वरदा विनायक चतुर्थी पर बुधवार का दुर्लभ महासंयोग; इस चमत्कारी स्तोत्र का पाठ दूर करेगा भयंकर आर्थिक तंगी
India News Live,Digital Desk : सनातन धर्म में अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास को भगवान श्री हरि विष्णु का सबसे प्रिय और पवित्र महीना माना जाता है। ज्योतिषीय और धार्मिक गणना के अनुसार, इस पुण्यकाल में किए जाने वाले व्रत, दान और उपासना का फल सामान्य दिनों की तुलना में सैकड़ों गुना अधिक फलदायी होता है। ऐसे में जब इस पावन पुरुषोत्तम मास के दौरान भगवान गणेश को समर्पित 'वरदा विनायक चतुर्थी' का त्योहार आता है, तो इसका आध्यात्मिक महत्व अनंत गुना बढ़ जाता है।
इस साल यह कल्याणकारी वरदा विनायक चतुर्थी कल यानी 20 मई 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। विशेष बात यह है कि बुधवार का दिन स्वयं रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवान गणेश जी को समर्पित है। ऐसे में बुधवार के दिन अधिकमास की चतुर्थी का आना एक अत्यंत दुर्लभ, शक्तिशाली और अद्भुत संयोग का निर्माण कर रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार, इस महासंयोग में विघ्नहर्ता की आराधना करने से जीवन के बड़े से बड़े संकट और आर्थिक तंगी पल भर में कपूर की तरह उड़ जाते हैं।
अधिकमास में वरदा चतुर्थी का पौराणिक व विशेष महत्व
भविष्य पुराण और स्कंद पुराण में स्पष्ट रूप से वर्णित है कि अधिकमास में पड़ने वाली गणेश चतुर्थी का व्रत रखने और सच्चे मन से साधना करने से जातक को सामान्य चतुर्थी की तुलना में सौ गुना अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। चूंकि इस समय ग्रहों के राजा और अन्य गोचर भी विशेष स्थिति में हैं, इसलिए कल का दिन बप्पा को प्रसन्न करने के लिए सर्वश्रेष्ठ है। इस दिन की गई पूजा से घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है, रुके हुए कार्य गति पकड़ते हैं और जातकों को भयंकर कर्ज व दरिद्रता से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है।
इस सरल और प्रामाणिक विधि से करें वरदा विनायक चतुर्थी की पूजा
कल 20 मई को बप्पा का आशीर्वाद पाने के लिए सुबह से ही शुभ संयोग शुरू हो जाएंगे। श्रद्धालु अपने घरों में इस प्रामाणिक विधि से पूजन संपन्न कर सकते हैं:
प्रातः काल का संकल्प: बुधवार की सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों और साफ-सुथरे (संभव हो तो लाल या पीले रंग के) वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत और बप्पा की सेवा का संकल्प लें।
चौकी की स्थापना: घर के ईशान कोण या मंदिर को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें। वहां एक सुंदर लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
प्रिय सामग्रियां करें अर्पित: बप्पा को सबसे प्रिय दूर्वा (दूब घास) की 21 गांठें, लाल रंग के फूल, रोली, अक्षत और चंदन अर्पित करें। इसके बाद उन्हें मोदक, ताजे पके हुए केले और गुड़-चने का उत्तम भोग लगाएं।
कथा और अर्घ्य: गणेश जी के सम्मुख शुद्ध गाय के घी का दीपक प्रज्वलित करें और 'ॐ गं गणपतये नमः' महामंत्र का जाप करते हुए वरदा विनायक चतुर्थी की व्रत कथा का पाठ अवश्य करें। शाम के समय चंद्रमा के उदय होने पर उन्हें अर्घ्य देकर अपना व्रत खोलें।
आर्थिक संकट और कर्ज को जड़ से मिटाएगा यह 'ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्र'
यदि आप लगातार बिजनेस में घाटा झेल रहे हैं, नौकरी में सैलरी नहीं बढ़ रही है या आप पुराने कर्ज के दलदल में फंसे हुए हैं, तो अधिकमास की इस चतुर्थी पर नीचे दिए गए ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्रम् का पाठ अवश्य करें। मान्यता है कि इस सिद्ध स्तोत्र का पाठ करने से धन आगमन के बंद रास्ते खुल जाते हैं:
॥ ऋणमुक्त श्री गणेश स्तोत्रम् ॥
ॐ स्मरामि देवदेवेशं वक्रतुण्डं महाबलम्।
षडक्षरं कृपासिन्धुं नमामि ऋणमुक्तये॥
महागणपतिं वन्दे महासेतुं महाबलम्।
एकमेवाद्वितीयं तु नमामि ऋणमुक्तये॥
एकाक्षरं त्वेकदन्तमेकं ब्रह्म सनातनम्।
महाविघ्नहरं देवं नमामि ऋणमुक्तये॥
शुक्लाम्बरं शुक्लवर्णं शुक्लगन्धानुलेपनम्।
सर्वशुक्लमयं देवं नमामि ऋणमुक्तये॥
रक्ताम्बरं रक्तवर्णं रक्तगन्धानुलेपनम्।
रक्तपुष्पैः पूज्यमानं नमामि ऋणमुक्तये॥
कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णं कृष्णगन्धानुलेपनम्।
कृष्णयज्ञोपवीतं च नमामि ऋणमुक्तये॥
पीताम्बरं पीतवर्ण पीतगन्धानुलेपनम्।
पीतपुष्पैः पूज्यमानं नमामि ऋणमुक्तये॥
सर्वात्मकं सर्ववर्णं सर्वगन्धानुलेपनम्।
सर्वपुष्पैः पूज्यमानं नमामि ऋणमुक्तये॥
एतद् ऋणहरं स्तोत्रं त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः।
षण्मासाभ्यन्तरे तस्य ऋणच्छेदो न संशयः॥
सहस्रदशकं कृत्वा ऋणमुक्तो धनी भवेत्॥
बाधाओं का नाश करने वाले बप्पा के चमत्कारी मंत्र
कल पूजा के समय अपनी मनोकामना के अनुसार रुद्राक्ष या चंदन की माला से इन मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करें:
समस्त बाधाओं और विघ्नों को दूर करने के लिए:
वक्रतुण्ड महाकाय कोटिसूर्य समप्रभ। निर्विघ्नं कुरू मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
मनचाही इच्छा और गुप्त मनोकामना की पूर्ति के लिए:
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं चिरचिर गणपति वर वर देयं मम वाँछितार्थ कुरु कुरु स्वाहा।
बुद्धि, एकाग्रता, ज्ञान और निर्णय शक्ति बढ़ाने के लिए (गणेश गायत्री मंत्र):
ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥
वरदा विनायक चतुर्थी व्रत करने के अद्भुत लाभ
जो भी श्रद्धालु कल पूरे नियम और अटूट श्रद्धा के साथ विघ्नहर्ता की शरण में जाएंगे, उन्हें निम्नलिखित दिव्य लाभ प्राप्त होंगे:
घर-परिवार में चल रही भयंकर आर्थिक तंगी और कंगाली हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी।
लंबे समय से रुका हुआ या डूबा हुआ धन वापस मिलने के योग बनेंगे और कर्ज का बोझ उतरेगा।
कार्यक्षेत्र, करियर और व्यापार में आ रही सभी अनजानी बाधाएं जड़ से खत्म होंगी।
विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों की बुद्धि, तर्कशक्ति और सही निर्णय लेने की क्षमता में अभूतपूर्व विकास होगा।
घर में सुख-समृद्धि, रिद्धि-सिद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का स्थायी वास होगा।
कल 20 मई 2026 को अधिकमास और बुधवार का यह महासंयोग एक संजीवनी की तरह है। बप्पा विघ्नहर्ता हैं, सच्चे मन से की गई आपकी लघु सेवा से भी वे प्रसन्न होकर आपकी झोली खुशियों से भर देंगे।