जब आए भयंकर भूकंप से एक तरफ खिसक गया पूरा जापान, वैज्ञानिकों ने अब खोला 15 साल पुराना बड़ा रहस्य
कुदरत के आगे इंसान कितना बेबस है, इसका अंदाजा समय-समय पर आने वाली आपदाओं से लगाया जा सकता है. लेकिन कभी-कभी ये आपदाएं ऐसी घटनाओं को अंजाम देती हैं जो विज्ञान जगत को भी हैरत में डाल देती हैं. ऐसा ही एक हैरान करने वाला वैज्ञानिक खुलासा जापान (Japan Earthquake 2011) को लेकर हुआ है. साल 2011 में मार्च के महीने में जापान ने एक ऐसा विनाशकारी दर्द सहा था, जिसने करीब 20 हजार लोगों की जान ले ली थी. लेकिन अब नई रिसर्च में सामने आया है कि इस 9 तीव्रता वाले महाभूकंप ने न सिर्फ तबाही मचाई, बल्कि दुनिया के नक्शे पर जापान की भौगोलिक स्थिति को ही हमेशा के लिए बदल दिया.
भूकंप के ठीक 16 मिनट बाद खिसक गया पूरा देश!
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2011 में आए इस भयानक भूकंप के ठीक 16 मिनट बाद जापान में लगे जीपीएस (GPS) स्टेशन्स ने कुछ ऐसा रिकॉर्ड किया जिसने वैज्ञानिकों के होश उड़ा दिए. डेटा से पता चला कि पूरा देश एक साथ पूर्व की दिशा में करीब 5 से 6 मिलीमीटर आगे खिसक गया है.
हैरानी की बात यह थी कि जमीन में यह अतिरिक्त हलचल पूरे देश में एक साथ हुई थी, जो कि भूकंप के बाद आने वाले सामान्य झटकों (Aftershocks) जैसी बिल्कुल नहीं थी. कई सालों तक वैज्ञानिक इस बात को लेकर माथापच्ची करते रहे कि आखिर बिना किसी तात्कालिक बड़े झटके के पूरा देश एक साथ कैसे शिफ्ट हो गया. अब सालों के डेटा और रिसर्च के बाद इस बड़े रहस्य से पर्दा उठ गया है.
पृथ्वी के कोर (Core) से टकराकर लौटीं तरंगों ने किया कमाल
इस रहस्य को सुलझाने के लिए शिकागो विश्वविद्यालय (University of Chicago) के शोधकर्ताओं ने सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए बारीकी से डेटा जुटाया. स्टडी में सामने आया कि जब 2011 में 9 तीव्रता का भूकंप आया, तो फॉल्ट लाइन (दरार) के पास चट्टानों के बड़े ब्लॉक अचानक एक-दूसरे के आगे फिसल गए. इस भीषण हलचल से जो शक्तिशाली भूकंपीय तरंगें (Seismic Waves) निकलीं, वे पृथ्वी के भीतर गहराई में सीधे पृथ्वी के केंद्र यानी कोर (Core) तक चली गईं.
इसके बाद ये तरंगें पृथ्वी के कोर से टकराकर वापस सतह की ओर लौट आईं. लौटते वक्त इन तरंगों ने जापान के ठीक नीचे मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों (Tectonic Plates) की सीमाओं को दोबारा सक्रिय (Reactivate) कर दिया, जिससे जमीन के अंदर एक अतिरिक्त और एकसमान हलचल पैदा हुई और पूरा देश पूर्व की तरफ खिसक गया.
'जियो नेट' (GEONET) की मदद से वैज्ञानिकों को मिली सफलता
जापान ने अपनी जमीन की हर हलचल पर नजर रखने के लिए 'जियो नेट' (GEONET) नाम का एक विशाल और आधुनिक नेटवर्क बना रखा है. इस नेटवर्क के तहत पूरे देश में 1,200 से अधिक हाई-टेक जीपीएस स्टेशन लगाए गए हैं. इन्हीं स्टेशन्स के सटीक डेटा की बदौलत वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचने में कामयाब रहे.
इस बड़े खुलासे ने वैज्ञानिकों को एक नई राह दिखाई है. अब यह साफ हो गया है कि पृथ्वी के कोर से टकराकर लौटने वाली तरंगें मुख्य भूकंपीय क्षेत्र को दोबारा एक्टिव कर सकती हैं. यह नई खोज भविष्य में जापान जैसे संवेदनशील और भूकंपीय खतरों वाले इलाकों में आपदा का नए सिरे से सटीक आकलन करने और सुरक्षा पुख्ता करने में गेम-चेंजर साबित होगी.