इलाहाबाद हाईकोर्ट का कड़ा फैसला: फर्जी दस्तावेज पर मिली नौकरी 'शून्य', 35 साल की सेवा के बाद भी नहीं मिलेगी राहत
India News Live,Digital Desk : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरियों में फर्जीवाड़े को लेकर एक नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी व्यक्ति ने फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों (Fake Documents) के आधार पर नौकरी हासिल की है, तो उसकी नियुक्ति 'शुरुआत से ही शून्य' (Void Ab Initio) मानी जाएगी। कानून की नजर में ऐसी नौकरी का कोई अस्तित्व नहीं है, चाहे कर्मचारी ने कितने भी दशकों तक सेवा क्यों न की हो।
क्या है पूरा मामला? 35 साल बाद खुला राज
यह मामला मेरठ के एक जूनियर हाई स्कूल में 1989 से तैनात सहायक शिक्षिका वीणा मेनन से जुड़ा है।
साढ़े तीन दशक की सेवा: याची ने लगभग 35 वर्षों तक विभाग में अपनी सेवाएं दीं।
कैसे खुला मामला: जब सरकार ने 'मानव संपदा पोर्टल' पर सभी शिक्षकों के दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य किया, तब याची के दस्तावेजों की जांच शुरू हुई।
जांच में खुलासा: पता चला कि शिक्षिका ने हाईस्कूल की परीक्षा में बैठने के लिए कक्षा 8 का जो स्थानांतरण प्रमाणपत्र (TC) लगाया था, वह फर्जी था। इसके अलावा, इंटरमीडिएट में प्रवेश के लिए कक्षा 11 की टीसी भी फर्जी पाई गई।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: "धोखाधड़ी और न्याय साथ नहीं चल सकते"
न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए बेहद गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा:
"जब किसी नियुक्ति की नींव ही धोखाधड़ी और जाली दस्तावेजों पर टिकी हो, तो समय बीतने के साथ वह वैध नहीं हो जाती। धोखाधड़ी हर उस पवित्र कार्य को दूषित कर देती है जिसे वह छूती है।"
अदालत ने याची के उस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि 35 साल की 'संतोषजनक सेवा' के बाद अब योग्यता पर सवाल उठाना गलत है। कोर्ट ने कहा कि नैसर्गिक न्याय (Natural Justice) का लाभ उन्हें नहीं मिल सकता जिन्होंने खुद सिस्टम के साथ धोखाधड़ी की हो।
वेतन रोकने और दस्तावेज रद्द करने की कार्यवाही वैध
हाईकोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा परिषद और बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) द्वारा याची का वेतन रोकने और उसके दस्तावेजों को रद्द करने की कार्यवाही को पूरी तरह सही ठहराया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का असाधारण अधिकार क्षेत्र उन लोगों को संरक्षण देने के लिए नहीं है जो खुद गलत रास्ते से सिस्टम में घुसे हों।
फर्जी शिक्षकों पर कसेगा शिकंजा
इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग में उन लोगों की धड़कनें बढ़ गई हैं जिन्होंने दस्तावेजों में हेरफेर कर नौकरियां पाई हैं। कोर्ट के इस कड़े रुख से यह साफ है कि:
शून्य नियुक्ति: ऐसी नियुक्तियां कानूनन कभी हुई ही नहीं मानी जाएंगी।
वसूली की संभावना: कई मामलों में कोर्ट पूर्व में दिए गए वेतन की वसूली का आदेश भी दे चुका है।
सख्ती: पोर्टल पर दस्तावेजों के मिलान से ऐसे कई और मामले सामने आने की उम्मीद है।