'कंगाली में आटा गीला': ईरान युद्ध ने तोड़ी पाकिस्तान की कमर, शहबाज शरीफ ने दुनिया के सामने रोया दुखड़ा
India News Live,Digital Desk : पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान के लिए ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग 'ताबूत में आखिरी कील' साबित हो रही है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि इस युद्ध ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया है। शरीफ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में तेल का भंडार खत्म होने की कगार पर है और देश में 'आर्थिक लॉकडाउन' जैसे हालात बन गए हैं।
तेल बिल में 160% का उछाल: अर्थव्यवस्था की 'लंका' लगी
शहबाज शरीफ ने आंकड़ों के जरिए पाकिस्तान की बदहाली की तस्वीर पेश की। उन्होंने बताया कि युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें और सप्लाई चेन प्रभावित होने से पाकिस्तान का खर्च बेकाबू हो गया है:
पहले का खर्च: युद्ध से पहले पाकिस्तान साप्ताहिक तेल आयात पर लगभग 30 करोड़ डॉलर खर्च करता था।
अब का खर्च: यही खर्च अब बढ़कर 80 करोड़ डॉलर प्रति सप्ताह पहुंच गया है।
प्रधानमंत्री ने दुख जताते हुए कहा कि पिछले दो साल की कड़ी मेहनत से जो आर्थिक सुधार किए गए थे, इस जंग ने उन पर पानी फेर दिया है।
मध्यस्थता के लिए क्यों 'बेचैन' है पाकिस्तान?
पाकिस्तान इस युद्ध में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा था। शहबाज शरीफ के बयान ने साफ कर दिया कि यह बेचैनी किसी वैश्विक शांति के लिए नहीं, बल्कि खुद के अस्तित्व को बचाने के लिए थी।
कोशिशें नाकाम: दूसरे दौर की बातचीत शुरू करवाने की पाकिस्तान की तमाम कोशिशें अब तक विफल रही हैं।
अकेले बस की बात नहीं: शरीफ ने दुनिया से अपील करते हुए कहा कि इन चुनौतियों से निपटना पाकिस्तान के अकेले के बस की बात नहीं है और सभी देशों को तनाव कम करने में योगदान देना चाहिए।
सिर्फ 5-7 दिन का तेल: देश में हाहाकार
पाकिस्तान के ऊर्जा और वित्त मंत्रालय ने एक भयावह कबूलनामा किया है कि देश के पास अब केवल 5 से 7 दिनों का कच्चा तेल बचा है।
पाबंदियां: तेल बचाने के लिए वर्क फ्रॉम होम (WFH) लागू कर दिया गया है।
वेतन कटौती: सरकारी अफसरों और मंत्रियों के वेतन में कटौती की गई है ताकि विदेशी मुद्रा बचाई जा सके।
UAE की नाराजगी और 'कर्ज का चक्रव्यूह'
पाकिस्तान की मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब उसका करीबी दोस्त संयुक्त अरब अमीरात (UAE) उससे नाराज हो गया।
नाराजगी की वजह: ईरान और अमेरिका के बीच 'न्यूट्रल' रहने की कोशिश में पाकिस्तान ने ईरानी हमलों की खुलकर निंदा नहीं की, जिससे UAE भड़क गया।
कर्ज वापसी: UAE ने अपनी अरबों डॉलर की आर्थिक मदद वापस मांग ली है। अब आलम यह है कि पाकिस्तान को UAE का कर्ज चुकाने के लिए सऊदी अरब जैसे देशों के सामने हाथ फैलाना पड़ रहा है। यानी एक का कर्ज उतारने के लिए दूसरे से नया कर्ज लिया जा रहा है।