BREAKING:
August 19 2026 09:43 pm

बॉलीवुड के 'बैड बॉय' जिन्होंने विलेन बनकर लूटी महफिल: जब इमरान हाशमी के नेगेटिव किरदारों पर फिदा हुआ सिनेमा

Post

हिंदी सिनेमा में पारंपरिक तौर पर नायक यानी हीरो की छवि हमेशा से दूध की धुली, आदर्शवादी और समाज के तय नियमों पर चलने वाले किरदार की रही है। लेकिन 2000 के दशक की शुरुआत में एक ऐसे अभिनेता ने कदम रखा जिसने अच्छाई और बुराई के बीच की इस लकीर को पूरी तरह धुंधला कर दिया। वह नाम है इमरान हाशमी। अपनी पहली ही कुछ फिल्मों से 'सीरियल किसर' का तमगा पाने वाले इमरान ने बहुत तेजी से खुद को एक ऐसे बहुमुखी कलाकार के रूप में स्थापित किया, जो जब पर्दे पर नकारात्मक या ग्रे शेड का किरदार निभाता है, तो दर्शक उससे नफरत करने के बजाय उसकी अदाकारी और स्वैग के मुरीद हो जाते हैं। बॉक्स ऑफिस का गणित गवाह है कि इमरान हाशमी ने जब-जब खलनायकी या एंटी-हीरो की राह चुनी, सिनेमाघरों में दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी और फिल्में व्यावसायिक रूप से सुपरहिट साबित हुईं।

'मर्डर' (2004) – जब सनी के जुनूनी और खतरनाक इश्क ने हिला दिया था बॉक्स ऑफिस

इमरान हाशमी के करियर का पहला बड़ा गेम-चेंजर मोड़ अनुराग बसु निर्देशित रोमांटिक थ्रिलर 'मर्डर' थी। इस फिल्म में इमरान ने 'सनी' का किरदार निभाया था, जो एक शादीशुदा महिला की जिंदगी में आकर उसके अतीत और वर्तमान दोनों को तबाह करने पर आमादा हो जाता है।

सनी का किरदार विशुद्ध रूप से एक जुनूनी, ब्लैकमेलर और खतरनाक प्रेमी का था, जिसे पारंपरिक सिनेमा का विलेन कहा जाता। लेकिन इमरान ने उस किरदार में जो गहराई, कच्चा आकर्षण और भावनात्मक शिद्दत डाली, उसने दर्शकों को स्तब्ध कर दिया। फिल्म के चार्टबस्टर गानों—खासकर 'भीगे होंठ तेरे' और 'कहो ना कहो'—ने युवाओं में ऐसा क्रेज पैदा किया कि फिल्म कम बजट में बनने के बावजूद साल 2004 की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शामिल हो गई। 'मर्डर' ने यह साबित कर दिया कि इमरान हाशमी पर्दे पर गलत काम करते हुए भी दर्शकों को अपनी ओर खींचने का हुनर बखूबी जानते हैं।

'गैंगस्टर' और 'जन्नत' – धोखेबाज प्रेमी से लेकर मैच फिक्सर तक का करिश्माई सफर

साल 2006 में आई फिल्म 'गैंगस्टर: अ लव स्टोरी' में इमरान हाशमी का किरदार 'आकाश' शुरुआत में एक बेहद मासूम और केयरिंग रेस्टोरेंट सिंगर के रूप में सामने आता है, लेकिन क्लाइमैक्स में जब उसका असली चेहरा एक चालाक, निर्दयी और अवसरवादी अंडरकवर एजेंट के रूप में खुलता है जो प्यार का नाटक करके एक गैंगस्टर को फंसाता है, तो थिएटर में सन्नाटा छा जाता है। अपने इस धोखेबाज किरदार के बावजूद इमरान ने फिल्मफेयर में 'बेस्ट परफॉर्मेंस इन अ नेगेटिव रोल' का नामांकन हासिल किया और फिल्म को क्रिटिकल व कमर्शियल दोनों स्तरों पर बड़ी सफलता दिलाई।

इसके बाद साल 2008 में आई 'जन्नत', जिसने इमरान हाशमी को बॉक्स ऑफिस का बेताज बादशाह बना दिया। 'जन्नत' में उनका किरदार अर्जुन दीक्षित एक छोटे-मोटे ताश के जुआरी से अंतरराष्ट्रीय मैच फिक्सिंग और सट्टेबाजी के काले साम्राज्य का बेताज बादशाह बनता है। अर्जुन का मकसद सिर्फ रातों-रात अमीर बनना और अपनी प्रेमिका को दुनिया की हर ऐशो-आराम देना था। लालच, अपराध और गलत रास्ते पर चलने के बावजूद अर्जुन के किरदार की मासूमियत और उसके दर्द को इमरान ने इतनी खूबसूरती से उभारा कि क्लाइमैक्स में जब उसे गोली लगती है, तो हर दर्शक की आंखें नम हो जाती हैं। 'जन्नत' ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्डतोड़ कमाई की और आज भी इसे बॉलीवुड की कल्ट क्लासिक एंटी-हीरो फिल्मों में गिना जाता है।

'वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई' (2010) – शोएब खान का बेखौफ अंडरवर्ल्ड अवतार

अगर इमरान हाशमी के करियर के सबसे बेहतरीन और असरदार नकारात्मक किरदारों की बात की जाए, तो मिलन लूथरिया की 'वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई' का नाम सबसे ऊपर आता है। इस फिल्म में इमरान ने 'शोएब खान' का किरदार निभाया था, जो अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के शुरुआती दिनों से प्रेरित था।

अजय देवगन के परिपक्व और सिद्धांतवादी गैंगस्टर 'सुल्तान मिर्जा' के सामने खड़े होकर एक महत्वाकांक्षी, क्रूर, तेजतर्रार और बेखौफ युवा गैंगस्टर की भूमिका निभाना बेहद चुनौतीपूर्ण था। लेकिन इमरान ने अपने अंदाज, बॉडी लैंग्वेज और संवाद अदायगी से पर्दे पर समां बांध दिया। उनका मशहूर डायलॉग—"रास्ते की परवाह करूंगा तो मंजिल बुरा मान जाएगी"—हर युवा की जुबान पर चढ़ गया। अपने गुरु को ही धोखा देकर मुंबई के अंडरवर्ल्ड पर कब्जा करने वाले इस नकारात्मक किरदार के लिए इमरान को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के कई प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स और नॉमिनेशन मिले। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई और इसने इमरान के स्टारडम को एक नई ऊंचाई दी।

'व्हाई चीट इंडिया' से 'टाइगर 3' तक – खलनायकी के नए पैमाने और ग्लोबल विलेन का अंदाज

अपने करियर के अगले दौर में भी इमरान हाशमी ने नकारात्मक और ग्रे किरदारों के साथ लगातार नए प्रयोग किए। 2019 में आई फिल्म 'व्हाई चीट इंडिया' में उन्होंने राकेश सिंह का किरदार निभाया, जो भारत की शिक्षा प्रणाली में फर्जीवाड़े, नकल माफिया और सीट बेचने के रैकेट का मास्टरमाइंड था। इमरान ने इस भ्रष्ट और शातिर दिमाग वाले किरदार को इतने सहज अंदाज में निभाया कि दर्शक व्यवस्था की खामियों और उनके किरदार के तर्क के बीच उलझ कर रह गए।

वहीं साल 2023 में यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की मेगा-बजट एक्शन फिल्म 'टाइगर 3' में इमरान हाशमी ने सलमान खान और कटरीना कैफ के सामने मुख्य खलनायक 'आतिश रहमान' की भूमिका निभाई। एक पूर्व आईएसआई डिप्टी डायरेक्टर के रूप में आतिश का किरदार बदले की आग में जलने वाला, बेहद शातिर, बौद्धिक और निर्दयी था। सलमान खान जैसे विशालकाय एक्शन स्टार के सामने इमरान हाशमी ने अपनी स्क्रीन प्रेजेंस, शांत मगर खूंखार अंदाज और दमदार डायलॉग्स से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। 'टाइगर 3' ने दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर 450 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया और समीक्षकों ने माना कि इमरान का विलेन अवतार फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी में से एक था।

क्यों दर्शक आज भी इमरान के नेगेटिव रोल्स के दीवाने हैं?

इमरान हाशमी के नकारात्मक किरदारों की सबसे बड़ी खासियत यह रही है कि वे कभी एकतरफा या 'कार्टूनिश विलेन' नहीं लगे। वे हमेशा इंसानी कमजोरियों, बेतहाशा महत्वाकांक्षा, प्यार में पागलपन या व्यवस्था के खिलाफ बगावत से उपजे किरदार रहे हैं।

इमरान अपने किरदारों में एक खास तरह की मानवीय गहराई और बेबाक स्वैग जोड़ देते हैं, जिससे दर्शक स्क्रीन पर उनके गलत फैसलों को देखते हुए भी उनसे पूरी तरह नफरत नहीं कर पाते। इसके साथ ही उनकी फिल्मों का सदाबहार संगीत और उनकी सधी हुई संवाद अदायगी इन नेगेटिव किरदारों को हमेशा के लिए यादगार बना देती है। बॉलीवुड के इतिहास में बहुत कम ऐसे अभिनेता हुए हैं जिन्होंने खलनायकी और ग्रे शेड्स को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाकर दर्शकों के दिलों पर राज किया हो, और इमरान हाशमी निस्संदेह उस फेहरिस्त में सबसे आगे खड़े नजर आते हैं।