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September 09 2026 03:19 am

व्यापारियों के लिए स्टॉक लिमिट घटाकर की आधी; जमाखोरी और सट्टेबाजी रोकने को 4,000 से घटाकर 2,000 क्विंटल की सीमा तय

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गणेशोत्सव, नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों से ठीक पहले देश भर के आम उपभोक्ताओं और परिवारों को मीठी राहत देने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने चीनी बाजार पर बड़ा प्रशासनिक शिकंजा कस दिया है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने एक अहम आदेश जारी करते हुए देश भर के चीनी डीलरों और थोक व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की अधिकतम सीमा (Stock Holding Limit) को सीधे आधा कर दिया है। नए नियमों के तहत अब चीनी व्यापारी अपने पास अधिकतम 2,000 क्विंटल तक ही चीनी का स्टॉक रख सकेंगे, जो अब तक 4,000 क्विंटल निर्धारित थी। यह संशोधित स्टॉक लिमिट 15 सितंबर 2026 से प्रभावी होगी और 30 नवंबर 2026 तक पूरे देश में लागू रहेगी। सरकार के इस आक्रामक कदम का मुख्य उद्देश्य त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना, बिचौलियों द्वारा की जाने वाली जमाखोरी और कृत्रिम किल्लत (Artificial Scarcity) पर पूरी तरह रोक लगाना और खुदरा कीमतों में होने वाली अवांछित तेजी को थामना है।

4,000 से घटाकर 2,000 क्विंटल की गई स्टॉक लिमिट: 15 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा नया नियम

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, देश के किसी भी हिस्से में कार्यरत चीनी व्यापारी या डीलर किसी भी समय 2,000 क्विंटल से अधिक चीनी अपने गोदामों में नहीं रख सकेंगे। इसके साथ ही सरकार ने '30 दिन की समयसीमा' (30-Day Holding Rule) का कड़ा नियम भी बरकरार रखा है। इस नियम के तहत किसी भी डीलर को चीनी का कंसाइनमेंट मिलने की तारीख से 30 दिनों के भीतर उसे बाजार में बेचना अनिवार्य होगा।

व्यापारी अब माल रोककर भविष्य में दाम बढ़ने का इंतजार नहीं कर पाएंगे। उल्लेखनीय है कि सरकार ने इससे पहले 1 अगस्त को ही स्टॉक लिमिट 4,000 क्विंटल तय की थी, लेकिन बाजार की परिस्थितियों और हालिया मूल्य वृद्धि के संकेतों का विश्लेषण करने के बाद सरकार ने महज एक महीने के भीतर इस सीमा पर और कैंची चलाते हुए इसे 2,000 क्विंटल कर दिया है।

कोलकाता को क्यों मिली विशेष छूट? पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत की सप्लाई चेन का रखा गया ख्याल

सरकार ने इस संशोधित आदेश में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्रों (Kolkata Metropolitan Area) के लिए एक विशेष अपवाद रखा है। आदेश के अनुसार, कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों के चीनी व्यापारियों के लिए 4,000 क्विंटल की पुरानी स्टॉक लिमिट को ही यथावत जारी रखा जाएगा। मंत्रालय ने इस छूट के पीछे का तार्किक कारण स्पष्ट करते हुए बताया कि कोलकाता क्षेत्र देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स और डिस्ट्रीब्यूशन हब के रूप में कार्य करता है।

कोलकाता के व्यापारी मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की चीनी मिलों से बड़ी मात्रा में चीनी मंगाते हैं और वहां से असम, मेघालय, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नगालैंड, मिजोरम, बिहार और ओडिशा के सुदूर क्षेत्रों में आपूर्ति करते हैं। यदि कोलकाता में स्टॉक सीमा को अत्यधिक घटा दिया जाता, तो लंबी दूरी और पहाड़ी रास्तों के चलते पूर्वोत्तर के राज्यों में चीनी की आपूर्ति बाधित होने का खतरा पैदा हो सकता था। इसी सप्लाई चेन संतुलन को सुरक्षित रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

जमाखोरी और सट्टेबाजी पर लगाम: औचक जांच में पकड़ी गई गड़बड़ियों के बाद मंत्रालय ने उठाया कड़ा कदम

स्टॉक लिमिट को आधा करने का यह कड़ा फैसला सरकार द्वारा देशभर की चीनी मिलों, थोक डीलरों और व्यापारियों के परिसरों पर की गई गहन फिजिकल वेरिफिकेशन (भौतिक सत्यापन) के बाद लिया गया है। जांच एजेंसियों और खाद्य सुरक्षा निरीक्षकों की औचक जांच में यह बात सामने आई थी कि कई मिलें और बड़े व्यापारी अपने मासिक रिटर्न में घोषित स्टॉक से कहीं अधिक माल गोदामों में दबाकर बैठे थे।

इतना ही नहीं, कुछ मामलों में यह भी देखा गया कि मिलों द्वारा महीने की शुरुआत में बेची गई चीनी को खरीदार जानबूझकर महीने के अंत तक नहीं उठा रहे थे, जिससे खुले बाजार में कृत्रिम कमी दिखाकर दाम बढ़ाए जा सकें। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि चीनी मिलों और व्यापारियों के स्टॉक की फिजिकल वेरिफिकेशन का यह सघन अभियान आगामी हफ्तों में भी पूरी सख्ती से जारी रहेगा। पोर्टल पर गलत जानकारी देने या तय सीमा से अधिक माल रखने वालों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act, 1955) और शुगर कंट्रोल ऑर्डर के तहत सीधी दंडात्मक कार्रवाई और जब्ती की जाएगी।

15 दिन के स्टॉक नियम से लेकर पाक्षिक कोटा: त्योहारी सीजन में कीमतें नियंत्रित रखने के लिए सरकार का एक्शन प्लान

केंद्र सरकार ने चीनी बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए पिछले एक महीने में चौतरफा रणनीति लागू की है:

बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं पर पाबंदी: 1 सितंबर से उन सभी बड़े कमर्शियल उपभोक्ताओं (जैसे बेवरेज कंपनियां, कन्फेक्शनरी, बिस्कुट और मिठाई निर्माता) पर पाबंदी लगा दी गई है जो महीने में 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपभोग करते हैं। ऐसे संस्थान अब अपनी अधिकतम 15 दिनों की जरूरत से अधिक चीनी स्टॉक में नहीं रख सकते।

मासिक से पाक्षिक कोटा व्यवस्था: चीनी मिलों के लिए अब मासिक कोटे के बजाय 'पाक्षिक कोटा' (Fortnightly Quota) लागू कर दिया गया है। इसके तहत मिलों को पहले हफ्ते में कम से कम 40% और बाकी 60% अगले हफ्ते में बेचना अनिवार्य है, साथ ही बिक्री के 7 दिनों के भीतर मिल से माल का डिस्पैच करना जरूरी कर दिया गया है।

10 लाख टन कच्चे माल का ड्यूटी-फ्री आयात: घरेलू उपलब्धता को मजबूत करने के लिए सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख मीट्रिक टन (10 LMT) रॉ शुगर के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी है।

इन उपायों का सकारात्मक असर दिखने भी लगा है। अगस्त के महीने में खुदरा बाजार में जो चीनी ₹48 से बढ़कर ₹55-56 प्रति किलो तक पहुंच गई थी, उसके एक्स-मिल थोक भावों में हालिया दिनों में करीब 20 प्रतिशत तक की नरमी दर्ज की गई है, जिससे खुदरा कीमतों में भी गिरावट शुरू हो गई है।

15 अक्टूबर से शुरू होगी नई पेराई: जानिए आम जनता को कितनी मिलेगी राहत

वर्तमान 2025-26 चीनी सत्र (जो सितंबर के अंत में समाप्त हो रहा है) के दौरान गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर रोग तथा कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश के चलते कुल उत्पादन अनुमान घटकर करीब 306 लाख मीट्रिक टन रहने का आकलन किया गया है। हालांकि, आगामी त्योहारी मांग को देखते हुए सरकार ने चीनी मिलों को निर्देश दिया है कि वे नए सत्र की गन्ने की पेराई 15 अक्टूबर से अनिवार्य रूप से शुरू कर दें।

अक्टूबर के महीने में ही 10 लाख टन से अधिक ताजा चीनी का उत्पादन होने का अनुमान है, जिसे बिना किसी कोटे की पाबंदी के तुरंत घरेलू बाजार में बेचने की छूट दी गई है। इसके बाद नवंबर में करीब 45 लाख टन नई चीनी बाजार में आएगी, जिससे त्योहारी सीजन के चरम (दशहरा और दिवाली) के दौरान देश में चीनी की भरपूर और निर्बाध आपूर्ति बनी रहेगी। सरकार के इस ताजा फैसले ने यह साफ कर दिया है कि त्योहारी सीजन में आम जनता की रसोई और जेब पर किसी भी तरह की कालाबाजारी या महंगाई का बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा।