प्रयागराज के यमुना ब्रिज पर अब नए 'स्पैन' के साथ दौड़ेंगी ट्रेनें, जानें क्यों था यह चुनौतीपूर्ण
India News Live,Digital Desk : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में यमुना नदी पर खड़ा 160 साल पुराना ऐतिहासिक रेल-सह-सड़क पुल (Old Yamuna Bridge) भारतीय रेलवे की अटूट विरासत का प्रतीक है। अंग्रेजों के जमाने का यह पुल, जिसने डेढ़ सदी से भी अधिक समय तक बिना किसी बड़े बदलाव के लाखों ट्रेनों का भार सहा, अब एक नए अवतार में सुरक्षित संचालन के लिए तैयार है। उत्तर मध्य रेलवे (NCR) ने पहली बार इस पुल के पुराने 'शोर स्पैन' (Shore Spans) को बदलकर आधुनिक स्टील गर्डर्स स्थापित करने का ऐतिहासिक काम पूरा किया है।
1865 से आज तक: इंजीनियरिंग की मिसाल
इस पुल का इतिहास भारत में रेलवे के शुरुआती दौर से जुड़ा है:
शुरुआत: यह पुल 15 अगस्त 1865 को यातायात के लिए खोला गया था।
दोहरीकरण: बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए 1911 में इसका दोहरीकरण (Double Line) किया गया।
पिछला बड़ा काम: आखिरी बार 1929 में इसके गर्डर्स को बदलने (Re-gardering) का काम हुआ था।
तब से लेकर अब तक, यानी लगभग 97 वर्षों से यह ढांचा निरंतर सेवा दे रहा था। इस पुल की खासियत इसका 'डबल डेकर' स्वरूप है, जिसमें ऊपर ट्रेनें दौड़ती हैं और नीचे सड़क यातायात चलता है।
क्या बदलाव किए गए? (Technical Upgrade)
लगातार उपयोग और भारी मालगाड़ियों के दबाव के कारण पुल के किनारों वाले हिस्सों (Shore Spans) पर अत्यधिक तनाव देखा जा रहा था। रेलवे ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इन्हें बदलने का निर्णय लिया:
पुराना ढांचा: 2×9.15 मीटर के पुराने स्पैन हटाए गए।
नया ढांचा: उनकी जगह 2×9.1 मीटर के मजबूत स्टील गर्डर लगाए गए हैं।
विशेष टीम: इस कार्य को उत्तर मध्य रेलवे के इंजीनियरिंग, परिचालन और बिजली विभाग की संयुक्त टीमों ने अंजाम दिया।
चुनौतीपूर्ण 'ब्लॉक' और सफल लॉन्चिंग
यह काम रेल यातायात को बाधित किए बिना पूरा करना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे चरणबद्ध तरीके से निपटाया गया:
27 मार्च 2026: 'अप लाइन' (Up Line) का पहला शोर स्पैन सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।
28 मार्च 2026: 'डाउन लाइन' (Down Line) का दूसरा स्पैन स्थापित किया गया।
सीमित समय के रेल ब्लॉक में पुराने भारी-भरकम हिस्सों को काटकर हटाना और नए गर्डर्स को सटीक जगह पर फिट करना तकनीकी रूप से काफी जटिल था, जिसे भारतीय इंजीनियरों ने बखूबी अंजाम दिया।
अब और सुगम होगा सफर
एनसीआर के वरिष्ठ पीआरओ डॉ. अमित मालवीय के अनुसार, इन स्पैन को बदलने से पुल की उम्र और मजबूती दोनों बढ़ गई है। प्रयागराज-नैनी खंड पर ट्रेनों की गति और सुरक्षा में अब और सुधार होगा। ऐतिहासिक महत्व के इस पुल का आधुनिकीकरण यह सुनिश्चित करता है कि आने वाले कई दशकों तक यह प्रयागराज की लाइफलाइन बना रहेगा।