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August 22 2026 10:42 pm

'टेस्ट में संघर्ष नहीं कर रही टीम इंडिया, यह बदलाव का दौर है और रैंकिंग मायने नहीं रखती'; गौतम गंभीर ने आलोचकों को दिया दो टूक जवाब

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भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर अपने बेबाक बयानों, रणनीतिक स्पष्टता और आक्रामक रवैये के लिए जाने जाते हैं। जब से उन्होंने भारतीय टीम के मुख्य कोच की कमान संभाली है, वह लगातार ड्रेसिंग रूम की सोच को आधुनिक और परिणाम-उन्मुख बनाने में जुटे हुए हैं। पिछले कुछ समय में टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम के प्रदर्शन में आए उतार-चढ़ाव और घरेलू मैदानों पर मिली चुनौतियों के बाद सोशल मीडिया और खेल विश्लेषकों द्वारा यह दावा किया जाने लगा था कि टीम इंडिया लाल गेंद के प्रारूप में संघर्ष कर रही है। हालांकि, श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो के ऐतिहासिक आर. प्रेमदासा स्टेडियम में होने वाले दूसरे टेस्ट मुकाबले से ठीक पहले गौतम गंभीर ने इन सभी दावों और आलोचनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। गंभीर ने साफ शब्दों में कहा कि भारतीय टीम किसी भी सूरत में संघर्ष नहीं कर रही है, बल्कि वह एक बड़े 'बदलाव के दौर' (Transition Phase) से गुजर रही है, जहां एक नई पीढ़ी जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार हो रही है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि उनके लिए आईसीसी टेस्ट रैंकिंग कोई खास मायने नहीं रखती, बल्कि उनका पूरा ध्यान मैदान पर मैच जीतने और बड़े टूर्नामेंट्स में ट्रॉफियां हासिल करने पर केंद्रित है।

'रैंकिंग सिर्फ एक नंबर है, हमारी नजरें ट्रॉफियों पर': गंभीर का दो टूक जवाब

कोलंबो में आयोजित आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब पत्रकारों ने भारतीय टीम की हालिया टेस्ट फॉर्म, आईसीसी रैंकिंग और घर में मिलने वाली चुनौतियों को लेकर सवाल पूछा, तो हेड कोच ने बिना किसी लाग-लपेट के अपना दृष्टिकोण रखा। गंभीर ने कहा कि रैंकिंग्स को जरूरत से ज्यादा महत्व देना सही नहीं है। किसी भी टीम की असली ताकत इस बात से नहीं आंकी जाती कि वह किसी खास महीने में टेबल पर किस स्थान पर बैठी है, बल्कि यह देखा जाना चाहिए कि बड़े वैश्विक मुकाबलों और आईसीसी इवेंट्स में टीम का प्रदर्शन कैसा रहता है।

गंभीर ने जोर देकर कहा कि टीम इंडिया का लक्ष्य केवल आंकड़ों या रैंकिंग के सहारे खुद को संतुष्ट करना नहीं है। उनका प्राथमिक कर्तव्य भारतीय टीम को ऐसी स्थिति में पहुंचाना है जहां वह किसी भी विदेशी धरती पर जाकर विरोधी टीम को हराने का माद्दा रखे। उन्होंने कहा कि जब टीम बड़े टूर्नामेंट्स में जीत हासिल करती है और महत्वपूर्ण सीरीज अपने नाम करती है, तो रैंकिंग अपने आप सुधर जाती है। इसलिए पूरी टीम का ध्यान बाहरी धारणाओं या रैंकिंग के उतार-चढ़ाव के बजाय अपनी रणनीतियों को मैदान पर सही तरीके से लागू करने पर है।

'यह संघर्ष नहीं, बदलाव का दौर है': दिग्गजों के हटने के बाद नई पीढ़ी की तैयारी

गंभीर ने इस बात पर विशेष बल दिया कि जो लोग भारतीय टीम के मौजूदा प्रदर्शन को 'संघर्ष' का नाम दे रहे हैं, वे खेल की बुनियादी वास्तविकताओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। भारतीय टेस्ट क्रिकेट ने पिछले एक दशक में विराट कोहली, रोहित शर्मा, चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे और रविचंद्रन अश्विन जैसे महान खिलाड़ियों के दम पर विश्व स्तर पर अपना दबदबा कायम किया था। जब ऐसे दिग्गज खिलाड़ी टेस्ट क्रिकेट से दूर होते हैं या अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर पहुंचते हैं, तो किसी भी अंतरराष्ट्रीय टीम के लिए उस खाली जगह को भरना एक स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा होता है।

हेड कोच ने समझाया कि इस संक्रमण काल (Transition Phase) में कुछ उतार-चढ़ाव और अप्रत्याशित परिणाम आना पूरी तरह सामान्य है। जब नए और युवा खिलाड़ी पहली बार अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट की तपिश का सामना करते हैं, तो उन्हें परिस्थितियों के अनुकूल ढलने में थोड़ा समय लगता है। इंग्लैंड दौरे और मौजूदा श्रीलंका दौरे का उदाहरण देते हुए गंभीर ने कहा कि भारत ने लगातार कड़ा और प्रतिस्पर्धी टेस्ट क्रिकेट खेला है और युवा खिलाड़ी दबाव की परिस्थितियों में अपनी मजबूत मानसिक क्षमता का परिचय दे रहे हैं।

'1-2 मैचों के आधार पर नहीं होंगे फैसले': युवा खिलाड़ियों को मिलेगा लंबा मौका

गंभीर ने युवा प्रतिभाओं के विकास और चयन समिति के दृष्टिकोण पर भी खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीम मैनेजमेंट किसी भी युवा खिलाड़ी का मूल्यांकन महज एक या दो खराब मैचों के आधार पर नहीं करेगा। उन्होंने गॉल टेस्ट में शानदार शतक जड़ने वाले देवदत्त पडिक्कल (167 रन) और अपने डेब्यू के शुरुआती चरण में ही 10 विकेट झटकने वाले युवा बाएं हाथ के स्पिनर मानव सुथार के प्रदर्शन की जमकर सराहना की।

गंभीर ने कहा कि युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की अनिश्चितताओं से बचाने के लिए 'सुरक्षा की भावना' देना सबसे ज्यादा जरूरी है। यदि किसी खिलाड़ी को यह डर रहेगा कि एक मैच में नाकाम होते ही उसे टीम से बाहर कर दिया जाएगा, तो वह कभी भी अपना स्वाभाविक और बेखौफ खेल नहीं दिखा पाएगा। इसलिए टीम मैनेजमेंट ने यह तय किया है कि क्षमतावान खिलाड़ियों को लंबा मौका (Longer Rope) दिया जाएगा ताकि वे अपनी गलतियों से सीख सकें और भारतीय टेस्ट क्रिकेट के भविष्य के मैच-विनर बन सकें।

20 विकेट चटकाने की क्षमता और गेंदबाजी संयोजन पर स्पष्ट रुख

टेस्ट मैचों को जीतने की मूल कुंजी पर बात करते हुए गौतम गंभीर ने कहा कि दुनिया का कोई भी कप्तान या कोच तब तक टेस्ट मैच नहीं जीत सकता जब तक उसके पास विरोधी टीम के 20 विकेट लेने वाला गेंदबाजी आक्रमण न हो। उन्होंने बताया कि टीम की रणनीति हमेशा पिच की स्थिति, मौसम और विरोधी टीम के बल्लेबाजी क्रम को देखकर तय की जाती है।

पहले टेस्ट में चाइनामैन स्पिनर कुलदीप यादव से कम ओवर करवाए जाने और प्लेइंग इलेवन के चयन को लेकर उठ रहे सवालों पर गंभीर ने स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि कुलदीप यादव एक असाधारण मैच-विनर हैं, लेकिन मैच के दौरान परिस्थितियां किस तरह करवट लेती हैं, उस आधार पर कप्तान मैदान पर तत्काल फैसले लेता है। कोलंबो टेस्ट में भी टीम उसी गेंदबाजी संयोजन के साथ उतरेगी जो उस विशेष पिच पर 20 विकेट निकालने की सबसे बेहतर गारंटी प्रदान करता हो।

'3 टेस्ट मैचों की सीरीज होनी चाहिए आदर्श': द्विपक्षीय सीरीज के प्रारूप पर गंभीर का तर्क

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गौतम गंभीर ने आधुनिक क्रिकेट में 2 टेस्ट मैचों की छोटी सीरीज पर भी एक विचारोत्तेजक बयान दिया। भारत और श्रीलंका के बीच मौजूदा सीरीज केवल 2 मैचों की है, जिसमें भारत पहला टेस्ट 165 रनों से जीतकर 1-0 से आगे चल रहा है।

गंभीर ने कहा कि उनके अनुसार टेस्ट क्रिकेट में 3 मैचों की सीरीज सबसे आदर्श और संतुलित प्रारूप होती है। 2 टेस्ट की सीरीज में यदि कोई टीम पहला मुकाबला हार जाती है, तो उसके पास सीरीज जीतने का कोई मौका नहीं बचता और वह केवल सीरीज बराबर करने के लिए खेलती है। वहीं, 3 मैचों की सीरीज दोनों टीमों को वापसी करने, रणनीति बदलने और अपनी असली क्षमता दिखाने का पूरा अवसर देती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस और वर्कलोड मैनेजमेंट के दौर में खिलाड़ियों के लिए 3 टेस्ट मैचों की सीरीज खेलना शारीरिक रूप से कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं है।

कोलंबो में 2-0 से क्लीन स्वीप का लक्ष्य और WTC फाइनल की राह

शुभमन गिल की युवा और ऊर्जावान कप्तानी में भारतीय टीम ने गॉल में जिस तरह से श्रीलंका को एकतरफा अंदाज में मात दी, उसने यह साबित कर दिया है कि टीम का विजन सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारतीय टीम इस समय विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC 2025-27) की अंकतालिका में 5वें पायदान पर मजबूती से बनी हुई है। यदि टीम कोलंबो टेस्ट को भी अपने नाम कर सीरीज में 2-0 से क्लीन स्वीप करती है, तो उसके पॉइंट्स पर्सेंटेज (PCT) में बड़ा उछाल आएगा, जो उसे फाइनल की दौड़ में और आगे ले जाएगा।

गौतम गंभीर के इस आत्मविश्वास से भरे और स्पष्ट दृष्टिकोण ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय टीम बाहरी शोर, सोशल मीडिया की चर्चाओं या रैंकिंग के दबाव में आए बिना अपने दीर्घकालिक लक्ष्यों पर काम कर रही है। बदलाव के इस दौर में भारतीय टेस्ट टीम का यह निर्भीक दृष्टिकोण आने वाले वर्षों में विश्व क्रिकेट में भारत के एकछत्र दबदबे की मजबूत नींव तैयार कर रहा है।