दिया। डोडा गणेश ने लिखा:

"भाई, थोड़ा गांजा पीना छोड़ दे! सचिन तेंदुलकर ने जिस युग में, जिस गेंदबाजी आक्रमण (वसीम अकरम, वकार यूनिस, ग्लेन मैक्ग्रा, शेन वॉर्न, कर्टली एम्ब्रोस, एलन डोनाल्ड और मुथैया मुरलीधरन) के खिलाफ और बिना किसी आधुनिक सुरक्षा उपकरणों व सपाट पिचों के 24 साल तक दुनिया पर राज किया, उसकी तुलना आज के किसी भी बल्लेबाज से नहीं की जा सकती।"

डोडा गणेश का यह पोस्ट सोशल मीडिया पर चंद मिनटों में वायरल हो गया और क्रिकेट प्रेमियों के बीच दो गुट बन गए।

दो अलग-अलग युग और नियमों का बड़ा अंतर

डोडा गणेश और कई पूर्व क्रिकेट विशेषज्ञों का तर्क है कि 1990 और 2000 के दशक में क्रिकेट आज की तुलना में गेंदबाजों के लिए कहीं अधिक अनुकूल था:

गेंदबाजी का स्वर्ण काल: सचिन के दौर में हर अंतरराष्ट्रीय टीम के पास 145+ किमी/घंटे की रफ्तार से रिवर्स स्विंग कराने वाले तेज गेंदबाज और विश्वस्तरीय स्पिनर मौजूद थे।

नियम और परिस्थितियां: उस दौर में रिवर्स स्विंग को रोकने के लिए दोनों छोर से 2 नई सफेद गेंदों का नियम नहीं था, 5 फील्डर बाउंड्री पर रहते थे, बाउंसर पर आज जैसी पाबंदियां नहीं थीं और बल्ले आज जितने भारी और मोटे किनारों वाले नहीं हुआ करते थे।

वन-मैन आर्मी की भूमिका: 90 के दशक में भारतीय बल्लेबाजी लाइन-अप पूरी तरह सचिन तेंदुलकर पर निर्भर थी, और वे अकेले पूरे देश की उम्मीदों का बोझ उठाते थे।

विराट कोहली के पक्ष में तर्क और आंकड़े

वहीं दूसरी तरफ, एबी डिविलियर्स और कोहली के प्रशंसकों का मानना है कि विराट ने आधुनिक टी20 और वनडे क्रिकेट में चेज मास्टर के रूप में जो मानक तय किए हैं, वह अद्वितीय हैं। 50 से अधिक का तीनों फॉर्मेट में औसत बनाए रखना, 80 से अधिक अंतरराष्ट्रीय शतक जड़ना और भारी शारीरिक व मानसिक व्यस्तता के बावजूद फिटनेस के नए आयाम स्थापित करना विराट कोहली को इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों में शामिल करता है।

सचिन बनाम कोहली: सोशल मीडिया पर बंटी क्रिकेट बिरादरी

डोडा गणेश के इस तीखे बयान के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर सचिन और कोहली के फैंस आमने-सामने आ गए हैं। जहां 90 के दशक के क्रिकेट प्रेमी डोडा गणेश की बात का पुरजोर समर्थन करते हुए सचिन के युग की कठिन परिस्थितियों को याद दिला रहे हैं, वहीं युवा फैंस डिविलियर्स के बयान को आधुनिक क्रिकेट की वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार सही ठहरा रहे हैं। हालांकि, अधिकांश क्रिकेट पंडितों का यही मानना है कि दोनों ही बल्लेबाज अपने-अपने दौर के सबसे बड़े लीजेंड हैं और दो अलग-अलग युगों की सीधी तुलना करना खेल की खूबसूरती के साथ अन्याय है।