ईरान का तेल संकट: भंडारण की जगह खत्म, अब कबाड़ टैंकों और रेल मार्ग का सहारा
India News Live,Digital Desk : ईरान और अमेरिका के बीच जारी 'आर्थिक युद्ध' अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां ईरान के पास अपना सबसे कीमती संसाधन— कच्चा तेल— रखने के लिए जगह नहीं बची है। अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) के कारण ईरान का तेल निर्यात लगभग ठप हो गया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि ईरान अब पुराने कबाड़ टैंकों, कामचलाऊ कंटेनरों और यहां तक कि रेल मार्ग के जरिए चीन को तेल भेजने की कोशिश कर रहा है।
कबाड़ टैंक और 'जंक स्टोरेज' का सहारा
ईरान अपने तेल कुओं को पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता, क्योंकि तकनीकी रूप से कुओं को दोबारा शुरू करना बेहद महंगा और जटिल होता है।
असामान्य कदम: ईरान अब उन पुराने और जंक घोषित किए जा चुके स्टोरेज स्थलों को फिर से चालू कर रहा है जिन्हें वर्षों पहले छोड़ दिया गया था।
जमीन के नीचे भंडारण: रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान अब तेल को किसी भी तरह सहेजने के लिए जमीन के नीचे या कामचलाऊ प्लास्टिक कंटेनरों तक का उपयोग करने पर विचार कर रहा है।
चीन को रेल से तेल भेजने की जुगत: महंगी मगर मजबूरी
ईरान के तेल-निर्यातक संघ के प्रवक्ता हामिद हुसैनी ने खुलासा किया है कि ईरान अब समुद्री मार्ग के बजाय रेल मार्ग से चीन को तेल भेजने की कोशिश कर रहा है।
रूट: यह रेल मार्ग तेहरान को चीन के औद्योगिक शहरों यीवू और शीआन से जोड़ता है।
चुनौती: विशेषज्ञों का कहना है कि रेल से तेल भेजना समुद्री जहाजों की तुलना में कई गुना महंगा पड़ता है। लेकिन अमेरिकी नाकाबंदी के कारण समुद्री रास्ते बंद होने की वजह से ईरान के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
दो हफ्ते का समय और 'ऑपरेशनल कोलेप्स' का डर
ईरान के पास तेल भंडारण की क्षमता अब अपने अंतिम चरण में है।
आंकड़े: नाकाबंदी के दौरान ईरान का जमीनी तेल भंडार 46 लाख बैरल बढ़कर 4.9 करोड़ बैरल तक पहुंच गया है।
डेडलाइन: अनुमान है कि यदि निर्यात शुरू नहीं हुआ, तो मई के मध्य तक ईरान के पास तेल रखने की जगह पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इसके बाद उसे अपना उत्पादन मौजूदा स्तर से आधा (12-13 लाख बैरल रोज) करने पर मजबूर होना पड़ेगा।
जब भंडारण भर जाता है, तो देश क्या करते हैं?
तेल निर्यात रुकने पर कोई भी देश चरणबद्ध तरीके से ये कदम उठाता है:
फ्लोटिंग स्टोरेज (Floating Storage): जब जमीन पर मौजूद टैंक भर जाते हैं, तो विशाल टैंकर जहाजों में तेल भरकर उन्हें समुद्र में ही खड़ा कर दिया जाता है।
भारी छूट (Heavy Discounts): खरीदारों को आकर्षित करने के लिए देश बाजार भाव से बहुत कम कीमत पर तेल बेचने की पेशकश करते हैं।
कुओं को बंद करना (Shutting Wells): यह सबसे आखिरी रास्ता है। एक बार कुआं बंद होने पर उसे दोबारा शुरू करने में महीनों लग सकते हैं और अरबों डॉलर का खर्च आता है।
क्या है अमेरिका की रणनीति?
वॉशिंगटन की रणनीति साफ है— "अधिकतम दबाव" (Maximum Pressure)। अमेरिका चाहता है कि तेल न बिक पाने और भंडारण संकट के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था इतनी कमजोर हो जाए कि वह परमाणु समझौते और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर हो जाए। यह अब एक 'वेटिंग गेम' बन गया है कि पहले कौन झुकता है— अमेरिका की नाकाबंदी या ईरान की भंडारण क्षमता।