June 21 2026 11:55 pm

US Oil Refinery: अमेरिका में 50 साल बाद खुलेगी नई तेल रिफाइनरी, राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और रिलायंस को कहा 'थैंक्यू'

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India News Live,Digital Desk : मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण युद्ध और वैश्विक तेल संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐतिहासिक घोषणा की है। ट्रंप ने एलान किया है कि पिछले 50 वर्षों में पहली बार अमेरिका की धरती पर एक नई तेल रिफाइनरी स्थापित की जाएगी। खास बात यह है कि इस महा-परियोजना के लिए ट्रंप ने भारत और भारत की दिग्गज निजी कंपनी रिलायंस (Reliance) का विशेष आभार व्यक्त किया है।

टेक्सास में 300 अरब डॉलर का ऐतिहासिक निवेश

राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, यह नई रिफाइनरी टेक्सास के ब्राउनस्विले (Brownsville) में स्थापित की जा रही है। उन्होंने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा समझौता बताते हुए कहा कि यह 300 अरब डॉलर का निवेश है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि उनकी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति, करों में कटौती और सरल परमिट प्रक्रिया के कारण ही यह संभव हो पाया है। यह रिफाइनरी न केवल अमेरिकी बाजारों को मजबूती देगी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा उत्पादन में भी क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।

रिलायंस और भारत का अहम योगदान

इस परियोजना में भारतीय दिग्गज रिलायंस की भूमिका को रेखांकित करते हुए ट्रंप ने कहा, "यह अमेरिकी कामगारों और दक्षिण टेक्सास के लोगों की बड़ी जीत है। इस निवेश के लिए हम अपने सहयोगी भारत और रिलायंस को धन्यवाद देते हैं।" माना जा रहा है कि यह रिफाइनरी तकनीक के मामले में दुनिया की सबसे स्वच्छ (Cleanest) रिफाइनरी होगी, जो पर्यावरण मानकों का सख्ती से पालन करेगी।

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और ऊर्जा सुरक्षा

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर रोक लगा दी है। ज्ञात हो कि दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन इसी मार्ग से होता है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के मुताबिक, इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में अब तक सात नाविकों की जान जा चुकी है। अमेरिका का मानना है कि अपनी रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाकर वह खाड़ी देशों पर निर्भरता को कम कर सकेगा।

ईरान पर सख्त रुख: 'बिना शर्त आत्मसमर्पण' तक जारी रहेगी कार्रवाई

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने सैन्य और आर्थिक उद्देश्यों को लेकर अडिग है। उन्होंने जानकारी दी कि अमेरिकी सेना ने ड्रोन हमलों में शामिल ईरान के 50 से अधिक जहाजों को नष्ट कर दिया है। लेविट ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोई भी बड़ा कदम उठाने से नहीं हिचकिचाएंगे। ईरान के खिलाफ यह कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक वह बिना शर्त आत्मसमर्पण नहीं कर देता।”