राजस्थान का वो चमत्कारी धाम जहां भक्त भगवान को बनाते हैं 'बिजनेस पार्टनर', इस साल चढ़ा 337 करोड़ का चढ़ावा
देश में आपने भगवान के प्रति आस्था और अनोखे चढ़ावे के कई किस्से सुने होंगे, लेकिन राजस्थान में एक ऐसा मंदिर भी है जहां भक्त भगवान को अपने व्यापार में हिस्सेदार यानी 'बिजनेस पार्टनर' बनाते हैं। हम बात कर रहे हैं राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित सुप्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ मंदिर की। इन दिनों सोशल मीडिया पर भी सांवलिया सेठ को बिजनेस पार्टनर बनाने और उनकी कृपा से व्यापार को ऊंचाइयों पर ले जाने के उपायों की रील खूब वायरल हो रही हैं।
सांवलिया सेठ के दरबार में देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु आते हैं। भक्तों का अटूट विश्वास है कि यहां ठाकुर जी 'सेठों के सेठ' के रूप में विराजमान हैं, जो अपने साझेदारों का व्यापार कभी डूबने नहीं देते। यही वजह है कि इस मंदिर का खजाना और चढ़ावा हर साल एक नया रिकॉर्ड बना रहा है।
पिछले 34 साल का टूटा रिकॉर्ड, चढ़े 337 करोड़ रुपये और 84 किलो चांदी
सांवलिया सेठ मंदिर में भक्तों की आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस साल मंदिर को 337 करोड़ रुपये का बंपर चढ़ावा मिला है। मंदिर के इतिहास में पिछले 34 सालों में कभी भी इतना दान नहीं आया था। अगर पिछले साल की बात करें तो मंदिर को 234 करोड़ रुपये का चढ़ावा मिला था, जो इस साल के मुकाबले काफी कम था। सिर्फ इसी साल के अप्रैल महीने में ही भक्तों ने 41 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंदिर में अर्पित की थी।
इस भारी-भरकम रकम को गिनने के लिए बकायदा 200 कर्मचारियों की ड्यूटी लगानी पड़ी थी। खास बात यह है कि यह पूरी गिनती श्रद्धालुओं के सामने ही पारदर्शी तरीके से की जाती है। इस साल दानपात्र से नकदी के अलावा देशी-विदेशी मुद्राएं, 600 ग्राम सोना और 84 किलोग्राम चांदी के आभूषण भी निकले हैं। कई भक्त तो भगवान को खुश होकर ट्रैक्टर तक दान में दे जाते हैं।
आखिर क्यों भगवान को 'बिजनेस पार्टनर' बनाते हैं लोग?
सांवलिया सेठ को लेकर भक्तों के बीच यह गहरी मान्यता है कि यदि वे अपने व्यापार में भगवान को हिस्सेदार बना लेंगे, तो उनका बिजनेस दिन-दौगुनी और रात-चौगुनी तरक्की करेगा। लोग बाकायदा अपनी कंपनी या फर्म के लेटरहेड पर लिखकर मंदिर में दे जाते हैं कि वे मुनाफे का एक निश्चित हिस्सा (जैसे 2%, 5% या 10%) सांवलिया सेठ के चरणों में अर्पित करेंगे।
व्यापारियों का कहना है कि जिस तरह महाभारत के युद्ध में अर्जुन के रथ की कमान स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने अपने हाथों में थामी थी, उसी तरह सांवलिया सेठ उनके बिजनेस की कमान संभाल लेते हैं। जब बिजनेस में बंपर मुनाफा होता है, तो भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर खुशी-खुशी भगवान का हिस्सा उन्हें चढ़ाने आते हैं।
मीराबाई से जुड़ा है मंदिर का इतिहास, 450 साल पुराना है दरबार
श्री सांवलिया सेठ का यह भव्य मंदिर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ से उदयपुर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित भादसोड़ा (मंडफिया) ग्राम में बना हुआ है। इस मंदिर की बनावट दिल्ली के प्रसिद्ध अक्षरधाम मंदिर की तर्ज पर की गई है, जो देखने में अत्यंत आकर्षक है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्री सांवलिया सेठ का सीधा संबंध कृष्ण भक्त मीराबाई से है। कहा जाता है कि मीराबाई जिन गिरधर गोपाल की पूजा किया करती थीं, उनकी मूर्ति को बाद में एक पेड़ के नीचे छुपा दिया गया था। सालों बाद एक ग्वाले को सपना आया, जिसके बाद खुदाई में श्री गिरधर गोपाल की यह मनोहारी और दिव्य मूर्ति प्रकट हुई। मंडफिया में स्थित सांवलिया सेठ का यह मुख्य मंदिर करीब 450 साल पुराना है, जिसका निर्माण मेवाड़ राजपरिवार द्वारा करवाया गया था।