मध्य प्रदेश से राज्यसभा जीतते ही चमकी किस्मत, मोदी कैबिनेट में शामिल हो सकते हैं पंजाब के दिग्गज तरुण चुघ; राघव चड्ढा को लेकर भी बड़ा दावा
देश के राजनीतिक गलियारों से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। इस महीने के आखिर में या जुलाई 2026 की शुरुआत में संभावित मोदी कैबिनेट के विस्तार (Modi Cabinet Reshuffle) को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस कैबिनेट फेरबदल में पंजाब की सियासत से जुड़े दो बड़े चेहरों को केंद्र सरकार में बड़ी और अहम जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।
इस रेस में सबसे पहला और मजबूत नाम भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ (Tarun Chugh) का उभरकर सामने आया है, जिन्होंने गुरुवार 11 जून 2026 को मध्य प्रदेश से राज्यसभा का चुनाव निर्विरोध जीत लिया है। सूत्रों के मुताबिक, पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों के समीकरणों को साधने के लिए पीएम मोदी अपने मंत्रिमंडल में तरुण चुघ को मंत्री पद की शपथ दिला सकते हैं।
मध्य प्रदेश में कैसे तय हुआ तरुण चुघ की जीत का रास्ता?
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की सीटों के लिए हुए द्विवार्षिक चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जबरदस्त राजनीतिक चातुर्य दिखाते हुए अपने तीनों उम्मीदवारों को निर्विरोध जिताने में सफलता हासिल की है।
निर्विरोध चुने गए उम्मीदवार: मध्य प्रदेश के निर्वाचन अधिकारी ने गुरुवार को भाजपा के तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को आधिकारिक रूप से विजयी घोषित कर दिया।
कांग्रेस का पत्ता ऐसे साफ हुआ: इस चुनाव में भाजपा के लिए दो सीटों पर जीत तय थी, लेकिन तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को उतारकर भाजपा ने लड़ाई को रोचक बना दिया था। कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा था, लेकिन शपथ पत्र (Affidavit) में जरूरी जानकारी छिपाने के तकनीकी आधार पर चुनाव आयोग ने उनका नामांकन ही निरस्त (Reject) कर दिया, जिससे भाजपा के तीनों प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिए गए।
कौन हैं तरुण चुघ? बूथ कार्यकर्ता से केंद्रीय राजनीति तक का सफर
तरुण चुघ को पंजाब भाजपा का सबसे मजबूत स्तंभ और एक कुशल संगठनकर्ता माना जाता है। उनके राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो उनकी प्रोफाइल बेहद कद्दावर रही है:
RSS और छात्र राजनीति से शुरुआत: पंजाब के अमृतसर (Amritsar) के रहने वाले तरुण चुघ ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवक के रूप में की थी। इसके बाद वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) में सक्रिय रहे।
संगठन में मजबूत पकड़: चुघ ने भाजपा में एक बेहद जमीनी बूथ स्तर के कार्यकर्ता से लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक का सफर अपनी मेहनत से तय किया है। वर्तमान में वे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव जैसी बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
राज्यों के प्रभारी: वे जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और तेलंगाना जैसे राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण राज्यों में भाजपा के केंद्रीय प्रभारी (In-charge) के रूप में काम कर चुके हैं और वहां संगठन को मजबूत करने में उनका बड़ा हाथ रहा है।
रवनीत सिंह बिट्टू की जगह ले सकते हैं चुघ
सूत्रों के हवाले से खबर है कि वर्तमान समय में केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री पद का चेहरा या बड़ी सांगठनिक जिम्मेदारी देकर मैदान में उतारा जा सकता है। ऐसे में बिट्टू को मोदी कैबिनेट से बाहर किया जा सकता है और पंजाब के कोटे से उनकी जगह तरुण चुघ को कैबिनेट में शामिल कर रेल मंत्रालय या कोई अन्य महत्वपूर्ण विभाग सौंपा जा सकता है।
क्या राघव चड्ढा की भी होने जा रही है मोदी कैबिनेट में एंट्री?
इस कैबिनेट विस्तार से जुड़ी एक और बेहद हैरान करने वाली अटकल राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। सूत्रों का दावा है कि आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chaddah), जो कुछ समय पहले ही भाजपा में शामिल हुए हैं, उन्हें भी मोदी सरकार में मंत्री बनाया जा सकता है।
वित्त राज्य मंत्री बनने के कयास: वर्तमान केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को हाल ही में उत्तर प्रदेश भाजपा का नया अध्यक्ष (UP BJP Chief) नियुक्त किया गया है। 'एक व्यक्ति, एक पद' के सिद्धांत के तहत पंकज चौधरी को कैबिनेट से मुक्त किया जा सकता है।
CA होने का मिलेगा फायदा: चूंकि राघव चड्ढा पेशे से एक क्वालिफाइड चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) हैं और देश की वित्तीय और आर्थिक नीतियों की गहरी समझ रखते हैं, साथ ही वे युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। ऐसे में भाजपा पंजाब के शहरी और युवा मतदाताओं को लुभाने के लिए राघव चड्ढा को नया वित्त राज्य मंत्री (Minister of State for Finance) नियुक्त कर सकती है।
हालांकि, इन दोनों ही नियुक्तियों को लेकर अभी तक प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) या भाजपा आलाकमान की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन संसद भवन के गलियारों में इस फेरबदल को लेकर हलचलें चरम पर हैं।