Tulsi Vivah 2025 : जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व
- by Priyanka Tiwari
- 2025-10-24 03:40:00
India News Live,Digital Desk : सनातन धर्म में तुलसी विवाह का पर्व बहुत ही पवित्र माना जाता है। यह पर्व देवउठनी एकादशी के अगले दिन या कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु अपनी चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं और इसी दिन से सभी शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। आइए, जानते हैं तुलसी विवाह 2025 के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व के बारे में।
तुलसी विवाह 2025 शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार:
- आरंभ: 02 नवंबर 2025, सुबह 07:31 बजे
- समापन: 03 नवंबर 2025, सुबह 05:07 बजे
इस वर्ष 02 नवंबर को ही तुलसी विवाह का पर्व मनाया जाएगा।
तुलसी विवाह की पूजा विधि
- घर के आंगन, बालकनी या पूजा स्थल पर तुलसी के पौधे को सजाएँ। रंगोली बनाकर सुंदर मंडप तैयार करें।
- तुलसी माता को चूड़ी, चुनरी, साड़ी और अन्य शृंगार सामग्री अर्पित करें।
- शालिग्राम जी को तुलसी के पौधे के दाहिनी ओर स्थापित करें।
- तुलसी माता और शालिग्राम भगवान को गंगाजल से स्नान कराएं।
- शालिग्राम जी को चंदन और तुलसी माता को रोली का तिलक लगाएं।
- उन्हें फूल, मिठाई, गन्ना, पंचामृत, सिंघाड़े आदि चढ़ाएं।
- धूप और दीप प्रज्वलित करें।
- शालिग्राम जी पर चावल न चढ़ाएँ, उनके लिए तिल या सफेद चंदन का प्रयोग करें।
- विधिवत मंत्रोच्चार के साथ सात फेरे कराएँ।
- विवाह संपन्न होने के बाद आरती करें और प्रसाद सभी में बांटें।
धार्मिक महत्व
तुलसी विवाह का धार्मिक महत्व बहुत बड़ा है। मान्यता है कि जो भक्त विधिवत तरीके से तुलसी माता और शालिग्राम भगवान का विवाह कराते हैं, उन्हें कन्यादान के समान पुण्य फल मिलता है और जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।
- तुलसी माता को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है।
- तुलसी विवाह से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि, प्यार और खुशहाली आती है।
- अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है।
पूजन मंत्र
तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी। धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।। लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्। तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।