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July 28 2026 04:24 pm

घर में मंदिर किस दिशा में होना चाहिए? जानिए वास्तु के सरल और जरूरी नियम

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India News Live,Digital Desk : वास्तु शास्त्र में दिशाओं को बहुत महत्व दिया गया है। माना जाता है कि घर में सही दिशा और सही व्यवस्थाओं का पालन करने से सुख-शांति बनी रहती है और जीवन में अनावश्यक बाधाएं नहीं आतीं। घर में मंदिर भी एक ऐसी ही जगह है, जहां सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सबसे ज्यादा माना जाता है। इसलिए मंदिर किस दिशा में होना चाहिए और उसे कैसे स्थापित करना चाहिए, इसके कुछ नियम बताए गए हैं।

आइए इन्हें सरल भाषा में समझते हैं।

मंदिर किस दिशा में रखें?

वास्तु शास्त्र के अनुसार पूर्व दिशा मंदिर के लिए सबसे शुभ मानी जाती है। कहा जाता है कि इस दिशा में मंदिर होने पर घर में सकारात्मकता बनी रहती है और पूजा का फल भी अधिक मिलता है।

इसके अलावा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) भी मंदिर स्थापित करने के लिए बहुत अच्छा स्थान माना जाता है। यह दिशा आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र मानी जाती है।

मंदिर कैसा होना चाहिए?

घर में मंदिर ऐसी जगह बनाएं जहां पूर्ण शांति हो और आसपास गंदगी या बाथरूम न हो।
मंदिर लकड़ी या पत्थर का बनवाना शुभ माना जाता है। ध्यान रखें कि मंदिर की जगह हमेशा साफ-सुथरी रहे।

मंदिर कहां नहीं होना चाहिए?

सीढ़ियों के नीचे मंदिर बनाना वास्तु में अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में तनाव और परेशानियां बढ़ सकती हैं।

बेडरूम में मंदिर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि पूजा का स्थान शांत और पवित्र माना जाता है, जबकि बेडरूम निजी स्थान होता है।

मंदिर रसोई के बिल्कुल पास भी न हो, ऐसा माना जाता है कि इससे मंदिर की पवित्रता प्रभावित होती है।

मंदिर का रंग कैसा होना चाहिए?

मंदिर में हल्के और शांत रंग शुभ माने जाते हैं।
आप मंदिर को:

सफेद

पीला

हल्का लाल

इन रंगों में बनवा सकते हैं। ये रंग पवित्रता, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माने जाते हैं।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

पूजा में चढ़ाए गए फूल सूखने पर मंदिर में न रखें। सूखे फूल वास्तु दोष उत्पन्न करते हैं।

सूखे फूलों को किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें या किसी पौधे के नीचे डाल दें।

देवी-देवताओं की प्रतिमा स्थापित करते समय उनके नीचे लाल या पीला कपड़ा जरूर बिछाएं।

मंदिर में ज्यादा मूर्तियां रखने से बचें, इससे ऊर्जा अस्थिर हो सकती है।