'योगी जी, अगर यही करना है तो सारे स्कूल बंद करने पड़ेंगे': नोएडा के सरकारी स्कूल पर सौरभ दास के दावे के बाद आशुतोष रांका ने CM को घेरा
उत्तर प्रदेश के सबसे आधुनिक और आर्थिक रूप से संपन्न जिले गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) के सरकारी स्कूलों की हालत को लेकर एक बड़ा सियासी विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में सक्रिय कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत पार्टी के सह-संयोजक सौरभ दास मंगलवार को नोएडा स्थित एक सरकारी प्राइमरी स्कूल का औचक निरीक्षण (ऑडिट) करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने स्कूल परिसर और शौचालयों की बदहाली का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद पार्टी के एक अन्य प्रमुख नेता आशुतोष रांका ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा और तीखा हमला बोल दिया।
रांका ने सौरभ दास के दावों और स्कूल बंद करने के निर्देशों से जुड़ी खबरों को आधार बनाते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "योगी जी, अगर यही करना है तो यूपी के सारे स्कूल बंद करने पड़ेंगे।" इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए यह भी पूछा कि क्या सरकार इस जर्जर और बदहाल स्कूल पर भी बुलडोजर चलाकर नया स्कूल बनवाएगी या फिर बुलडोजर सिर्फ गरीबों के घरों पर चलाने के लिए ही है।
नोएडा के 1968 के स्कूल का वीडियो वायरल: शौचालय के बाहर गंदगी देख भड़के सौरभ दास
दरअसल, सीजेपी के सह-संयोजक सौरभ दास ने समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा था कि वे यह देखने आए हैं कि यूपी के सबसे विकसित शहरों में गिने जाने वाले नोएडा के सरकारी स्कूलों में बच्चे किन परिस्थितियों में पढ़ाई कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने नोएडा के एक प्राइमरी स्कूल की स्थिति दिखाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया।
वीडियो में स्कूल के शौचालयों की स्थिति बेहद दयनीय दिखाई दी। वॉशरूम के दरवाजे टूटे हुए थे और चौखट के पास ही मानव मल पड़ा हुआ था। वीडियो में दास ने नाराजगी जताते हुए कहा, "वॉशरूम की हालत बेहद खराब है, दरवाजे टूटे हुए हैं। मुझे नहीं लगता कि उत्तर प्रदेश सरकार का कोई भी मंत्री ऐसे टॉयलेट में जाना चाहेगा। फिर मासूम बच्चों के साथ यह नाइंसाफी क्यों कि वे ऐसे अस्वास्थ्यकर माहौल में शौचालय का इस्तेमाल करें?" उन्होंने आगे कहा कि यह विद्यालय 1968 से संचालित हो रहा है और न जाने बच्चों की कितनी पीढ़ियां ऐसी ही बदहाली के बीच पढ़कर निकल चुकी हैं। दास ने राजनेताओं से हिंदू-मुस्लिम की राजनीति छोड़कर सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने की अपील की।
मरम्मत के फंड पर क्रेडिट और स्कूलों को बंद करने का बड़ा दावा
निरीक्षण के दौरान ही दास को जब यह जानकारी मिली कि स्थानीय प्राधिकरण द्वारा स्कूल के नवीनीकरण और मरम्मत के लिए हाल ही में फंड पास कर दिया गया है, तो उन्होंने इसका श्रेय अपने 'स्कूल ठीक करो' अभियान को दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब लोग बाहर निकलकर ऑडिट करते हैं, तभी प्रशासन हरकत में क्यों आता है?
इसके कुछ ही देर बाद सौरभ दास ने सोशल मीडिया पर एक ब्रेकिंग पोस्ट शेयर करते हुए सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने लिखा कि नोएडा में केवल एक स्कूल का निरीक्षण किए जाने के बाद गौतम बुद्ध नगर प्रशासन ने सभी सरकारी स्कूलों को तत्काल बंद करने का निर्देश जारी कर दिया है। दास ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर उत्तर प्रदेश सरकार क्या छिपाने की कोशिश कर रही है?
आशुतोष रांका ने CM योगी को घेरा: 'क्या स्कूल पर बुलडोजर चलेगा?'
सौरभ दास की इसी पोस्ट को रीट्वीट करते हुए सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रशासन और कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लिया। रांका ने आरोप लगाया कि कमियां सुधारने के बजाय स्कूलों को बंद करके सच को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
रांका ने सरकार की बुलडोजर नीति पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि प्रदेश में विकास का पैमाना बुलडोजर है, तो क्या मुख्यमंत्री इस जर्जर और बदहाल स्कूल को गिरवाकर बच्चों के लिए आधुनिक स्कूल की नई इमारत बनवाएंगे? उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए लिखा कि अगर खामियां उजागर होने पर स्कूलों को बंद ही करना समाधान है, तो फिर सरकार को पूरे प्रदेश के हजारों बदहाल स्कूलों पर ताला लटकाना पड़ेगा।
युवाओं से स्कूलों का ऑडिट करने की अपील, गरमाई सूबे की सियासत
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सौरभ दास ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने-अपने गृह क्षेत्रों और कस्बों में जाएं और स्थानीय सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत का ऑडिट कर वीडियो सार्वजनिक करें। उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा के अधिकार से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
वहीं दूसरी ओर, शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों के कायाकल्प और ऑपरेशन कायाकल्प के तहत प्राथमिक विद्यालयों के बुनियादी ढांचे को लगातार सुधारा जा रहा है। किसी भी आकस्मिक अवकाश या स्कूल बंदी को प्रशासनिक या मौसमी दिशा-निर्देशों के तहत तय किया जाता है, न कि किसी निजी ऑडिट के दबाव में। बहरहाल, नोएडा जैसे हाईटेक शहर के सरकारी स्कूल का यह वीडियो सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा व्यवस्था और विपक्ष के हमलों ने सियासी माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है।