BREAKING:
August 22 2026 11:49 pm

Gold Price Hike: जून से अब तक 17% उछला सोना, क्या जल्द ही ₹1.70 लाख प्रति 10 ग्राम का आंकड़ा पार करेगा भाव?

Post

भारतीय सर्राफा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी एक्सचेंजों पर सोने की कीमतों में ऐतिहासिक तेजी का सिलसिला लगातार जारी है। जून के महीने से लेकर अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो घरेलू बाजार में 24 कैरेट सोने के भाव में 17% से अधिक का जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। पिछले कुछ महीनों में सोने ने अपने पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए नई ऊंचाइयों को छुआ है, जिससे निवेशकों को शानदार रिटर्न मिला है, लेकिन आम आभूषण खरीदारों और शादी-ब्याह की खरीदारी करने वाले परिवारों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के साथ-साथ हाजिर (स्पॉट) बाजार में 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव प्रति 10 ग्राम ₹1.55 लाख से ₹1.57 लाख के दायरे में कारोबार कर रहा है। वहीं, 22 कैरेट जेवराती सोने की कीमतें भी ₹1.42 लाख से ₹1.44 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच चुकी हैं। दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, जयपुर, अहमदाबाद, कोलकाता और चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों में स्थानीय टैक्स, जीएसटी (3%) और मेकिंग चार्ज जुड़ने के बाद आभूषणों के अंतिम खुदरा दाम नए शिखर पर हैं। इस तेज रैली ने बाजार में यह नई बहस छेड़ दी है कि क्या सोना बहुत जल्द ₹1.70 लाख प्रति 10 ग्राम के जादुई और मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार कर जाएगा।

क्या ₹1.70 लाख के पार निकल जाएगा सोना? जानिए ग्लोबल एक्सपर्ट्स और ब्रोकरेज की राय

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के रिसर्च विश्लेषकों का मानना है कि सोने की इस तेजी को केवल एक अल्पकालिक (शॉर्ट-टर्म) उछाल मान लेना गलत होगा। वॉल स्ट्रीट के दिग्गज निवेश बैंकों जैसे जेपी मॉर्गन, मॉर्गन स्टेनली और सिटीग्रुप ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के मूल्य पूर्वानुमान को बढ़ाकर $4,500 से $6,000 प्रति औंस तक पहुंचने की संभावना जताई है।

घरेलू कमोडिटी विशेषज्ञों और प्रमुख ब्रोकरेज हाउसों के अनुसार, यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना $4,700 से $5,000 प्रति औंस के स्तर को छूता है और भारतीय रुपये की विनिमय दर में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोरी बनी रहती है, तो भारत में 24 कैरेट सोने का भाव बहुत आसानी से ₹1.70 लाख से ₹1.75 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर सकता है। कई विश्लेषक तो आगामी त्योहारी व शादियों के सीजन तक ही इस लक्ष्य के हासिल होने का अनुमान लगा रहे हैं।

सोने की आग में घी डालने वाले 5 बड़े वैश्विक और घरेलू कारण

सोने की कीमतों में आई इस एकतरफा तेजी के पीछे कई ठोस मैक्रो-इकोनॉमिक (समष्टि आर्थिक) और भू-राजनीतिक कारक सक्रिय हैं:

1. केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की आक्रामक और रिकॉर्ड खरीदारी

दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहे हैं। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड और तुर्की के केंद्रीय बैंकों ने पिछले कुछ महीनों में सैकड़ों टन सोने का अधिग्रहण किया है। केंद्रीय बैंकों की इस निरंतर खरीदारी ने बाजार में सोने की उपलब्धता को सीमित कर दिया है, जिससे कीमतों को मजबूत सपोर्ट मिल रहा है।

2. अमेरिका पर बढ़ता कर्ज और 'डी-डॉलराइजेशन' का दौर

अमेरिका का संघीय कर्ज तेजी से बढ़कर लगभग $39 ट्रिलियन के स्तर पर पहुंच चुका है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में अस्थिरता और सरकार द्वारा अपने बढ़ते कर्ज के प्रबंधन के लिए बॉन्ड बायबैक की नीतियों के चलते वैश्विक निवेशकों के मन में अमेरिकी डॉलर की दीर्घकालिक क्रय शक्ति को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में 'डी-डॉलराइजेशन' की गति तेज हुई है, जिसके चलते सॉवरेन वेल्थ फंड्स डॉलर-आधारित संपत्तियों से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्प के रूप में सोने में निवेश कर रहे हैं।

3. भू-राजनीतिक तनाव और सेफ-हेवन (Safe-Haven) मांग

मध्य पूर्व में जारी तनाव, लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता और विभिन्न वैश्विक आर्थिक प्रतिबंधों के चलते दुनिया भर के निवेशक इक्विटी और बॉन्ड मार्केट से हटकर पारंपरिक सुरक्षित निवेश यानी 'गोल्ड' की शरण ले रहे हैं। इतिहास गवाह है कि जब भी युद्ध, व्यापार विवाद या अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का माहौल बनता है, तब सोने की चमक सबसे अधिक बढ़ती है।

4. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद

अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित नरमी के संकेतों ने सोने को अतिरिक्त पंख दिए हैं। जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करते हैं, तो बैंकों में जमा पर मिलने वाला रिटर्न और बॉन्ड यील्ड घट जाती है। चूंकि सोना कोई निश्चित ब्याज नहीं देता (Non-yielding Asset), इसलिए ब्याज दरें घटने पर सोने को अपने पास रखने की अवसर लागत (Opportunity Cost) कम हो जाती है, जिससे संस्थागत निवेशकों की मांग में उछाल आता है।

5. गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) में भारी निवेश प्रवाह

वैश्विक स्तर पर फिजिकली-बैक्ड गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (Gold ETFs) में संस्थागत और खुदरा निवेशकों का इनफ्लो लगातार बढ़ रहा है। म्यूचुअल फंड हाउसों और पेंशन फंड्स द्वारा सोने के ईटीएफ यूनिट्स खरीदे जाने के कारण फंड मैनेजरों को भौतिक रूप से वॉल्ट्स में सोना जमा करना पड़ रहा है, जिससे प्रत्यक्ष मांग में भारी बढ़ोतरी हुई है।

भारतीय खरीदारों और आगामी त्योहारी सीजन पर क्या पड़ेगा असर?

भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है, जहां आभूषण केवल एक आभूषण नहीं बल्कि सामाजिक सुरक्षा और विरासत का प्रतीक माने जाते हैं। हालांकि, कीमतों में 17% की हालिया वृद्धि के कारण पारंपरिक आभूषण बाजार में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

ऊंचे भाव के कारण भौतिक आभूषणों की बिक्री में वजन (ट्रेज वॉल्यूम) के हिसाब से आंशिक गिरावट देखी जा रही है। मध्यम वर्ग के उपभोक्ता अब भारी आभूषणों के बजाय 18 कैरेट और 14 कैरेट के हल्के वजन वाले डिजाइनर आभूषणों या डायमंड-स्टडेड ज्वेलरी को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके साथ ही, पुराने सोने के आभूषणों को बदलकर नए आभूषण बनवाने (Gold Exchange) का चलन तेजी से बढ़ा है। हालांकि, आगामी करवा चौथ, धनतेरस, दिवाली और शादियों के सीजन में मांग फिर से बढ़ने की पूरी उम्मीद है, जो कीमतों को नीचे आने से रोकेगी।

गोल्ड ईटीएफ और डिजिटल गोल्ड की तरफ निवेशकों का बढ़ता झुकाव

ऊंची कीमतों और मेकिंग चार्ज के भारी खर्च से बचने के लिए भारतीय युवा और समझदार निवेशक अब फिजिकल गोल्ड के बजाय डिजिटल विकल्पों को चुन रहे हैं:

गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF): डीमैट खाते के जरिए शेयरों की तरह खरीदे जाने वाले गोल्ड ईटीएफ में 99.5% शुद्धता का बैकिंग होता है। इसमें न तो चोरी का डर होता है और न ही मेकिंग चार्ज कटता है।

डिजिटल गोल्ड (Digital Gold): विभिन्न फिनटेक प्लेटफॉर्म्स पर ₹100 से भी सोने में निवेश शुरू किया जा सकता है, जिसे कभी भी वर्तमान बाजार भाव पर बेचा या कॉइन में बदला जा सकता है।

म्यूचुअल फंड गोल्ड फंड ऑफ फंड्स (FoF): बिना डीमैट खाते के नियमित रूप से एसआईपी (SIP) के जरिए सोने में निवेश करने का यह एक लोकप्रिय जरिया बनकर उभरा है।

क्या मौजूदा उच्च स्तरों पर सोने में नया निवेश करना सही है?

यदि आप इस समय सोने में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो वित्तीय सलाहकार एकमुश्त (लम्पसम) भारी रकम लगाने के बजाय अनुशासित रणनीति अपनाने की सलाह देते हैं:

एसेट एलोकेशन का नियम: किसी भी निवेशक के कुल निवेश पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी 10% से 15% के बीच होनी चाहिए। यह पोर्टफोलियो को शेयर बाजार की भारी गिरावट और महंगाई के झटकों से हेजिंग (सुरक्षा) प्रदान करता है।

एसआईपी (SIP) मोड अपनाएं: मौजूदा उच्च स्तरों पर एक साथ सारा पैसा लगाने के बजाय गोल्ड ईटीएफ या गोल्ड फंड में हर महीने एक निश्चित रकम की एसआईपी शुरू करें। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव में कीमतों का औसत (Rupee Cost Averaging) लाभ मिलेगा।

अल्पकालिक करेक्शन के लिए तैयार रहें: किसी भी कमोडिटी में एकतरफा तेजी के बाद मुनाफावसूली के चलते 3% से 5% की तकनीकी गिरावट (Correction) आना स्वाभाविक है। लंबी अवधि के निवेशकों को ऐसी किसी भी गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देखना चाहिए।

सोने के मौजूदा वैश्विक फंडामेंटल्स, केंद्रीय बैंकों की अटूट मांग और डॉलर के गिरते वर्चस्व को देखते हुए यह स्पष्ट है कि पीली धातु की चमक आगे भी बरकरार रहने वाली है। यदि वर्तमान आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियां इसी तरह बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में सोने का भाव ₹1.70 लाख प्रति 10 ग्राम के नए ऐतिहासिक शिखर को छू ले, तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।