कोहिनूर की वापसी का मुद्दा: जोहरान ममदानी और किंग चार्ल्स की मुलाकात में क्या हुआ?

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India News Live,Digital Desk : न्यूयॉर्क के भारतवंशी मेयर जोहरान ममदानी ने हाल ही में ब्रिटिश सम्राट किंग चार्ल्स से मुलाकात की, जिससे एक बार फिर 'कोहिनूर' हीरे की वापसी की बहस वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। ममदानी ने मुलाकात से पहले सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे किंग को कोहिनूर हीरा भारत को वापस करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। हालांकि, इस मुलाकात की बंद कमरे में हुई बातचीत का आधिकारिक विवरण अभी तक सामने नहीं आया है।

मुलाकात की पृष्ठभूमि: 9/11 पीड़ितों का कार्यक्रम

जोहरान ममदानी और किंग चार्ल्स की यह मुलाकात न्यूयॉर्क में 9/11 हमलों के पीड़ितों की याद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई।

ममदानी का बयान: "अगर मुझे किंग से व्यक्तिगत रूप से बात करने का मौका मिलता है, तो मैं निश्चित रूप से कोहिनूर की वापसी का मुद्दा उठाऊंगा।"

बकिंघम पैलेस की चुप्पी: मुलाकात के बाद न तो ममदानी और न ही बकिंघम पैलेस ने यह स्पष्ट किया कि क्या वास्तव में हीरे पर कोई चर्चा हुई। राजनयिक हलकों में इसे एक 'शिष्टाचार भेंट' के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन ममदानी के इरादों ने इसे राजनीतिक रंग दे दिया है।

कोहिनूर: कोल्लूर खदान से लंदन के टावर तक का सफर

कोहिनूर का इतिहास जितना वैभवशाली है, उतना ही विवादित भी।

उत्पत्ति: यह बेशकीमती हीरा भारत की कोल्लूर खदान (वर्तमान आंध्र प्रदेश) से निकला था। कटाई से पहले इसका वजन 186 कैरेट था।

मालिकाना हक: यह हीरा काकतीय राजवंश, खिलजी, मुगल, अफगान और अंततः सिखों के पास रहा।

छीनने का इतिहास: 1849 में दूसरे एंग्लो-सिख युद्ध के बाद, ईस्ट इंडिया कंपनी ने 10 वर्षीय महाराजा दलीप सिंह को 'लाहौर की संधि' पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया। इतिहासकारों का मानना है कि एक छोटे बच्चे से जबरन दस्तखत करवाना अनैतिक था।

ब्रिटेन का तर्क बनाम भारत की मांग

ब्रिटेन का रुख: ब्रिटिश सरकार हमेशा से यह कहती आई है कि कोहिनूर को एक 'कानूनी संधि' के तहत प्राप्त किया गया था और इसे वापस करने का कोई कानूनी आधार नहीं है।

भारत का दावा: भारत का कहना है कि यह हीरा उसकी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है जिसे औपनिवेशिक काल के दौरान लूटा गया था। कोहिनूर वर्तमान में लंदन के टॉवर (Tower of London) में 'क्वीन मदर' के ताज में जड़ा हुआ है।