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August 07 2026 02:06 am

'दिसंबर तक क्यों, उन्हें अभी आना चाहिए': तारिक रहमान के करीबी नेता ने शेख हसीना को दी खुली चुनौती

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बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। अगस्त 2024 में सत्ता से बेदखल होने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपनी पहली वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिसंबर में स्वदेश लौटने का बड़ा ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि गिरफ्तारी, जेल या जान के खतरे के बावजूद वह अपने लोगों के बीच वापस जाएंगी। हसीना के इस बयान के सामने आने के बाद प्रधानमंत्री तारिक रहमान के खेमे से उन्हें तीखी प्रतिक्रिया और खुली चुनौती मिली है। रहमान के करीबी सलाहकार सैयद मोअज्जम हुसैन अलाल ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि पूर्व प्रधानमंत्री को देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है, तो वह दिसंबर तक तीन महीने का इंतजार क्यों कर रही हैं, उन्हें अभी और तुरंत वापस लौट आना चाहिए।

मौत की सजा और प्रत्यर्पण की मांग के बीच गर्माई राजनीति

बता दें कि पिछले दिनों बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने जुलाई-अगस्त 2024 के दौरान हुई भारी अशांति और मानवता के खिलाफ अपराध के मामलों में शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को मौत की सजा सुनाई थी। इस कड़े फैसले के बाद ढाका की अंतरिम सरकार ने भारत से दोनों को तुरंत प्रत्यर्पित करने की औपचारिक अपील की है, जबकि हसीना फिलहाल भारत में ही मौजूद हैं। तारिक रहमान के करीबी नेता अलाल ने स्पष्ट किया कि यदि वह लौटती हैं, तो देश की न्यायपालिका और प्रशासनिक व्यवस्था खुद तय करेगी कि उनका स्वागत होना चाहिए या उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद के उस बयान की भी कड़ी निंदा की जिसमें उन्होंने बांग्लादेश को पूर्वी मोर्चे पर दूसरा पाकिस्तान बताया था और यूएन के आंकड़ों पर सवाल उठाए थे।

'5 अगस्त 2024 के बाद पूरी तरह बदल चुका है नया बांग्लादेश'

अलाल ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि 5 अगस्त 2024 के बाद का बांग्लादेश अब पूरी तरह बदल चुका है और यह एक मजबूत लोकतांत्रिक देश है जो केवल जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के अनुसार ही संचालित होगा। उन्होंने दो टूक कहा कि देश एक स्वतंत्र विदेश नीति पर काम कर रहा है और अपने घरेलू मामलों में किसी भी प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप या दखलंदाजी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। अब राजनीतिक गलियारों की निगाहें पूरी तरह से शेख हसीना के अगले कदम पर टिकी हुई हैं कि क्या वह वास्तव में दिसंबर में ढाका लौटती हैं या नहीं, और यदि वह वापस जाती हैं तो वहां की नई राजनीतिक और कानूनी व्यवस्था उनके साथ कैसा बर्ताव करती है।