भगवान गणेश को क्यों प्रिय है दूर्वा? अनलासुर राक्षस के विनाश से जुड़ी है यह रोचक पौराणिक कथा

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India News Live,Digital Desk : हिंदू धर्म में भगवान गणेश की पूजा दूर्वा (हरी घास) के बिना अधूरी मानी जाती है। चाहे बुधवार का दिन हो, गणेश चतुर्थी हो या फिर आज की 'वरदा चतुर्थी', बप्पा को दूर्वा अर्पित करना अनिवार्य माना गया है। भक्त इस छोटी सी दिखने वाली घास को पूर्ण श्रद्धा के साथ गणपति को भेंट करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे का पौराणिक रहस्य क्या है और यह क्यों उन्हें इतनी प्रिय है?

दूर्वा और अनलासुर राक्षस का रहस्य

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय की बात है जब अनलासुर नामक राक्षस ने तीनों लोकों में भयंकर आतंक मचा रखा था। उसके अत्याचारों से देवता और ऋषि-मुनि त्रस्त हो गए थे। तब भगवान गणेश ने पृथ्वी पर अवतरित होकर उस राक्षस का संहार करने का निर्णय लिया और युद्ध के दौरान उसे जीवित ही निगल गए। राक्षस को निगलने के बाद बप्पा के पेट में भयंकर जलन होने लगी।

ऋषि-मुनियों ने उन्हें शांत करने के कई उपाय किए, लेकिन बप्पा को कोई राहत नहीं मिली। अंत में कश्यप ऋषि ने भगवान गणेश को 21 दूर्वा की गांठें अर्पित कीं। चमत्कारिक रूप से, दूर्वा को स्पर्श करते ही बप्पा के पेट की जलन तुरंत शांत हो गई। तभी से यह मान्यता प्रचलित हो गई कि भगवान गणेश को दूर्वा अत्यंत प्रिय है और इसे अर्पित करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है।

दूर्वा अर्पित करने के चमत्कारिक लाभ

धार्मिक दृष्टिकोण से गणेश जी को दूर्वा चढ़ाना न केवल उनकी पूजा का हिस्सा है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक सरल माध्यम भी है।

कष्टों का निवारण: माना जाता है कि नियमित रूप से गणपति को दूर्वा अर्पित करने से जीवन की सभी बड़ी परेशानियां और बाधाएं स्वतः दूर होने लगती हैं।

सुख-समृद्धि का वास: घर में शांति और खुशहाली बनाए रखने के लिए गणेश जी को दूर्वा चढ़ाना शुभ फलदायी होता है।

विद्या और बुद्धि में वृद्धि: गणेश जी बुद्धि और ज्ञान के अधिष्ठाता देव हैं। विद्यार्थियों को एकाग्रता और सफलता पाने के लिए दूर्वा का अर्पण जरूर करना चाहिए।

आर्थिक समृद्धि: नौकरी, व्यापार या धन से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे लोग यदि दूर्वा अर्पित करें, तो उन्हें आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है।

रिश्तों में मधुरता: परिवार में आपसी प्रेम और रिश्तों में मजबूती लाने के लिए भी दूर्वा को गणेश जी का प्रिय प्रसाद माना गया है।

दूर्वा चढ़ाते समय इन नियमों का रखें ध्यान

शास्त्रों के अनुसार, भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करने के कुछ निश्चित नियम हैं जिनका पालन करना जरूरी है। हमेशा ताजी और स्वच्छ दूर्वा का ही उपयोग करें। पूजा में 3 या 5 गांठ वाली दूर्वा चढ़ाना सबसे शुभ माना जाता है। इसे अर्पित करते समय 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का उच्चारण अवश्य करें। ध्यान रहे कि कभी भी सूखी, पीली या टूटी हुई दूर्वा गणेश जी को नहीं चढ़ानी चाहिए। सच्ची श्रद्धा और पवित्र मन से की गई पूजा निश्चित ही बप्पा की कृपा बरसाती है।