मसूद अजहर पर पाकिस्तान के 70 लाख के इनाम पर भड़का भारत, खोली दोहरे चरित्र की पोल
आतंकवाद के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ चुके पाकिस्तान की एक और चालबाजी को भारत ने बेनकाब कर दिया है। प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के सरगना और संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा घोषित वैश्विक आतंकी मसूद अजहर पर पंजाब (पाकिस्तान) सरकार द्वारा 70 लाख पाकिस्तानी रुपये (PKR) का इनाम घोषित किए जाने पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
भारतीय विदेश मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान के इस कदम को दुनिया और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की आंखों में धूल झोंकने की पुरानी और घिसी-पिटी चाल करार दिया है। भारतीय कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि जिस आतंकी को पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) ने दशकों से अपनी आधिकारिक सुरक्षा में बहावलपुर में पनाह दे रखी है, उसी के बारे में यह नाटक करना कि वह "लापता" है और उस पर इनाम घोषित करना, पाकिस्तान के दोहरे चरित्र और पाखंड का सबसे बड़ा सबूत है।
क्या है पाकिस्तान का नया नाटक? बहावलपुर और पंजाब पुलिस का नोटिस
हाल ही में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के आतंकवाद-रोधी विभाग (CTD) ने अखबारों और सार्वजनिक प्लेटफॉर्म्स पर मोस्ट वांटेड आतंकियों की एक नई सूची जारी की।
इस सूची में जैश सरगना मौलाना मसूद अजहर का नाम शामिल करते हुए उस पर 70 लाख रुपये का इनाम रखा गया है। नोटिस में कहा गया है कि मसूद अजहर विभिन्न आतंकी गतिविधियों, फंडिंग और देश विरोधी हरकतों में वांछित है और उसकी सूचना देने वाले को यह इनाम दिया जाएगा।
हैरानी की बात यह है कि कुछ ही समय पहले तक पाकिस्तानी हुक्मरान और राजनयिक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह दावा करते नहीं थकते थे कि मसूद अजहर पाकिस्तान में है ही नहीं, बल्कि वह अफगानिस्तान के नंगरहार या किसी अन्य इलाके में छिपा हुआ है। तालिबान सरकार ने उस वक्त पाकिस्तान के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए सबूत पेश करने की चुनौती दी थी। अब अचानक पंजाब पुलिस द्वारा उसे अपने ही राज्य में 'वांछित' दिखाकर इनाम रखना पाकिस्तान के झूठ का पर्दाफाश करता है।
भारत ने लगाई लताड़: 'बहावलपुर में महफूज है मसूद, यह सिर्फ दिखावा'
भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह कार्रवाई किसी ईमानदारी से आतंकवाद के खात्मे के लिए नहीं, बल्कि केवल अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचने के लिए रचा गया एक स्वांग है।
भारत की प्रमुख आपत्तियां:
सुरक्षित ठिकानों पर ऐश: भारतीय खुफिया डोजियर के अनुसार, मसूद अजहर पंजाब प्रांत के बहावलपुर स्थित अपने विशाल मरकज (मुख्यालय) 'मरकज उस्मान-ओ-अली' और रेलवे लिंक रोड स्थित ठिकाने पर पाकिस्तानी रेंजर्स और कमांडो के कड़े सुरक्षा घेरे में रहता है।
इनाम की मामूली रकम एक मजाक: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 1267 अल-कायदा प्रतिबंध समिति द्वारा ब्लैकलिस्ट किए गए एक वैश्विक आतंकवादी, जिसने भारत में संसद हमले, उरी और पुलवामा जैसे जघन्य हमलों को अंजाम दिया, उस पर मात्र 70 लाख पाकिस्तानी रुपये (लगभग 20-22 लाख भारतीय रुपये) का इनाम घोषित करना अपने आप में एक भद्दा मजाक है।
सजा के नाम पर खानापूरी: जब भी एफएटीएफ की समीक्षा बैठक या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वित्तीय पाबंदियों का खतरा मंडराता है, पाकिस्तान लश्कर-ए-तैयबा के हाफिज सईद या जैश के मसूद अजहर के खिलाफ कुछ कागजी एफआईआर या दिखावे के वारंट जारी कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है।
भारत में रचे कई खूनी षड्यंत्र: कंधार से लेकर पुलवामा तक का गुनहगार
मसूद अजहर भारत में हुए कई बड़े और घातक आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड रहा है:
कंधार विमान अपहरण (1999): इंडियन एयरलाइंस के आईसी-814 विमान को अगवा कर 170 से अधिक यात्रियों की जान जोखिम में डालकर आतंकियों ने तत्कालीन वाजपेयी सरकार पर दबाव बनाकर मसूद अजहर को जम्मू की कोट भलवाल जेल से रिहा कराया था।
2001 संसद हमला: रिहा होने के तुरंत बाद उसने जैश-ए-मोहम्मद का गठन किया और भारतीय लोकतंत्र के मंदिर संसद भवन पर आत्मघाती हमला कराया।
पठानकोट और पुलवामा हमला: 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हमला और 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुआ फिदायीन हमला, जिसमें 40 वीर जवान शहीद हुए थे, मसूद अजहर और उसके भाई रऊफ असगर के इशारे पर ही अंजाम दिया गया था।
मई 2019 में ग्लोबल आतंकी घोषित: भारत के निरंतर कूटनीतिक प्रयासों के बाद चीन द्वारा अपना वीटो हटाए जाने पर संयुक्त राष्ट्र ने मसूद अजहर को आधिकारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किया था।
क्या है इस नए पैंतरे के पीछे की टाइमिंग?
सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इस समय अपनी चरमराती अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कर्जों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय निगरानी से बचने के लिए बेताब है।
पश्चिमी देशों और वैश्विक वित्तीय निगरानी संस्थाओं के सामने खुद को 'आतंकवाद से पीड़ित' और 'कार्रवाई करने वाला देश' दिखाने के लिए इस्लामाबाद ऐसी कागजी कार्यवाहियों का सहारा लेता रहा है। लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक मसूद अजहर, दाऊद इब्राहिम और साजिद मीर जैसे आतंकियों को भारत के हवाले नहीं किया जाता या उन्हें वास्तविक रूप से जेल की सलाखों के पीछे नहीं डाला जाता, तब तक इस तरह के ढोंग को वैश्विक बिरादरी में कोई मान्यता नहीं मिलेगी।