कुंभ राशि वालों की चमकेगी किस्मत! 2027 में मिलेगी शनि की साढ़ेसाती से मुक्ति, मेष और मीन राशि के लिए अभी संघर्ष की घड़ी
India News Live,Digital Desk : ज्योतिष शास्त्र में शनि की साढ़ेसाती का नाम सुनते ही अक्सर लोग सहम जाते हैं, लेकिन यह समय केवल कष्ट का नहीं बल्कि जीवन को अनुशासन और मजबूती देने का भी होता है। साल 2026 चल रहा है और आने वाला समय कुछ राशियों के लिए बड़ी राहत लेकर आने वाला है, तो कुछ के लिए चुनौतियां बढ़ने वाली हैं। सबसे बड़ी खुशखबरी कुंभ राशि वालों के लिए है, जिनकी साढ़ेसाती का काउंटडाउन शुरू हो चुका है।
कुंभ राशि: खत्म होने वाला है 'इंतजार' का दौर
कुंभ राशि के जातकों के लिए अच्छी खबर यह है कि वे अपनी साढ़ेसाती के अंतिम चरण से गुजर रहे हैं। शनि देव की विशेष कृपा से 3 जून 2027 को जैसे ही शनि अपनी राशि बदलेंगे, कुंभ राशि के जातकों को साढ़ेसाती के भारीपन से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। इस समय आपको धीरे-धीरे मानसिक शांति और अटके हुए कार्यों में गति महसूस होने लगेगी।
मेष राशि: अभी तो सफर शुरू हुआ है
मेष राशि वालों के लिए राहत की डगर अभी काफी दूर है। इनकी साढ़ेसाती का पहला चरण 29 मार्च 2025 से शुरू हुआ था। पहला चरण अक्सर मानसिक उथल-पुथल और नई जिम्मेदारियों का बोझ लेकर आता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, मेष राशि वालों को पूर्ण राहत के लिए 31 मई 2032 तक का इंतजार करना होगा। तब तक शनि देव आपको कड़ा संघर्ष कराकर भविष्य के लिए निखारने का काम करेंगे।
मीन राशि: शुरू होने वाला है सबसे कठिन 'दूसरा चरण'
मीन राशि वालों के लिए आने वाला साल 2027 काफी महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। 3 जून 2027 से मीन राशि पर साढ़ेसाती का दूसरा चरण शुरू होगा, जिसे ज्योतिष में सबसे अधिक प्रभावशाली माना जाता है। इस दौरान आपको करियर, सेहत और निवेश के मामलों में बहुत फूंक-फूंक कर कदम रखना होगा। मीन राशि को इस चक्र से 8 अगस्त 2029 के बाद ही राहत मिल पाएगी।
साढ़ेसाती के दौरान क्या करें और क्या न करें?
शनि देव न्याय के देवता हैं, इसलिए इस समय डरने के बजाय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
धैर्य ही मूल मंत्र: इस दौरान कोई भी बड़ा फैसला जल्दबाजी में न लें। शनि की गति धीमी है, इसलिए फल मिलने में देरी हो सकती है।
अनुशासन और दान: नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ, शनि मंत्रों का जाप और जरूरतमंदों की मदद करने से शनि का दुष्प्रभाव कम होता है।
सकारात्मक नजरिया: इसे दंड नहीं, बल्कि 'कोर्स' की तरह लें जो आपको अधिक अनुभवी और मजबूत बनाता हैराहत की समय-सीमा एक नजर में