ममता बनर्जी के लिए संकट के बीच राहत की खबर, 20 बागी सांसदों वाला दावा झूठा? सांसद प्रतिमा मंडल ने खोली पोल

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद से ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मचे भीषण घमासान के बीच आखिरकार एक राहत भरी खबर सामने आई है। पार्टी के 50 से अधिक विधायकों के टूटने के बाद लोकसभा सांसदों के भी बागी होने की खबरों से घिरी ममता बनर्जी के लिए जयनगर से टीएमसी सांसद प्रतिमा मंडल (Pratima Mondal) ढाल बनकर खड़ी हो गई हैं।

प्रतिमा मंडल ने बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार के उस दावे को पूरी तरह खारिज और फर्जी करार दिया है, जिसमें कहा गया था कि टीएमसी के 20 लोकसभा सांसदों ने एनडीए (NDA) को समर्थन देने वाले पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

"लेटर मीडिया को क्यों नहीं दिखाते?"— प्रतिमा मंडल ने बागी गुट को ललकारा

सांसद प्रतिमा मंडल ने कोलकाता में समाचार एजेंसी 'एएनआई' (ANI) से विशेष बातचीत के दौरान अपने बागी होने की खबरों पर बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने बागी धड़े को खुली चुनौती देते हुए कहा:

सांसद प्रतिमा मंडल का तीखा बयान: "एनडीए को समर्थन देने वाले पत्र पर मेरे हस्ताक्षर होने की खबरें पूरी तरह से झूठी और मनगढ़ंत हैं। मुझे जयनगर की जनता ने अपना आशीर्वाद देकर चुनकर भेजा है। मैं चुनाव नतीजों (4 तारीख) के बाद से दिल्ली गई ही नहीं हूं, बल्कि लगातार कोलकाता में ही मौजूद हूं। जो लोग यह अफवाह फैला रहे हैं कि उनके पास 20 सांसदों का समर्थन है, मैं उन्हें चुनौती देती हूं कि वे सभी सांसदों के हस्ताक्षर वाला वह लेटर मीडिया के सामने सार्वजनिक क्यों नहीं करते? क्यों उस पत्र को दिखाकर साबित नहीं करते कि उसमें मेरा नाम है या नहीं? मेरे क्षेत्र की जनता को धोखा मत दीजिए। मैं जनता के जनादेश का सम्मान करती हूं और साल 2029 तक तृणमूल कांग्रेस में ही रहूंगी।"

शत्रुघ्न सिन्हा भी आए ममता के समर्थन में

प्रतिमा मंडल के अलावा आसनसोल से टीएमसी सांसद और दिग्गज अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने भी इस मुश्किल घड़ी में ममता बनर्जी का साथ छोड़ने की अटकलों पर विराम लगा दिया है। शत्रुघ्न सिन्हा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब वे राजनीतिक रूप से मुश्किल दौर से गुजर रहे थे, तब ममता बनर्जी ने उनका हाथ थामा था। इसलिए आज उनका यह नैतिक कर्तव्य है कि वे संकट के इस समय में ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़े रहें।

क्या है बागी गुट की नेता काकोली घोष का गणित?

लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 28 सांसद हैं। भारतीय संविधान के दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत अयोग्यता से बचने के लिए किसी भी बागी गुट को पार्टी के कुल सांसदों के कम से कम दो-तिहाई (2/3) यानी 19 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है।

बागी गुट का दावा: काकोली घोष दस्तीदार का दावा है कि उनके पास 20 सांसदों का समर्थन है, जिसमें से 18 ने प्रत्यक्ष रूप से और 2 ने ऑनलाइन माध्यम से पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

टीएमसी सिंबल पर नजर: यदि काकोली घोष का यह दावा सच साबित होता है, तो बागी गुट लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सामने टीएमसी के नाम और आधिकारिक चुनाव चिन्ह (सिंबल) पर भी अपना दावा ठोक सकता है। हालांकि, प्रतिमा मंडल के इस खुलासे के बाद अब बागी गुट के दावों पर सवालिया निशान लग गए हैं।

राज्यसभा में ममता बनर्जी को लगा 'तिहरा झटका'

एक तरफ जहां लोकसभा से ममता बनर्जी के लिए राहत की खबर आई, वहीं दूसरी तरफ राज्यसभा में गुरुवार को उन्हें एक और बड़ा झटका लगा। टीएमसी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने संसद की सदस्यता और पार्टी से इस्तीफा दे दिया। सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव के बाद इस हफ्ते इस्तीफा देने वाले बराइक तीसरे टीएमसी सांसद हैं।

प्रकाश चिक बराइक का बयान: इस्तीफा देने के बाद दिल्ली में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के आवास के बाहर बराइक ने कहा, "पश्चिम बंगाल की जनता ने स्पष्ट रूप से भाजपा के पक्ष में जनादेश दिया है। तृणमूल कांग्रेस को अब जनता का समर्थन हासिल नहीं है। मैं बंगाल की जनता की भावना का सम्मान करते हुए इस्तीफा दे रहा हूं।"

अन्य इस्तीफे: इससे पहले सोमवार को वरिष्ठ सांसद सुखेंदु शेखर राय ने नेतृत्व से मतभेदों के चलते और बुधवार को सुष्मिता देव ने इस्तीफा देकर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से मुलाकात की थी, जिससे उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हैं। इसके साथ ही यादवपुर से सांसद सायोनी घोष और कोलकाता दक्षिण से सांसद माला रॉय के भी बागी गुट में शामिल होने की अपुष्ट खबरें हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रतिमा मंडल के इस आक्रामक यू-टर्न के बाद अब दिल्ली से लेकर कोलकाता तक की सियासत गरमा गई है और काकोली घोष के 20 सांसदों वाले दावे की कानूनी और राजनीतिक परीक्षा होनी अभी बाकी है।