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August 22 2026 10:38 pm

टी20 के बाद टेस्ट टीम इंडिया में दस्तक देने को तैयार हैं वंडरबॉय वैभव सूर्यवंशी, दिग्गज राहुल द्रविड़ ने जताई बड़ी उम्मीद

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भारतीय क्रिकेट जगत में जब भी किसी युवा प्रतिभा की पहचान और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तराशने की बात आती है, तो 'द वॉल' के नाम से विख्यात पूर्व दिग्गज कप्तान व पूर्व हेड कोच राहुल द्रविड़ की राय को सबसे प्रामाणिक माना जाता है। बिहार के समस्तीपुर से निकले 13 वर्षीय बाएं हाथ के विस्फोटक बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर अब खुद राहुल द्रविड़ ने एक ऐसी भविष्यवाणी कर दी है, जिसने पूरे क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी है। आईपीएल मेगा ऑक्शन में करोड़ों की बोली हासिल करने और टी20 फॉर्मेट में अपनी आक्रामक बैटिंग का लोहा मनवाने वाले वैभव सूर्यवंशी को लेकर द्रविड़ का मानना है कि यह युवा खिलाड़ी सिर्फ सफेद गेंद (T20 और ODI) का ही हिटर नहीं है, बल्कि उसके पास तकनीकी रूप से भारतीय सीनियर टेस्ट टीम में एक सफल और लंबी पारी खेलने की दुर्लभ क्षमता मौजूद है।

राहुल द्रविड़ का बड़ा दावा: 'टी20 की आक्रामकता के पीछे छिपा है एक क्लासिक टेस्ट बल्लेबाज'

राजस्थान रॉयल्स के हेड कोच के रूप में वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा को बेहद करीब से देखने और नेट्स में उन्हें परखने वाले राहुल द्रविड़ ने युवा बल्लेबाज के खेल पर खुलकर अपनी राय रखी है। द्रविड़ का कहना है कि आज के दौर में अधिकांश युवा बल्लेबाज केवल पावर-हिटिंग और टी20 स्टाइल तक सीमित रह जाते हैं, लेकिन वैभव के पास गेंद की लेंथ को जल्दी भांपने, क्रीज की गहराई का सही इस्तेमाल करने और ठोस रक्षात्मक तकनीक (सॉलिड डिफेंस) का स्वाभाविक हुनर मौजूद है।

द्रविड़ ने कहा कि किसी भी 13-14 साल के खिलाड़ी में तेज गेंदबाजों के खिलाफ बिना किसी डर के बैकफुट पर जाकर पंच और पुल शॉट लगाने का ऐसा संतुलन बहुत कम देखने को मिलता है। द्रविड़ के अनुसार, यदि वैभव को सही मार्गदर्शन, वर्कलोड मैनेजमेंट और घरेलू रेड-बॉल क्रिकेट में लगातार मैच खेलने के अवसर दिए जाएं, तो वह आने वाले वर्षों में भारतीय टेस्ट टीम के शीर्ष क्रम में एक मजबूत स्तंभ बन सकते हैं।

द्रविड़ का गुरुमंत्र और लाल गेंद की परीक्षा: सिर्फ टी20 नहीं, टेस्ट के लिए भी गॉड-गिफ्टेड प्रतिभा

राहुल द्रविड़ ने हमेशा से तकनीक और मानसिक दृढ़ता को रेड-बॉल क्रिकेट की सबसे बड़ी पूंजी माना है। वैभव सूर्यवंशी के संदर्भ में द्रविड़ का मानना है कि उन्होंने बहुत कम उम्र में ही प्रथम श्रेणी क्रिकेट का दबाव झेलना शुरू कर दिया है। महज 12 साल 284 दिन की उम्र में मुंबई जैसी मजबूत और दिग्गज टीम के खिलाफ रणजी ट्रॉफी डेब्यू करने वाले वैभव ने यह दिखाया था कि उनके पास बड़ों के बीच खड़े होने का साहस है।

द्रविड़ ने स्पष्ट किया कि टी20 क्रिकेट में नाम कमाना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए पहला कदम हो सकता है, लेकिन किसी खिलाड़ी की असली विरासत टेस्ट क्रिकेट के पन्नों पर ही लिखी जाती है। द्रविड़ ने कहा कि टीम मैनेजमेंट और राजस्थान रॉयल्स की कोचिंग यूनिट वैभव को केवल एक टी20 स्लॉगर के रूप में विकसित नहीं करना चाहती, बल्कि उनका लक्ष्य उन्हें तीनों प्रारूपों (ऑल-फॉर्मेट) का संपूर्ण बल्लेबाज बनाना है।

ऑस्ट्रेलिया U-19 के खिलाफ 58 गेंदों का वो रेड-बॉल शतक: जहां दिखी थी टेस्ट की झलक

वैभव सूर्यवंशी की रेड-बॉल क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण चेन्नई में ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 टीम के खिलाफ खेले गए चार दिवसीय यूथ टेस्ट मैच में देखने को मिला था। उस मुकाबले में जब भारतीय टीम दबाव में थी, तब वैभव ने महज 58 गेंदों में तूफानी शतक ठोक कर दुनिया भर के दिग्गजों को हैरान कर दिया था।

दिलचस्प बात यह थी कि उस पारी में उन्होंने केवल हवाई शॉट्स नहीं खेले थे, बल्कि बेहतरीन क्लासिकल कवर ड्राइव्स, स्क्वायर कट्स और फ्रंट-फुट डिफेंस का शानदार मुजाहिरा पेश किया था। लाल गेंद के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया के 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाले तेज गेंदबाजों को जिस सहजता से उन्होंने बैकफुट पर जाकर खेला था, उसने यह साबित कर दिया था कि उनके पास तेज पिचों पर टेस्ट क्रिकेट खेलने का नैचुरल टैलेंट मौजूद है।

बीसीसीआई का रोडमैप और 'इंडिया-ए' के जरिए टेस्ट टीम का सफर

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और राष्ट्रीय चयनकर्ता भी वैभव सूर्यवंशी की प्रगति पर बहुत करीब से नजर बनाए हुए हैं। मौजूदा समय में भारतीय टेस्ट टीम एक बड़े ट्रांजिशन (बदलाव के दौर) से गुजर रही है, जहां नए और आक्रामक युवा बल्लेबाजों को टेस्ट सेटअप में शामिल किया जा रहा है।

बीसीसीआई की योजना के अनुसार, वैभव को आईपीएल और टी20 टूर्नामेंट्स के तुरंत बाद रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी और भारत की अंडर-19 टीम के प्रमुख रेड-बॉल दौरों में नियमित मौके दिए जाएंगे। इसके बाद उन्हें 'इंडिया-ए' टीम के विदेशी दौरों (जैसे इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया) पर भेजकर उनकी तकनीक को विदेशी उछाल और स्विंग के अनुकूल ढाला जाएगा। यदि वह इन स्तरों पर लगातार बड़ी पारियां खेलने में सफल रहते हैं, तो बहुत जल्द वह भारतीय सीनियर टेस्ट टीम के दरवाजे खटखटाते नजर आ सकते हैं।

उम्र का दबाव, शारीरिक विकास और राहुल द्रविड़ का सुरक्षा कवच

हालांकि, किसी भी 13-14 वर्षीय खिलाड़ी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की उम्मीदों के बोझ को संभालना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इतिहास गवाह है कि कई युवा प्रतिभाएं शुरुआती शोहरत और मीडिया हाइप के दबाव में आकर बिखर गईं। इसी खतरे को भांपते हुए राहुल द्रविड़ खुद वैभव के मेंटॉर की भूमिका में खड़े हैं।

द्रविड़ ने स्पष्ट हिदायत दी है कि वैभव के आसपास मीडिया की चकाचौंध को सीमित रखा जाए और उनके शारीरिक फिटनेस, मोबिलिटी, कंधे की ताकत और मानसिक शांति पर ध्यान केंद्रित किया जाए। 16 से 18 वर्ष की आयु तक पहुंचते-पहुंचते एक एथलीट का शरीर पूरी तरह परिपक्व होता है, ऐसे में उन्हें किसी भी गंभीर चोट से बचाना और क्रिकेट के प्रति उनकी भूख को बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण होगा।

सचिन तेंदुलकर और पृथ्वी शॉ की राह: क्या बनेगा नया इतिहास?

भारतीय टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे कम उम्र में डेब्यू करने का रिकॉर्ड महान सचिन तेंदुलकर (16 साल 205 दिन) के नाम दर्ज है। इसके बाद पार्थिव पटेल और रवि शास्त्री जैसे खिलाड़ियों ने बेहद कम उम्र में टेस्ट कैप हासिल की थी।

यदि वैभव सूर्यवंशी अगले 2 से 3 वर्षों के भीतर घरेलू क्रिकेट में रनों का अंबार लगाते हैं और अपनी फॉर्म को बरकरार रखते हैं, तो वह आधुनिक युग में सबसे कम उम्र में टेस्ट डेब्यू करने वाले भारतीय खिलाड़ियों की ऐतिहासिक सूची में शामिल हो सकते हैं। राहुल द्रविड़ जैसे दूरदर्शी दिग्गज की यह उम्मीद यह दर्शाती है कि समस्तीपुर के इस छोटे से लड़के के अंदर भारतीय क्रिकेट के अगले युग का एक बड़ा महानायक बनने की पूरी चिंगारी मौजूद है।