NDA में ही बने रहेंगे यूसुफ पठान और TMC के बागी सांसद: आंतरिक कलह की अटकलों पर NCPI ने जारी किया आधिकारिक बयान
हाल ही में पश्चिम बंगाल की राजनीति और राष्ट्रीय संसद में उस समय भूचाल आ गया था जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 लोकसभा सांसदों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर 'नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में शामिल होने का ऐतिहासिक फैसला किया था। इस राजनीतिक उथल-पुथल के बाद से ही लगातार यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि बागी गुट के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है और पार्टी में अंदरूनी कलह शुरू हो चुकी है। इन चर्चाओं को तब और हवा मिल गई जब हाल ही में हुई एनडीए की 'मंगल मिलन' बैठक में यूसुफ पठान समेत तीन प्रमुख सांसद नजर नहीं आए थे, जिससे राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगने लगे थे। हालांकि, अब खुद एनसीपीआई ने इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए एक स्पष्ट आधिकारिक बयान जारी किया है और यह साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार का कोई तनाव नहीं है और सभी सदस्य पूरी तरह एकजुट हैं।
एनसीपीआई ने खारिज की आंतरिक कलह की खबरें, एनडीए के साथ अटूट प्रतिबद्धता दोहराई
शुक्रवार को नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) की ओर से जारी किए गए आधिकारिक पत्र में मीडिया के एक वर्ग में चल रही उन खबरों को पूरी तरह खारिज किया गया, जिनमें पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेद या तनाव होने का दावा किया जा रहा था। पार्टी ने अपने बयान में कहा, "ये रिपोर्ट्स पूरी तरह से झूठी, गुमराह करने वाली और पूरी तरह से निराधार हैं। एनसीपीआई इन खबरों का कड़ाई से खंडन करती है और इनकी कड़ी निंदा करती है।" पत्र में आगे यह भी जोर देकर कहा गया कि एनसीपीआई के सभी सांसद पश्चिम बंगाल के समग्र विकास, राज्य की जनता के कल्याण और देश के राष्ट्रीय हित के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। पार्टी ने स्पष्ट शब्दों में यह भी रेखांकित किया कि वे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में एनडीए (NDA) गठबंधन के साथ मिलकर कंधे से कंधا मिलाकर काम कर रहे हैं।
क्यों उड़ी थीं तनाव और नाराजगी की अटकलें?
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि ममता बनर्जी का साथ छोड़कर एनसीपीआई का दामन थामने वाले सांसदों में सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है। इसकी मुख्य वजह यह बताई जा रही थी कि हाल ही में संसद भवन परिसर में हुई एनडीए की एक महत्वपूर्ण बैठक में तृणमूल से बगावत कर अलग हुए तीन सांसद—अबु ताहिर, खलीलुर रहमान और पूर्व क्रिकेटर सह सांसद यूसुफ पठान—उपस्थित नहीं रहे थे। हालांकि, इन नेताओं की तरफ से बैठक में गैर-मौजूदगी को लेकर कोई आधिकारिक या व्यक्तिगत कारण सामने नहीं आया था, लेकिन इस छोटी सी दूरी ने मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया था कि शायद बागी गुट के भीतर भविष्य की रणनीतियों को लेकर कोई आंतरिक कलह या वैचारिक मतभेद पनप रहा है। इसके अलावा, लोकसभा में इन बागी सांसदों की अलग बैठने की व्यवस्था और लोकसभा अध्यक्ष ओम द्वारा अभी तक औपचारिक रूप से एनसीपीआई को एक अलग दल के रूप में मान्यता दिए जाने संबंधी निर्णय न आने के कारण भी इन अटकलों को और अधिक बल मिल रहा था।
सायोनी घोष ने बैठक में की शिरकत, मुक्त व्यापार और नए विधेयकों पर की बात
इन तमाम अटकलों और अफवाहों के बीच एनसीपीआई की सांसद सायोनी घोष ने सामने आकर पार्टी का पक्ष रखा और एनडीए की बैठकों में अपनी सक्रिय भागीदारी की पुष्टि की। मीडिया से बातचीत करते हुए सायोनी घोष ने कहा कि उन्होंने एनडीए की बैठक में पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी मौजूदगी में हुई यह बैठक बेहद ज्ञानवर्धक और सकारात्मक रही। उन्होंने जानकारी दी कि बैठक के दौरान मुख्य रूप से मुक्त व्यापार समझौतों (Free Trade Agreements) जैसे गंभीर आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर खुलकर चर्चा की गई, जो देश के विकास के लिए बहुत अहम है। इसके साथ ही, उन्होंने संसद में चर्चा के लिए लाए गए 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक 2026' का जिक्र करते हुए कहा कि देश में पेपर लीक जैसी कुप्रथाओं को रोकने के लिए लाए गए इस सख्त कानून का सभी दलों और सांसदों को एक सुर में समर्थन करना चाहिए, जो यह साबित करता है कि बागी सांसद राष्ट्रीय और जनहित के मुद्दों पर पूरी तरह एकजुट होकर सरकार के साथ खड़े हैं।