पार्टी छोड़ने के बाद पॉडकास्ट में बोले शहजाद पूनावाला, पीएम मोदी और राहुल गांधी पर किए बेबाक खुलासे
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी से इस्तीफा देने के बाद एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में अपनी राजनीतिक यात्रा, भाजपा छोड़ने की इनसाइड स्टोरी और देश के शीर्ष नेताओं पर खुलकर बात की है। टीवी डिबेट्स में भारतीय जनता पार्टी का सबसे आक्रामक और मुखर चेहरा रहे शहजाद पूनावाला ने जुलाई में पार्टी के पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। अब वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त के साथ 'इनसाइड आउट' (द मोजो स्टोरी) पॉडकास्ट में बातचीत करते हुए उन्होंने कई संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात रखी है।
इंटरव्यू के दौरान पूनावाला ने साफ लहजे में कहा कि अब चूंकि वे पार्टी छोड़ चुके हैं, इसलिए उन पर किसी तरह का कोई दबाव या पाबंदी नहीं है। उन्होंने कहा, "मैंने अब भाजपा छोड़ दी है। अब भाजपा मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। न बाल बांका कर सकती है, न मुझे कोई पैसा दे रही है... लेकिन मैं फिर भी पूरी ईमानदारी से कहूंगा कि अन्य पार्टियों की तुलना में भाजपा में अब भी शर्म-लाज बची है। भाजपा कोई बेशरम पार्टी नहीं है।"
'भाजपा ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया, क्या विपक्ष ने ऐसा किया?'
नीट (NEET) पेपर लीक आंदोलन और अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर भाजपा के स्टैंड का जिक्र करते हुए पूनावाला ने कहा कि संगठन का आकार विशाल होने के कारण कई बार पार्टी स्तर पर निर्णय लेने में थोड़ी देर हो जाती है। हालांकि, उन्होंने पार्टी के जवाबदेही तंत्र का बचाव करते हुए विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि जब पेपर लीक का मामला बढ़ा तो भाजपा ने केंद्रीय स्तर पर कदम उठाते हुए धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कराया। उन्होंने सवाल दागते हुए कहा:
क्या कर्नाटक में पेपर लीक होने पर वहां के शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दिया?
पंजाब में 6 अलग-अलग परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, वहां की आम आदमी पार्टी सरकार ने अपने शिक्षा मंत्री से इस्तीफा क्यों नहीं मांगा?
झारखंड में भर्ती घोटालों के बावजूद वहां के शिक्षा मंत्री पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
पीएम मोदी को लेकर तल्ख टिप्पणी: 'तानाशाही में 100 में से 0 नंबर'
पॉडकास्ट में जब उनसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यप्रणाली और विपक्ष द्वारा लगाए जाने वाले 'तानाशाही' के आरोपों पर सवाल पूछा गया, तो पूनावाला ने एक बेहद हैरान करने वाला और कड़ा बयान दिया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष प्रधानमंत्री मोदी को जिस तरह 'तानाशाह' साबित करने में जुटा रहता है, उस पैमाने पर मोदी पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "मैं भाजपा और मोदी जी की एक नाकामी बताता हूं। वे एक बहुत बुरे तानाशाह हैं। तानाशाही के मामले में मैं उन्हें 100 में से शून्य (0) नंबर देता हूं। अगर सच में तानाशाही चलानी थी, तो ऐसे तो नहीं चलती। मैंने कहा कि आप इस्तीफा दे दो, आप इस मामले में पूरी तरह फेलियर हो। असल में जिस तरह से विपक्ष तानाशाही का नैरेटिव गढ़ता है, देश में वैसी कोई तानाशाही है ही नहीं। वो सख्त फैसले लेने और विरोधियों को कुचलने के 'तानाशाही पैमाने' पर बिल्कुल शून्य हैं। "
क्या बड़ा पद न मिलने और अमित मालवीय वाले रोल के कारण छोड़ी पार्टी?
पॉडकास्ट के दौरान यह सवाल भी उठा कि क्या शहजाद पूनावाला भाजपा आईटी सेल के मुखिया पद की दौड़ में थे और पद न मिलने की वजह से नाराज होकर उन्होंने पार्टी छोड़ी? दरअसल, 11 साल तक आईटी सेल प्रमुख रहे अमित मालवीय की जगह दीपक म्हस्के को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
इस कयास को खारिज करते हुए पूनावाला ने तारीखों का हवाला दिया:
उन्होंने कहा, "मैंने पार्टी को अपना पहला इस्तीफा 30 जुलाई को ही भेज दिया था। जबकि पार्टी ने संगठन में बदलाव का औपचारिक ऐलान 17 अगस्त को दोपहर 3-4 बजे किया। मुझे 30 जुलाई को कैसे पता हो सकता था कि 17 अगस्त को क्या होने वाला है?"
उन्होंने दोहराया कि उनका इस्तीफा आर्थिक और कुछ निजी कारणों के चलते हुआ था। जिन कुछ लोगों के रवैये की वजह से उन्हें पार्टी छोड़नी पड़ी, उनकी जानकारी उन्होंने पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्व को पहले ही दे दी थी।
राहुल गांधी पर राय: '2009 से 2026 में सुधार हुआ, पर निरंतरता की भारी कमी'
पॉडकास्ट में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर भी सवाल किया गया। पूर्व में कांग्रेस में रह चुके शहजाद पूनावाला ने राहुल गांधी के राजनीतिक बदलावों का तटस्थ विश्लेषण पेश किया।
उन्होंने कहा:
"अगर कोई मुझसे पूछे कि क्या 2009 से 2026 के बीच राहुल गांधी ने खुद में सुधार किए हैं, तो यह बात बिल्कुल सच है। उन्होंने अपनी छवि और राजनीति में काफी बदलाव किए हैं, लेकिन उतना नहीं जितना एक राष्ट्रीय नेता के लिए जरूरी है। "
पूनावाला ने आगे कहा कि राहुल गांधी के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि उन्हें लगता है कि उन्हें हर बात का पूरा ज्ञान है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी में 'कंसिस्टेंसी' (निरंतरता) की भारी कमी है, वे किसी भी मुद्दे को तार्किक अंत तक नहीं ले जा पाते। साथ ही उन्होंने यह दावा भी किया कि सीजेपी (CJP) जैसे आंदोलनों को पर्दे के पीछे से समर्थन और फंडिंग मिलने के बारे में वे और राहुल गांधी दोनों भली-भांति जानते हैं।
शहजाद पूनावाला के इस इंटरव्यू ने राजनीतिक हलकों में एक बार फिर हलचल मचा दी है, क्योंकि पार्टी छोड़ने के बावजूद उन्होंने विपक्ष के आरोपों की हवा निकालते हुए भाजपा और विपक्षी खेमे दोनों की कमजोरियों पर खुलकर बात रखी है।