Supreme Court's major ruling on suicide pacts: साथ जान देने की कसम खाकर अगर एक पार्टनर बच गया, तो वह होगा 'क्रिमिनल'; एक्ट्रेस प्रत्यूषा केस में उम्रकैद जैसी सजा बरकरार
India News Live,Digital Desk : देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने आत्महत्या के समझौतों (Suicide Pacts) को लेकर एक ऐतिहासिक और कड़ा कानूनी संदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि यदि दो लोग आपसी सहमति से सुसाइड का फैसला करते हैं और उनमें से एक की मौत हो जाती है जबकि दूसरा जीवित बच जाता है, तो जीवित पार्टनर दूसरे को मौत के लिए उकसाने का 'क्रिमिनल' माना जाएगा। इस अहम फैसले के साथ ही कोर्ट ने दक्षिण भारतीय फिल्म अभिनेत्री प्रत्यूषा की मौत के मामले में उनके प्रेमी गुडिपल्ली सिद्धार्थ रेड्डी को मिली सजा को बरकरार रखा है।
एक्ट्रेस प्रत्यूषा सुसाइड केस: क्या था पूरा मामला?
यह मामला साल 2002 का है, जिसने उस वक्त पूरे दक्षिण भारत को हिलाकर रख दिया था। मशहूर एक्ट्रेस प्रत्यूषा और इंजीनियरिंग छात्र सिद्धार्थ रेड्डी एक-दूसरे से प्यार करते थे और शादी करना चाहते थे। सिद्धार्थ का परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था। 23 फरवरी 2002 को दोनों ने कथित तौर पर एक साथ जहर खा लिया। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां सिद्धार्थ रेड्डी तो बच गए लेकिन प्रत्यूषा की मौत हो गई। जांच में सामने आया कि सिद्धार्थ ने ही कीटनाशक खरीदा था और उसे सॉफ्ट ड्रिंक में मिलाकर दोनों ने पिया था।
SC की बेंच ने कहा: 'आपसी वादा' भी उकसाने के दायरे में
जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि आईपीसी (IPC) की धारा 107 के तहत 'उकसाना' केवल जहर लाकर देना नहीं है। बेंच के अनुसार, "सुसाइड एग्रीमेंट के दौरान दिया गया मनोवैज्ञानिक भरोसा, आपसी वादा और एक-दूसरे को जान देने की हिम्मत देना, सीधे तौर पर मौत में मदद करना है।" कोर्ट ने माना कि सिद्धार्थ की मौजूदगी और उसके साथ ने प्रत्यूषा को सुसाइड के लिए प्रेरित किया, जो आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत गंभीर अपराध है।
चार हफ्ते के अंदर सरेंडर करने का आदेश
सिद्धार्थ रेड्डी को निचली अदालत ने 5 साल की सजा सुनाई थी, जिसे आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने 2011 में घटाकर 2 साल कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब इस 2 साल की सजा को पूरी तरह सही ठहराते हुए सिद्धार्थ की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया है कि वह अपनी बाकी बची सजा काटने के लिए चार हफ्ते के भीतर पुलिस के सामने सरेंडर करें।
रेप और मर्डर के आरोपों को कोर्ट ने नकारा
इस मामले में प्रत्यूषा की मां ने सिद्धार्थ पर रेप और मर्डर का आरोप लगाते हुए कड़ी सजा की मांग की थी। सीबीआई (CBI) जांच के दौरान एक डॉक्टर ने फॉरेंसिक रिपोर्ट से पहले ही गला घोंटने और यौन शोषण की बात कही थी, जिससे काफी विवाद हुआ था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सबूतों की कमी को देखते हुए मर्डर और रेप के आरोपों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसे कोई ठोस सबूत नहीं हैं जिनसे यह साबित हो सके कि यह सुसाइड नहीं बल्कि हत्या थी।
कानूनी सबक: भावनाओं के बहाव में अपराध से नहीं मिलेगी माफी
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो 'इश्क में साथ मरने' जैसे पैक्ट करते हैं। कानून की नजर में, यदि आप किसी को जान देने के लिए मानसिक रूप से तैयार करते हैं या उसमें सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो पार्टनर की मौत की जिम्मेदारी आपके कंधों पर होगी। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि जीवन अनमोल है और इसे खत्म करने के किसी भी समझौते में शामिल होना एक दंडनीय अपराध है।