Surya Grahan 2026: बस कुछ ही देर में शुरू होने वाला है वर्ष 2026 का अंतिम सूर्य ग्रहण, भूलकर भी न करें ये 7 बड़ी गलतियां! जानें सही समय
आकाश मंडल में एक बार फिर दुर्लभ और अद्भुत खगोलीय घटना का मंच सज चुका है। वर्ष 2026 का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण सूर्य ग्रहण बस कुछ ही मिनटों में शुरू होने वाला है। खगोल वैज्ञानिकों से लेकर वैदिक ज्योतिष शास्त्र के ज्ञाताओं तक, सभी की नजरें इस बड़ी घटना पर टिकी हुई हैं। जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है और सूर्य के प्रकाश को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है, तो सूर्य ग्रहण की स्थिति बनती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण वह समय होता है जब राहु और केतु सूर्य को ग्रसने का प्रयास करते हैं, जिससे ब्रह्मांड में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है।
ग्रहण काल को शास्त्रों में अत्यंत संवेदनशील समय माना गया है। यही वजह है कि इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। कुछ ही देर में लगने वाले इस सूर्य ग्रहण को लेकर वैज्ञानिकों और ज्योतिषियों दोनों ने ही अलर्ट जारी किया है। यदि आप ग्रहण काल के दौरान थोड़ी सी भी लापरवाही बरतते हैं, तो इसका सीधा प्रभाव आपके स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और भाग्य पर पड़ सकता है। आइए, एक रिपोर्टर की नजर से जानते हैं कि इस सूर्य ग्रहण का सही समय क्या है, क्या यह भारत में दिखेगा और इस दौरान आपको कौन-कौन सी गलतियां भूलकर भी नहीं करनी चाहिए।
सूर्य ग्रहण 2026 का सही समय और खगोलीय गणना
भारतीय समयानुसार (IST), यह सूर्य ग्रहण कुछ ही मिनटों में अपनी प्रारंभिक अवस्था में प्रवेश करने जा रहा है। खगोलीय पंचांग के अनुसार, ग्रहण की शुरुआत से लेकर इसके मोक्ष (समाप्ति) तक की कुल अवधि बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है। जैसे ही चंद्रमा की छाया सूर्य के बिंब पर पड़ेगी, सूर्य का एक बड़ा हिस्सा ढका हुआ नजर आएगा।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह एक पूर्ण/आंशिक सूर्य ग्रहण है, जो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग कोणों से दिखाई देगा। इस खगोलीय घटना को देखने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक और खगोल प्रेमी विशेष उपकरणों के साथ तैयार हैं। हालांकि, ज्योतिषीय दृष्टिकोण से ग्रहण का स्पर्श काल और मोक्ष काल साधना, जप और ध्यान के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है।
क्या भारत में दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण और क्या मान्य होगा सूतक काल?
सूर्य ग्रहण के संदर्भ में देशवासियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि क्या यह ग्रहण भारत से दिखाई देगा और क्या इसका सूतक काल यहां मान्य होगा? ज्योतिष शास्त्र के अटल नियम के अनुसार, कोई भी ग्रहण जिस भूभाग से नग्न आंखों या सीधे तौर पर दिखाई देता है, सूतक काल के नियम वहीं लागू होते हैं।
वैज्ञानिक और पंचांगीय गणनाओं के अनुसार, यदि यह सूर्य ग्रहण भारतीय क्षितिज पर दिखाई देता है, तो इसका सूतक काल ग्रहण शुरू होने से ठीक 12 घंटे पहले लागू हो जाता है। सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, मूर्तियों को छूना वर्जित होता है और कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते। यदि यह ग्रहण भारत में अदृश्य रहता है, तो यहां सूतक काल के नियम लागू नहीं होंगे और न ही मंदिरों के कपाट बंद किए जाएंगे। हालांकि, ब्रह्मांडीय ऊर्जा के प्रभाव से बचने के लिए गर्भवती महिलाओं, वृद्धों और रोगियों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।
सूर्य ग्रहण के दौरान भूलकर भी न करें ये 7 बड़ी गलतियां
सनातन परंपरा और वैज्ञानिक दोनों ही दृष्टिकोण से ग्रहण काल के दौरान कुछ गतिविधियों को पूरी तरह से वर्जित माना गया है। यदि आप भी इस सूर्य ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों से बचना चाहते हैं, तो निम्नलिखित 7 गलतियां करने से बचें:
नग्न आंखों से सूर्य को देखना: वैज्ञानिक और डॉक्टर बार-बार चेतावनी देते हैं कि ग्रहण के समय सूर्य की पराबैंगनी (UV) और तीखी किरणें हमारी आंखों के रेटिना को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए बिना प्रमाणित सोलर फिल्टर चश्मे (Solar Eclipse Glasses) के सूर्य की तरफ न देखें।
भोजन पकाना या खाना: शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण काल में पराबैंगनी किरणों और नकारात्मक ऊर्जा के कारण वातावरण में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। इसलिए ग्रहण के दौरान खाना पकाने या भोजन करने से बचना चाहिए। पहले से बने भोजन और पानी में तुलसी के पत्ते (Tulsi Dal) डाल देने चाहिए ताकि वह दूषित न हो।
पूजा-पाठ करना या मूर्तियों को छूना: सूतक काल और ग्रहण काल के दौरान घर के मंदिर या देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श नहीं करना चाहिए। इस समय केवल मानसिक रूप से मंत्रों का जाप करना चाहिए।
पैनी और नुकीली चीजों का प्रयोग: ग्रहण के दौरान कैंची, चाकू, सुई, ब्लेड या किसी भी नुकीली वस्तु का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को कपड़ा काटने या सिलाई-कढ़ाई करने से पूरी तरह बचना चाहिए।
गर्भवती महिलाओं का बाहर निकलना: गर्भवती महिलाओं के लिए सूर्य ग्रहण का समय अति संवेदनशील होता है। ग्रहण के समय निकलने वाली किरणें गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकती हैं। इसलिए महिलाओं को घर के भीतर ही रहना चाहिए।
सोना या सुस्ती फैलाना: शास्त्रों में माना गया है कि ग्रहण काल में सोने से व्यक्ति का स्वास्थ्य प्रभावित होता है। रोगी, वृद्ध और छोटे बच्चों को छोड़कर सामान्य व्यक्तियों को ग्रहण के दौरान सोने से बचना चाहिए और भगवान के नाम का स्मरण करना चाहिए।
पेड़-पौधों को स्पर्श करना: ग्रहण काल में पेड़-पौधों, विशेष रूप से तुलसी, पीपल और शमी के पत्तों को छूना या तोड़ना वर्जित माना गया है। ऐसा करने से दोष लगता है।
गर्भवती महिलाएं रखें इन बातों का खास ध्यान
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष नियम बताए गए हैं। ग्रहण काल के दौरान गर्भवती महिलाओं को गेरू (एक प्रकार की लाल मिट्टी) को अपने पेट पर लगा लेना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि गेरू ग्रहण की हानिकारक किरणों को अवशोषित कर लेता है और शिशु की रक्षा करता है।
गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान हाथ-पैर मोड़कर बैठने के बजाय शांत भाव से सीधे बैठना या लेटना चाहिए। अपने पास एक छिला हुआ नारियल रखना भी बेहद शुभ माना जाता है। इस दौरान वे 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'महामृत्युंजय मंत्र' का मन ही मन जाप कर सकती हैं।
ग्रहण के दौरान और बाद में क्या करें? (शुभ कार्य)
जहां एक तरफ ग्रहण में कुछ काम करने की मनाही है, वहीं कुछ ऐसे कार्य भी हैं जिन्हें करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। ग्रहण काल में किया गया मंत्र जाप, ध्यान और दान सामान्य दिनों की तुलना में हजार गुना अधिक फल प्रदान करता है।
ग्रहण के दौरान अपने इष्टदेव, भगवान सूर्य, गायत्री मंत्र या 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें। जैसे ही ग्रहण समाप्त हो (मोक्ष हो), तुरंत पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें। खुद स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। स्नान के पश्चात मंदिर की सफाई करें और देवी-देवताओं को स्नान कराकर पूजा-अर्चना करें। ग्रहण के तुरंत बाद गेहूं, तांबा, गुड़, लाल कपड़े, तिल या अपनी सामर्थ्य अनुसार धन का दान गरीबों को दें। ऐसा करने से ग्रहण के सभी अशुभ प्रभाव समाप्त हो जाते हैं।
दुनिया भर में दृश्यता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के लिए यह सूर्य ग्रहण अनुसंधान का एक बड़ा जरिया है। जब सूर्य का कोरोना (बाहरी आभामंडल) चंद्रमा के पीछे से चमकता है, तो वैज्ञानिकों को सूर्य के वायुमंडल का अध्ययन करने का अवसर मिलता है। उत्तर और दक्षिण अमेरिका, यूरोप, एशिया के कुछ हिस्सों और महासागरीय क्षेत्रों में यह ग्रहण अलग-अलग रूपों में नजर आएगा। वैज्ञानिक सलाह देते हैं कि आम जनता को भी कैमरे के लेंस, दूरबीन या सीधे चश्मे से सूर्य को नहीं देखना चाहिए।