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August 13 2026 05:53 pm

यूपी के 184 प्राइवेट हॉस्पिटल आयुष्मान योजना से डी-इम्पैनल, डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने बताई वजह—मरीजों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं

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उत्तर प्रदेश में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत इलाज करा रहे लाखों मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित 184 निजी अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना से बाहर (De-empanel) कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद अब इन अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों को मिलने वाली मुफ्त एवं कैशलेस इलाज की सुविधा तुरंत प्रभाव से बंद कर दी गई है।

यह बड़ी कार्रवाई केंद्र सरकार द्वारा आयुष्मान भारत योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए सुरक्षा और देखभाल की गुणवत्ता से संबंधित मानकों को सख्त किए जाने के बाद की गई है। उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रदेश भर के सभी संबद्ध अस्पतालों के भौतिक सत्यापन और दस्तावेजों की विस्तृत जांच कराई गई थी। जांच के दौरान दर्जनों अस्पताल अनिवार्य सुरक्षा मानकों को पूरा करने और उनसे संबंधित दस्तावेज जमा करने में विफल साबित हुए।

फायर एनओसी और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट में पाई गई बड़ी कमियां

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने इस बड़ी कार्रवाई के कारणों की स्पष्ट व्याख्या करते हुए बताया कि सरकार के लिए मरीजों की जान और उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। डिप्टी सीएम ने कहा कि अस्पतालों को अग्नि सुरक्षा क्लीयरेंस (Fire NOC), बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट और अन्य जरूरी मानकों की पूर्ति के लिए इस साल मार्च महीने से ही लगातार नोटिस और पर्याप्त अवसर दिए जा रहे थे। इसके बावजूद 184 निजी अस्पतालों ने तय समयसीमा के भीतर अनिवार्य शर्तें पूरी नहीं कीं।

विशेष रूप से अस्पतालों में आग से बचाव के इंतजाम और फायर एनओसी जैसे गंभीर मानक सीधे तौर पर मरीजों के जीवन से जुड़े हुए हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही या बड़े हादसे की आशंका को टालने के लिए नियमानुसार इन 184 अस्पतालों की मान्यता रद्द की गई है। उप मुख्यमंत्री ने साफ किया कि इस डी-इम्पैनलमेंट की कार्रवाई का उद्देश्य योजना से जुड़े अस्पतालों की संख्या घटाना बिल्कुल नहीं है, बल्कि योजना के लाभार्थियों को पारदर्शी, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित कराना है।

स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जो अस्पताल डी-इम्पैनल हुए हैं, उनके लिए रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। यदि ये 184 निजी अस्पताल भविष्य में सभी अनिवार्य सुरक्षा शर्तें पूरी कर लेते हैं, फायर एनओसी व जरूरी दस्तावेज विभाग के समक्ष प्रस्तुत कर देते हैं, तो वे नियमानुसार दोबारा इम्पैनलमेंट के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर जाकर व्यवस्थाओं का पुनः सत्यापन करेगी और मानक सही पाए जाने पर उन्हें फिर से योजना में शामिल कर लिया जाएगा।

राजधानी लखनऊ समेत पूरे उत्तर प्रदेश में सरकार के इस सख्त संदेश से निजी अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया है। सरकार की इस पहल से आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों को अब केवल उन्हीं अस्पतालों में इलाज मिलेगा जो पूरी तरह सुरक्षित और उच्च मानकों पर खरे उतरते हैं।