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August 03 2026 10:39 am

तेलंगाना सरकार का बड़ा दांव: मंत्रियों की सैलरी में 50% की भारी कटौती, अब पेंशनभोगियों की आएगी दिवाली

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India News Live,Digital Desk : तेलंगाना की रेवंत रेड्डी सरकार ने राज्य के वित्तीय प्रबंधन को लेकर एक साहसिक और चौंकाने वाला फैसला लिया है। सरकार ने हजारों करोड़ रुपये के कर्ज और बकाये से जूझ रहे रिटायर्ड कर्मचारियों को राहत देने के लिए अपने ही मंत्रियों की जेब पर कैंची चला दी है। अब राज्य के सभी मंत्री अपनी सैलरी का आधा हिस्सा (50%) छोड़ेंगे, ताकि बुजुर्ग पेंशनभोगियों का बकाया चुकाया जा सके।

मंत्रियों ने स्वेच्छा से छोड़ी आधी सैलरी, जनप्रतिनिधि भी तैयार

हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर अब तेलंगाना में भी मंत्रियों के वेतन में कटौती का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने बताया कि यह कोई थोपा गया फैसला नहीं है, बल्कि सभी मंत्रियों ने स्वेच्छा से अपनी सैलरी में कटौती का संकल्प लिया है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि यदि स्थिति की मांग हुई, तो राज्य के अन्य जनप्रतिनिधि भी अपना आधा वेतन देने से पीछे नहीं हटेंगे।

100 दिनों का 'मिशन भुगतान': सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बड़ी राहत

सरकार ने केवल वेतन कटौती का ऐलान ही नहीं किया, बल्कि भुगतान के लिए एक सख्त समय सीमा भी तय की है। कैबिनेट ने लक्ष्य रखा है कि अगले 100 दिनों के भीतर सेवानिवृत्ति बकाये (Retirement Dues) को चुकाने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इसके लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है, जो कर्मचारी संघों, शिक्षकों और पेंशनभोगियों के साथ सीधे संवाद करेगी ताकि फंड जुटाने के पारदर्शी रास्ते तलाशे जा सकें।

14,000 करोड़ से ज्यादा का बकाया, सरकार के सामने बड़ी चुनौती

तेलंगाना सरकार पर कर्मचारियों का बकाया बोझ किसी पहाड़ से कम नहीं है। कैबिनेट द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार:

रिटायर्ड कर्मचारियों का बकाया: लगभग 8,000 करोड़ रुपये

वर्तमान कर्मचारियों का बकाया: लगभग 6,200 करोड़ रुपये

सरकार का मानना है कि पिछले 10 वर्षों में यह बोझ लगातार बढ़ता गया है। मंत्री पोंगुलेटी ने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब तेलंगाना बना था तब ऐसी स्थिति नहीं थी, लेकिन अब पेंशनभोगियों को अपने ही हक के पैसे के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिसे यह सरकार खत्म करना चाहती है।

पेंशनभोगियों के सम्मान की रक्षा प्राथमिकता

कैबिनेट ने भावुक स्वर में कहा कि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़े, यह राज्य के लिए चिंता का विषय है। सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ने और भुगतान में देरी से कई परिवार संकट में हैं। सरकार का यह कदम न केवल वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए है, बल्कि एक संदेश देने के लिए भी है कि सरकार अपने कर्मचारियों के हितों के प्रति संवेदनशील है। अब देखना यह है कि 50% वेतन कटौती से जुटाया गया फंड इस विशाल बकाये को भरने में कितना कारगर साबित होता है।