शादी में क्यों जरूरी मानी जाती है भखरा सिन्दूर की रस्म? जानिए इसका गहरा अर्थ
India News Live,Digital Desk : बिहार के मिथिलांचल और आसपास के कई क्षेत्रों में शादी के समय निभाई जाने वाली भखरा सिन्दूर की रस्म बहुत खास मानी जाती है। यह केवल परंपरा भर नहीं, बल्कि नवविवाहित जीवन में सौभाग्य, प्रेम और समृद्धि का संदेश देने वाला पवित्र विधान भी है। सदियों से चली आ रही यह प्रथा आज भी उतनी ही आस्था और सम्मान के साथ निभाई जाती है।
आइए जानते हैं कि भखरा सिन्दूर क्या है, इसका उपयोग कैसे होता है और यह इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है।
भखरा सिन्दूर क्या होता है?
भखरा सिन्दूर मुख्य रूप से बिहार, खासकर मिथिलांचल में प्रचलित विवाह रस्म का हिस्सा है। यह सिर्फ सिंदूर का रंग नहीं, बल्कि सिंदूरदान की एक अलग और खास विधि है, जो इस पवित्र क्षण को और भी अर्थपूर्ण बना देती है।
बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में शादी के दौरान सिर्फ लाल नहीं, बल्कि नारंगी और गुलाबी रंग के सिन्दूर का उपयोग किया जाता है। यही सिन्दूर भखरा सिन्दूर कहलाता है। यहां की महिलाएं शुभ अवसरों पर भी इसी सिन्दूर का प्रयोग करती हैं।
नारंगी/पीला सिन्दूर – इसे ऊर्जा, शक्ति और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
गुलाबी सिन्दूर – यह रंग प्रेम, मिठास और उत्सव का प्रतीक है, जो वैवाहिक जीवन के मधुर भावों को दर्शाता है।
इन दोनों रंगों का उपयोग यह संकेत देता है कि दुल्हन के जीवन में प्रेम, समृद्धि और शुभता बनी रहे।
भखरा शब्द का अर्थ
भखरा शब्द केवल सिन्दूर के रंग से नहीं जुड़ा है। यह उस विशेष पात्र का नाम भी है जिसमें सिन्दूर रखा जाता है। इस पात्र के बीच में एक छोटा सा छिद्र होता है।
शादी की रस्म के दौरान वर इसी पात्र के छिद्र के माध्यम से सिन्दूर उठाकर वधू की मांग में भरता है। इसी विशेष विधि के कारण इसे भखरा सिन्दूर कहा जाता है।
भखरा सिन्दूर रस्म का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
भखरा सिन्दूर की रस्म को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसके पीछे कई धार्मिक और सामाजिक मान्यताएं जुड़ी हैं।
1. सौभाग्य और स्थिरता का प्रतीक
मान्यता है कि छिद्र वाले पात्र से भरा गया सिन्दूर दांपत्य जीवन को मजबूत और स्थिर बनाता है। कहा जाता है कि यह विधि किसी भी नकारात्मक प्रभाव को दूर रखती है।
2. देवी की कृपा का आह्वान
सिन्दूर को देवी पार्वती और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद माना जाता है। विशेष विधि से सिन्दूर भरने पर नवदंपत्ति पर लक्ष्मी-कृपा बनी रहती है और घर में समृद्धि आती है।
3. वैवाहिक बंधन की पवित्रता
यह रस्म दंपत्ति के रिश्ते में पवित्रता, विश्वास और गोपनीयता का भाव जगाती है। इस विधि को दांपत्य जीवन के शुभारंभ का प्रतीक माना जाता है।