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August 20 2026 04:40 pm

बांग्लादेश राष्ट्रपति चुनाव: BNP के मजबूत उम्मीदवार मिखर फखरुल इस्लाम की जीत की संभावना, समझें पूरा समीकरण

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बांग्लादेश में नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए मतदान होने जा रहा है। करीब 35 साल बाद देश में राष्ट्रपति पद के लिए सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर और 11 दलों वाले विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार रिटायर्ड कर्नल ओली अहमद आमने-सामने हैं। संसद में BNP के पास दो-तिहाई बहुमत होने के कारण 78 वर्षीय आलमगीर को इस चुनाव में सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

संसद में होगा मतदान और तय होगा अगला राष्ट्राध्यक्ष

बांग्लादेश निर्वाचन आयोग के मुताबिक राष्ट्रपति चुनाव के लिए संसद यानी जातीय संसद में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान निर्धारित है। BNP ने 78 वर्षीय मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि 84 वर्षीय ओली अहमद 11 दलों वाले विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार हैं। ओली अहमद लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के अध्यक्ष हैं और उन्हें जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन का समर्थन हासिल है। निर्वाचन आयोग ने दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को वैध घोषित किया था। 1991 के बाद यह पहला मौका है जब बांग्लादेश में राष्ट्रपति पद के लिए चुनावी मुकाबला हो रहा है, क्योंकि पिछले कई दशकों में राष्ट्रपति का चुनाव आमतौर पर सहमति या निर्विरोध तरीके से होता रहा है।

BNP सांसदों से समर्थन की अपील और राजनीतिक सफर

राष्ट्रपति चुनाव से एक दिन पहले BNP संसदीय दल की बैठक में मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने पार्टी सांसदों से अपने पक्ष में मतदान करने की अपील की। इस दौरान वह भावुक भी नजर आए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता से कभी समझौता नहीं करेंगे। चुनाव जीतने वाले उम्मीदवार के शुक्रवार शाम बांग्लाभवन के दरबार हॉल में बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने की संभावना है। मोहम्मद शहाबुद्दीन के स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर पद छोड़ने के बाद संविधान के तहत 90 दिनों के भीतर यह चुनाव कराया जा रहा है। फिलहाल संसद के अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

राष्ट्रपति पद की संवैधानिक भूमिका और समीकरण

बांग्लादेश की संसदीय व्यवस्था में राष्ट्रपति मुख्य रूप से संवैधानिक और औपचारिक राष्ट्राध्यक्ष होते हैं, हालांकि उनके पास प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति तथा सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकार हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BNP ने अपने चुनावी घोषणापत्र में संविधान में संशोधन कर राष्ट्रपति को अधिक अधिकार देने का वादा किया था, जिसके चलते यह चुनाव और भी अहम हो गया है। अर्थशास्त्र की पढ़ाई कर चुके आलमगीर पिछले दो दशकों से BNP के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं और अब इस चुनाव के जरिए बांग्लादेश की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है।