जोमैटो की 'वसूली' से बचने का वायरल 'जुगाड़': क्या सच में काम करती है यह ट्रिक? जानें पूरा सच
India News Live,Digital Desk : सोशल मीडिया पर इन दिनों एक अजीबोगरीब 'देसी जुगाड़' तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लेकर दावा किया जा रहा है कि इसके जरिए जोमैटो (Zomato) के प्लेटफॉर्म शुल्क और रेस्तरां कमीशन से बचा जा सकता है। प्रेम सोनी नामक यूजर द्वारा एक्स (X) पर साझा की गई यह पोस्ट फूड डिलीवरी बिजनेस के मॉडल पर बहस छेड़ चुकी है। आइए जानते हैं क्या है यह ट्रिक और इसके पीछे की हकीकत।
क्या है यह 'वायरल ट्रिक'?
वायरल पोस्ट के अनुसार, ग्राहक एक छोटा सा ऑर्डर ऐप के जरिए करता है (जैसे मात्र 40 रुपये की एक रोटी)। इसके तुरंत बाद, ग्राहक सीधे रेस्तरां को फोन या व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क करके अपना मुख्य और बड़ा ऑर्डर (जैसे पनीर बटर मसाला, दाल मखनी आदि) देता है। ग्राहक रेस्तरां को निर्देश देता है कि इस बड़े ऑर्डर को उसी छोटे ऑर्डर के पैकेट के साथ पैक कर दिया जाए। चूंकि डिलीवरी बॉय को ऐप पर केवल वही छोटा ऑर्डर दिखता है, इसलिए वह पूरा पैकेट बिना किसी संशय के ग्राहक तक पहुंचा देता है।
इससे किसे और क्या फायदा होता है?
ग्राहक को लाभ: ग्राहक को कोई प्लेटफॉर्म फीस या अन्य सर्विस चार्ज नहीं देना पड़ता।
रेस्तरां को लाभ: रेस्तरां जोमैटो को दिए जाने वाले 25-30% के कमीशन को बचाने में सफल रहता है, जिससे उनका मुनाफा बढ़ जाता है।
डिलीवरी: जोमैटो की भूमिका केवल एक 'कूरियर सर्विस' की तरह रह जाती है, जबकि उसे ऑर्डर का पूरा कमीशन नहीं मिल पाता।
क्या यह सुरक्षित और नैतिक है?
हालांकि यह तरीका सुनने में फायदे का सौदा लग सकता है, लेकिन इसके गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं:
रेस्तरां पर कार्रवाई: यदि जोमैटो को पता चलता है कि कोई रेस्तरां इस तरह के अनैतिक तरीके अपना रहा है, तो उसे प्लेटफॉर्म से हमेशा के लिए बैन किया जा सकता है।
डिलीवरी में जोखिम: यदि पूरा ऑर्डर डिलीवरी बैग में है और कोई बड़ी घटना (जैसे ऑर्डर का गिरना या गलत होना) होती है, तो कंपनी की जवाबदेही नहीं होगी क्योंकि ऐप पर वह ऑर्डर दर्ज ही नहीं था।
अर्थव्यवस्था पर असर: जानकारों का कहना है कि अगर यह तरीका बड़े पैमाने पर फैला, तो फूड डिलीवरी कंपनियों की कमाई का जरिया खत्म हो सकता है, जिससे डिलीवरी चार्ज बढ़ सकते हैं।
जोमैटो का रुख और अतीत
यह कोई पहली बार नहीं है जब जोमैटो के सिस्टम में खामियों की चर्चा हो रही है। जनवरी 2023 में भी 'कैश ऑन डिलीवरी' (COD) घोटाले का मामला सामने आया था, जिसे कंपनी ने खुद स्वीकार किया था और इसे ठीक करने का वादा किया था। फिलहाल, इस नई वायरल ट्रिक पर जोमैटो की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग मांग कर रहे हैं कि कंपनी 'फोटो आधारित डिलीवरी कन्फर्मेशन' या 'ऑर्डर इनवॉइस ऑडिट' जैसे कड़े कदम उठाए ताकि ऐसे सिस्टम का दुरुपयोग रोका जा सके।